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बिना पता बांटे जा रहे लंच पैकेट
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कानपुर देहात। अकबरपुर नगर पंचायत स्थित सामुदायिक रसोई में बनने वाला खाना जरूरतमंदों को देने में होने वाली खानापूरी की पोल खुली, तो ईओ ने आनन-फानन अधूरी रिपोर्ट बनाकर जिला प्रशासन को भेज दी। भोजन पाने वाले 45 लोग कहां रहते, यह भी नहीं बताया गया। साथ ही सिर्फ चार लोगों के मोबाइल नंबर दे दिए गए। अधूरी रिपोर्ट पर डीएम ने नाराजगी जताते हुए नगर पंचायत से सभी लाभार्थियों के नाम, पते मांगे हैं।
कोरोना की दूसरी लहर के चलते लॉकडाउन लगने पर दूसरे प्रांतों से प्रवासी मजदूर गांव लौट रहे हैं। वहीं दिहाड़ी मजदूरों की सबसे बुरी स्थिति है। ऐसे लोगों के सामने भोजन की दिक्कत न हो, इसके लिए सभी नगर पालिका/पंचायतों में सरकारी तौर पर सामुदायिक रसोई संचालित की गई है। जहां प्रति लंच पैकेट 35 रुपये के हिसाब से बनाकर हर रोज जरूरतमंदों तक पहुंचाने का जिम्मा दिया गया है।
वहीं हकीकत ठीक उलट होने पर अमर उजाला ने 18 मई को प्रमुखता से मुद्दा उठाया। जिस पर अकबरपुर नगर पंचायत ईओ ने तेजी दिखाते हुए अधूरी रिपोर्ट बनाकर एडीएम प्रशासन को भेज दी। जिसमें उन्होंने क्षेत्र के 45 लोहा पिटवा परिवारों को भोजन उपलब्ध कराने का दावा किया है। रिपोर्ट में लाभार्थियों के नाम दर्शाते हुए पता गायब कर दिया गया। सिर्फ चार के मोबाइल नंबर दिए गए।
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लाभार्थियों का पता न होने से उनका सत्यापन भी नहीं हो पा रहा है। वहीं 15 से 17 मई तक भोजन उपलब्ध कराने की जियो टैग की गई कुल 15 फोटोग्राफ संलग्न किए गए। ऐसे में नगर पंचायत के आंकड़ों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अधूरी रिपोर्ट पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताते हुए नगर पंचायत से सभी लाभार्थियों के नाम व पते तलब किए हैं।
अकबरपुर की सामुदायिक रसोई से 45 लोहा पिटवा परिवारों को भोजन उपलब्ध कराने के बाबत पता सहित पूरा ब्योरा मांगा जा रहा है। इसका सत्यापन भी कराया जाएगा। - जितेंद्र प्रताप सिंह (जिलाधिकारी)
घुड़की मिलते ही बना खाने का मेन्यू
कानपुर देहात। अकबरपुर नगर पंचायत की सामुदायिक रसोई में पिछले एक सप्ताह से बिना मेन्यू खाना बनाया जा रहा था। मंगलवार को अमर उजाला ने बिना छिले आलू व कुंदरू की सब्जी मिक्स कर मनमाने तरीके से बनाने का मुद्दा उठाया। इस पर डीएम ने नाराजगी जताई तो अफसर नींद से जागे।
रसोई में बुधवार को खाने का मेन्यू जारी कर दिया गया। इसके अनुसार सोमवार व शुक्रवार को आलू सोयाबड़ी की सब्जी, पूड़ी व अचार, मंगलवार व शनिवार को आलू-परवल की सब्जी, पूड़ी व अचार, बुधवार को आलू-गोभी की सब्जी, पूड़ी व अचार, गुरुवार व रविवार को आलू-बैंगन या मौसमी सब्जी, पूड़ी व अचार लंच पैकेट में रहेगा।
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को नहीं दी गई जानकारी
कानपुर देहात। सामुदायिक रसोई संचालित होने के बाद उसमें प्रयुक्त होने वाले मसाले, तेल, अनाज आदि की गुणवत्ता जांचने के लिए नियमानुसार खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन को जानकारी दी जाती है। जिससे टीम मौके पर जाकर खाद्य पदार्थों का सैंपल लेकर प्रयोगशाला भेजती है।
गुणवत्ता सही होने पर इस्तेमाल की छूट दी जाती है, लेकिन अभी तक नगर पंचायत ने खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को सूचना नहीं दी है। जिससे बनने वाले भोजन की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुमांशू सचान ने बताया कि सामुदायिक रसोई संचालन की जानकारी नहीं दी गई है। अफसरों के निर्देश पर निरीक्षण कर नमूना संकलित किया जाएगा।
सामुदायिक रसोई से जरूरतमंदों तक पहुंचा रहे भोजन
पुखरायां। नगरपालिका कार्यालय में संचालित की गई सामुदायिक रसोई में भोजन पैक करके जरूरतमंदों को पहुंचाया जा रहा है। यहां पर 40 से 70 पैकेट प्रतिदिन पैकिंग की जा रही है। नगरपालिका ईओ रामअचल कुरील ने बताया कि वर्तमान में कोरोना कर्फ्यू लगाए जाने के कारण जो दिहाड़ी मजदूर चिह्नित किए गए हैं उनको नगरपालिका से लंच पैकेट बनवा कर मुहैया कराए जा रहे हैं।
