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Mahoba: यूरिया वितरण में मनमानी से भड़के किसानों का हंगामा, गोदाम में घुसी महिलाओं को अंदर किया बंद

Sat, 06 Dec 2025 06:30 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महोबा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महोबा Published by: शिखा पांडेय Updated Sat, 06 Dec 2025 06:30 PM IST
सार

महोबा में यूरिया वितरण में मनमानी से किसान भड़क गए और हंगामा किया। कई किसानों को टोकन मिलने के बाद भी खाद नहीं दी गई।

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Mahoba: Farmers protest against arbitrary urea distribution
खाद न मिलने पर हंगामा करते किसान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

महोबा जिले में यूरिया खाद की कमी बनी हुई है। शनिवार को पीसीएफ कृषक केंद्र जैतपुर में खाद वितरण की सूचना पर सैकड़ों किसान समिति पहुंच गए। कई घंटे लाइन में लगने के बाद भी अधिकांश किसानों को खाद नहीं मिली। इस पर किसानों ने खाद वितरण में मनमानी का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। आक्रोशित महिलाएं समिति के गोदाम में घुस गईं। महिलाओं का आरोप है कि कर्मचारियों ने उन्हें गोदाम में बंद किया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने मामला शांत कराया।
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पीसीएफ कृषक केंद्र जैतपुर में ठंड के बाद भी किसान सुबह पांच बजे से समिति पहुंच गए। देखते ही देखते किसानों की लंबी-लंबी कतारें लग गईं। दोपहर बाद 100 से अधिक किसानों को टोकन नहीं मिले जबकि 50 से अधिक किसानों के पास टोकन होने के बाद भी खाद नहीं दी गई। इससे किसानों ने हंगामा शुरू कर दिया। समिति कर्मियों पर मनमानी का आरोप लगाया। इसी बीच कुछ महिला किसान गोदाम में घुस गईं और यूरिया लेने की जिद पर अड़ गईं।
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किसान उर्मिला, क्रांति, चंद्रकली, संतोष कुमारी, कैलाश देवी आदि ने आरोप लगाया कि टोकन होने के बाद भी उन्हें खाद नहीं दी गई। जब वह गोदाम के अंदर बोरियाें की स्थिति देखने गईं तो कर्मचारियों ने बाहर निकालने की कोशिश की। बाहर जाने से मना करने पर कर्मचारियों ने शटर गिराकर उन्हें गोदाम में बंद कर दिया। बाद में उन्हें निकाला गया। सूचना पर पहुंची यूपी 112 पुलिस ने किसानों को समझाते हुए मामला शांत कराया। उधर, पीसीएफ प्रभारी दिनेश कुमार का कहना है किसानों के आरोप बेबुनियाद हैं। किसानों के टोकन पर दो बोरी यूरिया दी जा रही थी। कुछ महिलाएं जबरन गोदाम में घुस गईं, जिसकी सूचना पुलिस को दी गई। किसी महिला को अंदर बंद नहीं किया गया। किसानों के हंगामे के बाद वितरण रोक दिया गया था।
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घंटों इंतजार के बाद भी नहीं मिला टोकन
किसान शिवाकांत राजपूत का कहना है कि वह सुबह साढ़े पांच बजे समिति पहुंच गए थे। घंटों इंतजार के बाद टोकन मिला लेकिन खाद नहीं दी गई। आरोप लगाया कि चहेतों को अधिक खाद दी गई जबकि टोकन वाले किसानों को ही खाद नहीं दी।

टोकन दिया लेकिन खाद नहीं मिली
किसान थान सिंह कहते हैं कि वह सुबह से टोकन के लिए लाइन में लगे रहे। उन्हें टोकन तो दिया गया लेकिन एक भी बोरी खाद नहीं मिली। आरोप लगाया कि समिति कर्मचारी खाद की कालाबाजारी कर रहे हैं जबकि किसान परेशान हैं।

सुबह पांच बजे आए, शाम तक खाद नहीं मिली
मुढ़ारी गांव की महिला किसान संतोषी का कहना है कि वह सुबह पांच बजे से खाद लेने के लिए समिति के बाहर लाइन में लगी रहीं। शाम तक उन्हें खाद नहीं मिली। बताया गया कि खाद नहीं है, जब उन्होंने गोदाम में जाकर देखा तो उन्हें अंदर बंदकर दिया गया जबकि खाद उपलब्ध थी।


चहेतों को दी जा रही खाद
महिला किसान क्रांति कहती हैं कि वह टोकन के साथ रुपये लिए थीं। आरोप लगाया कि समिति के कर्मचारियों ने चहेतों को खाद दे दी। जब वह गोदाम के अंदर गईं तो उन्हें शटर गिराकर बंद कर दिया गया। पुलिस ने उन्हें बाहर निकलवाया, इसके बाद भी खाद नहीं दी गई।
 
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