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नई लोकसभा का चेहरा तय करेगी मंगल की महादशा, ज्योतिषियों ने किया विमर्श
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Fri, 28 Sep 2018 03:02 PM IST
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डेमो पिक
असम की राजधानी गुवाहाटी में आयोजित महासम्मेलन में ज्योतिषियों ने भविष्यवाणी की कि नरेंद्र मोदी दोबारा प्रधानमंत्री बनेंगे। पद्मेश इंस्टीट्यूट ऑफ वैदिक साइंसेज, कानपुर और होटल राजमहल के संयोजन में आयोजित 70वें राष्ट्रीय ज्योतिष महासम्मेलन में 158 ज्योतिषाचार्य शामिल हुए। इन्होंने वर्ष-2019 के भारत की राजनीतिक, आर्थिक और प्राकृतिक स्थिति के अलावा पड़ोसी राष्ट्रों के साथ बनते-बिगड़ते संबंधों पर विमर्श किया।
महासम्मेलन का उद्घाटन करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र ने कहा कि ज्योतिष को अगर ढंग से देखा जाए तो यह हमारे जीवन को सुरक्षित बनाता है। भारतीय संस्कृति बड़ी व्यापक है। भूगोल और खगोल का सारा ज्ञान इसमें समाया हुआ है। खगोल विज्ञान की गणित के आधार पर ग्रहों की सही जानकारी होती है। समुचित समन्वय का काम ज्योतिषशास्त्र भी कर सकता है। पद्मेश इंस्टीट्यूट ऑफ वैदिक साइंसेज के संस्थापक अध्यक्ष केए दुबे पद्मेश ने कहा कि नव भारत के निर्माण में ज्योतिष की भूमिका अहम होगी। आने वाले वर्षों में भारत आध्यात्मिक और विज्ञान की दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा। कहा कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण भी शुरू होगा।
चंद्रमा जनता का कारक ग्रह है। यह संयोग है कि स्वतंत्र भारत के साथ भारतीय जनता पार्टी की कुंडली में चंद्रमा की महादशा चल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की कुंडली में भी चंद्रमा की महादशा चल रही है। इस कारण अनेक राजनेता मंत्री चुनाव में पराजित होंगे। नई लोकसभा में कम से कम तीस फीसदी चेहरे नए होंगे, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही होंगे। पुणे से आए वयोवृद्ध ज्योतिषी सुुभाष डोंगरे ने भी नरेंद्र मोदी के दोबारा प्रधानमंत्री बनने की भविष्यवाणी की। वहीं, राउरकेला के सुरेंद्र मोहंती ने भविष्यवाणी की कि आगामी लोकसभा चुनाव से पहले कई लोगों की आस्था बनेगी और बिगड़ेगी, लेकिन प्रधानमंत्री नहीं बदलेगा। महासम्मेलन में भारतीय ज्योतिष परिषद के महामंत्री इंदौर के घनश्याम ठाकुर, नेपाल से आए एनके कोइराला, नागपुर के डॉ. रवींद्र खरे, पूर्व डीजीपी जीएम श्रीवास्तव ने विचार व्यक्त किए।
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ज्योतिषियों का सम्मान भी
22 और 23 सितंबर को आयोजित महासम्मेलन में गुवाहाटी के वयोवृद्ध ज्योतिर्विद रामनाथ गोस्वामी को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा गया। इसके अलावा अन्य ज्योतिर्विदों को वैदिक विभूषण, वैदिक सम्मान और वैदिक श्री सम्मान दिया गया। सम्मान पाने वालों में कानपुर की वास्तुशास्त्री अंकिता झुनझुनवाला, विकास झांझरिया, प्रदीप अवस्थी और स्वाति सक्सेना भी शामिल रहीं। इस दौरान कमल भूरा ने भूटान में 71वां राष्ट्रीय ज्योतिष महासम्मेलन आयोजित करने का प्रस्ताव रखा। इस पर सभी ने सहमति जताते हुए उन्हें संयोजक बनाया।
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महासम्मेलन का उद्घाटन करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र ने कहा कि ज्योतिष को अगर ढंग से देखा जाए तो यह हमारे जीवन को सुरक्षित बनाता है। भारतीय संस्कृति बड़ी व्यापक है। भूगोल और खगोल का सारा ज्ञान इसमें समाया हुआ है। खगोल विज्ञान की गणित के आधार पर ग्रहों की सही जानकारी होती है। समुचित समन्वय का काम ज्योतिषशास्त्र भी कर सकता है। पद्मेश इंस्टीट्यूट ऑफ वैदिक साइंसेज के संस्थापक अध्यक्ष केए दुबे पद्मेश ने कहा कि नव भारत के निर्माण में ज्योतिष की भूमिका अहम होगी। आने वाले वर्षों में भारत आध्यात्मिक और विज्ञान की दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा। कहा कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण भी शुरू होगा।
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चंद्रमा जनता का कारक ग्रह है। यह संयोग है कि स्वतंत्र भारत के साथ भारतीय जनता पार्टी की कुंडली में चंद्रमा की महादशा चल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की कुंडली में भी चंद्रमा की महादशा चल रही है। इस कारण अनेक राजनेता मंत्री चुनाव में पराजित होंगे। नई लोकसभा में कम से कम तीस फीसदी चेहरे नए होंगे, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही होंगे। पुणे से आए वयोवृद्ध ज्योतिषी सुुभाष डोंगरे ने भी नरेंद्र मोदी के दोबारा प्रधानमंत्री बनने की भविष्यवाणी की। वहीं, राउरकेला के सुरेंद्र मोहंती ने भविष्यवाणी की कि आगामी लोकसभा चुनाव से पहले कई लोगों की आस्था बनेगी और बिगड़ेगी, लेकिन प्रधानमंत्री नहीं बदलेगा। महासम्मेलन में भारतीय ज्योतिष परिषद के महामंत्री इंदौर के घनश्याम ठाकुर, नेपाल से आए एनके कोइराला, नागपुर के डॉ. रवींद्र खरे, पूर्व डीजीपी जीएम श्रीवास्तव ने विचार व्यक्त किए।
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ज्योतिषियों का सम्मान भी
22 और 23 सितंबर को आयोजित महासम्मेलन में गुवाहाटी के वयोवृद्ध ज्योतिर्विद रामनाथ गोस्वामी को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा गया। इसके अलावा अन्य ज्योतिर्विदों को वैदिक विभूषण, वैदिक सम्मान और वैदिक श्री सम्मान दिया गया। सम्मान पाने वालों में कानपुर की वास्तुशास्त्री अंकिता झुनझुनवाला, विकास झांझरिया, प्रदीप अवस्थी और स्वाति सक्सेना भी शामिल रहीं। इस दौरान कमल भूरा ने भूटान में 71वां राष्ट्रीय ज्योतिष महासम्मेलन आयोजित करने का प्रस्ताव रखा। इस पर सभी ने सहमति जताते हुए उन्हें संयोजक बनाया।