इनकी प्रतिदिन संख्या 40 से 70 तक होती है। इनको नगरपालिका कर्मचारी उनके घर तक पहुंचा रहे हैं। जिसकी रिपोर्ट ऑनलाइन उच्चाधिकारियों को भेजी जा रही है। जिसमें कोविड नियमों को ध्यान में रखा जा रहा है। पालिका अध्यक्ष सत्यप्रकाश संखवार ने निगरानी टीम बनाई है।
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कोरोना की दूसरी लहर के चलते लॉकडाउन लगने पर दूसरे प्रांतों से प्रवासी मजदूर गांव लौट रहे हैं। वहीं दिहाड़ी मजदूरों की सबसे बुरी स्थिति है। ऐसे लोगों के सामने भोजन की दिक्कत न हो, इसके लिए सभी नगर पालिका/पंचायतों में सरकारी तौर पर सामुदायिक रसोई संचालित की गई है। जहां प्रति लंच पैकेट 35 रुपये के हिसाब से बनाकर हर रोज जरूरतमंदों तक पहुंचाने का जिम्मा दिया गया है।
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वहीं हकीकत ठीक उलट होने पर अमर उजाला ने 18 मई को प्रमुखता से मुद्दा उठाया। जिस पर अकबरपुर नगर पंचायत ईओ ने तेजी दिखाते हुए अधूरी रिपोर्ट बनाकर एडीएम प्रशासन को भेज दी। जिसमें उन्होंने क्षेत्र के 45 लोहा पिटवा परिवारों को भोजन उपलब्ध कराने का दावा किया है। रिपोर्ट में लाभार्थियों के नाम दर्शाते हुए पता गायब कर दिया गया। सिर्फ चार के मोबाइल नंबर दिए गए।
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लाभार्थियों का पता न होने से उनका सत्यापन भी नहीं हो पा रहा है। वहीं 15 से 17 मई तक भोजन उपलब्ध कराने की जियो टैग की गई कुल 15 फोटोग्राफ संलग्न किए गए। ऐसे में नगर पंचायत के आंकड़ों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अधूरी रिपोर्ट पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताते हुए नगर पंचायत से सभी लाभार्थियों के नाम व पते तलब किए हैं।
अकबरपुर की सामुदायिक रसोई से 45 लोहा पिटवा परिवारों को भोजन उपलब्ध कराने के बाबत पता सहित पूरा ब्योरा मांगा जा रहा है। इसका सत्यापन भी कराया जाएगा। - जितेंद्र प्रताप सिंह (जिलाधिकारी)
घुड़की मिलते ही बना खाने का मेन्यू
कानपुर देहात। अकबरपुर नगर पंचायत की सामुदायिक रसोई में पिछले एक सप्ताह से बिना मेन्यू खाना बनाया जा रहा था। मंगलवार को अमर उजाला ने बिना छिले आलू व कुंदरू की सब्जी मिक्स कर मनमाने तरीके से बनाने का मुद्दा उठाया। इस पर डीएम ने नाराजगी जताई तो अफसर नींद से जागे।
रसोई में बुधवार को खाने का मेन्यू जारी कर दिया गया। इसके अनुसार सोमवार व शुक्रवार को आलू सोयाबड़ी की सब्जी, पूड़ी व अचार, मंगलवार व शनिवार को आलू-परवल की सब्जी, पूड़ी व अचार, बुधवार को आलू-गोभी की सब्जी, पूड़ी व अचार, गुरुवार व रविवार को आलू-बैंगन या मौसमी सब्जी, पूड़ी व अचार लंच पैकेट में रहेगा।
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को नहीं दी गई जानकारी
कानपुर देहात। सामुदायिक रसोई संचालित होने के बाद उसमें प्रयुक्त होने वाले मसाले, तेल, अनाज आदि की गुणवत्ता जांचने के लिए नियमानुसार खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन को जानकारी दी जाती है। जिससे टीम मौके पर जाकर खाद्य पदार्थों का सैंपल लेकर प्रयोगशाला भेजती है।
गुणवत्ता सही होने पर इस्तेमाल की छूट दी जाती है, लेकिन अभी तक नगर पंचायत ने खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को सूचना नहीं दी है। जिससे बनने वाले भोजन की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुमांशू सचान ने बताया कि सामुदायिक रसोई संचालन की जानकारी नहीं दी गई है। अफसरों के निर्देश पर निरीक्षण कर नमूना संकलित किया जाएगा।
सामुदायिक रसोई से जरूरतमंदों तक पहुंचा रहे भोजन
पुखरायां। नगरपालिका कार्यालय में संचालित की गई सामुदायिक रसोई में भोजन पैक करके जरूरतमंदों को पहुंचाया जा रहा है। यहां पर 40 से 70 पैकेट प्रतिदिन पैकिंग की जा रही है। नगरपालिका ईओ रामअचल कुरील ने बताया कि वर्तमान में कोरोना कर्फ्यू लगाए जाने के कारण जो दिहाड़ी मजदूर चिह्नित किए गए हैं उनको नगरपालिका से लंच पैकेट बनवा कर मुहैया कराए जा रहे हैं।
इनकी प्रतिदिन संख्या 40 से 70 तक होती है। इनको नगरपालिका कर्मचारी उनके घर तक पहुंचा रहे हैं। जिसकी रिपोर्ट ऑनलाइन उच्चाधिकारियों को भेजी जा रही है। जिसमें कोविड नियमों को ध्यान में रखा जा रहा है। पालिका अध्यक्ष सत्यप्रकाश संखवार ने निगरानी टीम बनाई है।