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इंसानों की तरह सोचेंगी और सीखेंगी मशीनें, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से आसान होगी जिंदगी

Sun, 01 Dec 2019 08:21 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Sun, 01 Dec 2019 08:21 PM IST
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Machines made with artificial intelligence technology will think and learn like humans
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : गूगल
अभी तक मशीनें वही काम करती आई हैं, जिसके लिए इंसान ने उन्हें तैयार किया। कंप्यूटर, कार, हवाई जहाज और मोबाइल जैसे आविष्कार इंसान के जरिये संचालित होते आए हैं। अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (कृत्रिम विशेषज्ञता) तकनीक से बनने वाली मशीनें न सिर्फ इंसान की तरह सोचेंगी, बल्कि गलतियों से सीखेंगी और इंसान को गाइड करेंगी। इससे जिंदगी आसान होगी।
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अब हम ऐसी ही मशीनों वाले युग में प्रवेश कर चुके हैं। भविष्य की संभावनाओं को जाहिर करती ये बातें शहर की कंपनी इंजेक्टो प्लास्ट के प्रबंध निदेशक अरुण कुमार शाह ने पीएसआईटी में कहीं। 
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शनिवार से यहां दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस की शुरुआत हुई। विषय था रीसेंट एडवांसमेंट ऑफ कंप्यूटर साइंस, कम्यूनिकेशन एंड इंफर्मेशन टेक्नोलॉजी यानी कंप्यूटर विज्ञान, संचार एवं सूचना तकनीक में तात्कालिक बदलाव।
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शाह ने बताया कि तकनीक के विकास में हम दुनिया के उन्नत देशों की बराबरी कर रहे हैं। पहले दुनिया भर के देशों में खुद को आगे दिखाने के लिए औद्योगिक या व्यापारिक प्रतिद्वंद्विता होती थी। यह प्रतिद्वंद्विता तकनीक के मामले में है। जिसने जितने ज्यादा आविष्कार किए, वह देश उतना ही सक्षम और आगे माना जाता है। उन्नत तकनीक के बदौलत ही दुनिया के कई देशों ने अपने यहां खाद्यान्न, ऊर्जा, ट्रैफिक, अशिक्षा, स्वास्थ्य की समस्याओं से छुटकारा पाया। भारत इस दिशा में आगे बढ़ रहा है। 

कंप्यूटर खुद ही लेता है इंटरव्यू 
लार्सन एंड टर्बो कंस्ट्रक्शन लिमिटेड के उपाध्यक्ष व मानव संसाधन विभाग के मुखिया डॉ. सी. जयकुमार ने बताया कि तमाम बड़ी कंपनियों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक की मदद से कंप्यूटर ही इंटरव्यू लेता है। वही आवेदन पत्र की छंटनी करता है और इंटरव्यू के लिए बुलाए जाने योग्य लोगों की सूची सौंपता है। इंटरव्यू में अभ्यर्थियों की विशेषज्ञता की परख भी अब कंप्यूटर ही करता है। इंसान किसी के प्रति सहानुभूति रख सकता है। कंप्यूटर कतई नहीं रखता।

तकनीक नए अवसर भी देती है 
एरिक्शन इंडिया ग्लोबल सर्विस लिमिटेड के ग्लोबल हेड अभय वैश्य ने कहा कि निश्चित तौर पर तकनीकी विकास से परंपरागत रोजगार में कमी आती है। इंसान का काम मशीनें करने लगती हैं। लेकिन तकनीक नए अवसरों को जन्म भी देती हैं। तकनीक की मदद से ही बड़े से बडे़ पुल, मेट्रो प्रोजेक्ट एक से दो साल में तैयार होने लगे हैं। 

इनकी रही सहभागिता  
अंतराराष्ट्रीय कांफ्रेंस में पड़ोसी देशों श्रीलंका, नेपाल, भूटान, ओमान, सिंगापुर के शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने भी हिस्सा लिया। देश की दिग्गज कंपनियों विप्रो के नेशनल हेड लवनम अंबाला, ग्लोबल लॉजिक के एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट (इंजीनियरिंग), ओरैकल के निदेशक नीरज नारंग, टाटा कंसल्टेंसी सर्विस से अजय सिंह ने क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सिक्योरिटी, डिजिटल फोरेंसिक आदि तकनीक पर अपनी विशेषज्ञता छात्र-छात्राओं से साझा की। जर्मनी में सूचना तकनीक के विशेषज्ञ उल्रिच फेंक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये छात्र-छात्राओं से रूबरू हुए। कॉन्फ्रेंस में पीएसआईटी की उपाध्यक्ष निर्मला सिंह, प्रबंधक निदेशक शेफाली राज, अभिजित सिंह, डॉ. शिवानी कपूर, डॉ. उदयभान त्रिवेदी, डॉ. एपीएस भदौरिया मौजूद रहे।
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