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महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार का बयान, बोले- प्रज्ञा ठाकुर औरों की तरह घड़ियाली आंसू नहीं बहातीं
Sun, 01 Dec 2019 03:33 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 01 Dec 2019 03:33 PM IST
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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार गांधी
- फोटो : अमर उजाला
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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार गांधी का कहना है कि वह साध्वी प्रज्ञा ठाकुर की सराहना करते हैं। उनके दिल में जो बात है उसे सच्चाई से कह रही हैं। बड़े नेता सिर्फ घड़ियाली आंसू बहाया करते हैं। उन्होंने कहा कि आज बापू के हत्यारों का महिमा मंडन हो रहा है।
70 सालों में गांधी को डैमेज करने का प्रयास करने वाले सफल हो गए हैं लेकिन गांधी को मानने का जो दावा करते हैं, वो अगर अपने रास्ते पर चले होते तो यह स्थिति ही न आती। गांधीवादियों ने बापू का सबसे बड़ा नुकसान किया है।
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70 सालों में गांधी को डैमेज करने का प्रयास करने वाले सफल हो गए हैं लेकिन गांधी को मानने का जो दावा करते हैं, वो अगर अपने रास्ते पर चले होते तो यह स्थिति ही न आती। गांधीवादियों ने बापू का सबसे बड़ा नुकसान किया है।
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प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बना कर रख दिया। कानपुर में शनिवार को गौरहरि सिंहानिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च में आयोजित कानपुर लिटरेचर फेस्टिवल (केएलएफ) 2019 में तुषार गांधी से पत्रकारों की भेंट हुई।
अनौपचारिक वार्ता के दौरान गांधीवाद को लेकर चल रहे द्वंद की स्थिति पर उनके चेहरे पर कभी सख्ती और कभी रंज के भाव आते-जाते। तुषार बोले कि वह गांधीवाद के भक्त नहीं हैं, दरअसल गांधी का दर्शन एक जीवन शैली है।
अनौपचारिक वार्ता के दौरान गांधीवाद को लेकर चल रहे द्वंद की स्थिति पर उनके चेहरे पर कभी सख्ती और कभी रंज के भाव आते-जाते। तुषार बोले कि वह गांधीवाद के भक्त नहीं हैं, दरअसल गांधी का दर्शन एक जीवन शैली है।
यह गरीबों व कमजोरों को शक्ति देता है। गांधी को भुलाने पर क्या नुकसान होने वाला है, यह सोचने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि तीन महीने में वह 20 स्टांप कलेक्शन करने वालों से मिले हैं। वे सिर्फ गांधी के स्टांप ही इकट्ठे करते हैं। यह गांधी में लोगों की आस्था और आकर्षण दिखाता है।
अयोध्या पर आए न्यायालय के फैसले से उन्होंने असहमति जताई। उन्होंने कहा कि कोई फैसला तोड़फोड़ को बढ़ावा देने वाला नहीं होना चाहिए। साथ ही आस्था और कानून को मिश्रित नहीं किया जाना चाहिए।
अयोध्या पर आए न्यायालय के फैसले से उन्होंने असहमति जताई। उन्होंने कहा कि कोई फैसला तोड़फोड़ को बढ़ावा देने वाला नहीं होना चाहिए। साथ ही आस्था और कानून को मिश्रित नहीं किया जाना चाहिए।