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पीना तो दूर सिंचाई लायक भी नहीं रहा लोन नदी का पानी, टेनरियों ने बना दिया ‘विषैला’
Sun, 23 Feb 2020 02:47 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sun, 23 Feb 2020 02:47 AM IST
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लोन नदी उन्नाव
- फोटो : अमर उजाला
उन्नाव में कभी जीवनदायिनी रही लोन नदी का पानी आज पीना तो दूर फसलों को सींचने लायक नहीं बचा है। टेनरियों के प्रदूषित पानी ने लोन नदी को विषैला बना दिया है। नदी के आसपास के गांवों का पानी दूषित हो गया है। खेतों की उत्पादन क्षमता घटने लगी है।
भूगर्भ तक पहुंचे फ्लोराइड से पानी का सेवन करने वाले ग्रामीणों के हाथ-पैर टेढ़े हो रहे हैं। पुरवा तहसील क्षेत्र से निकलने वाली लोन नदी का पानी अब ग्रामीणों के लिए अभिशाप बनता जा रहा है। वैसे तो यह नदी सदर, पुरवा और बीघापुर से गुजरती है लेकिन सदर तहसील क्षेत्र में संचालित टेनरियों का प्रदूषित पानी सीधे इस नदी में छोड़ा जाता है।
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भूगर्भ तक पहुंचे फ्लोराइड से पानी का सेवन करने वाले ग्रामीणों के हाथ-पैर टेढ़े हो रहे हैं। पुरवा तहसील क्षेत्र से निकलने वाली लोन नदी का पानी अब ग्रामीणों के लिए अभिशाप बनता जा रहा है। वैसे तो यह नदी सदर, पुरवा और बीघापुर से गुजरती है लेकिन सदर तहसील क्षेत्र में संचालित टेनरियों का प्रदूषित पानी सीधे इस नदी में छोड़ा जाता है।
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पुरवा तहसील क्षेत्र के कई गांव के लोग इस नदी के पानी से खेतों में बोई जाने वाली फसलों की सिंचाई करते हैं। प्रदूषित पानी से फसलों की सिंचाई होने के कारण खेतों की उपजाऊ क्षमता घटने लगी है। कभी जिन खेतों में फसलें लहलहाती थीं आज वह बंजर नजर आने लगे हैं। यही नहीं नदी के विषैले पानी का असर आसपास के ग्रामीण इलाकों में देखने को मिल रहा है। गांवों का पानी तक खराब हो चुका है। हैंडपंप फ्लोराइडयुक्त पानी दे रहे हैं। जिसे पीकर लोगों के हाथ-पैर टेढ़े होते जा रहे हैं।
नदी के पानी से आती है बदबू
लोन नदी का पानी किस हद तक विषैला हो गया है इसका अंदाजा उधर से गुजरने के दौरान पता चलता है। देखने में पानी काफी गंदा नजर आता है। उसमें लाल रंग की परत जमी है। दूर तक दुर्गंध आती है। इसी कारण नदी के निकट बसे गांवों के लोग बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। नदी में प्रदूषित पानी छोड़े जाने का कई बार विरोध भी हुआ लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
दर्जनों गांवों का पानी हो गया है प्रदूषित
मंगतखेड़ा, बैगांव, अतरसई, मझखोरिया, तारागढ़ी, कासुखेड़ा, मिर्जापुर सुम्हारी, हिम्मतखेड़ा, भूलेमऊ, गदोरवा, बरबट, सिंहपुर, सरसो, टिकरिया, चमियानी, अटवट, कटहर, गढ़ाकोला, सलेथू, भाटमऊ, अढौली, जाजनपुर, बैजुवामऊ, मेडीलालखेड़ा व परसंडा समेत अन्य गांवों की करीब एक लाख आबादी प्रदूषित पानी पीने को मजबूर है।
नदी के पानी से आती है बदबू
लोन नदी का पानी किस हद तक विषैला हो गया है इसका अंदाजा उधर से गुजरने के दौरान पता चलता है। देखने में पानी काफी गंदा नजर आता है। उसमें लाल रंग की परत जमी है। दूर तक दुर्गंध आती है। इसी कारण नदी के निकट बसे गांवों के लोग बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। नदी में प्रदूषित पानी छोड़े जाने का कई बार विरोध भी हुआ लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
दर्जनों गांवों का पानी हो गया है प्रदूषित
मंगतखेड़ा, बैगांव, अतरसई, मझखोरिया, तारागढ़ी, कासुखेड़ा, मिर्जापुर सुम्हारी, हिम्मतखेड़ा, भूलेमऊ, गदोरवा, बरबट, सिंहपुर, सरसो, टिकरिया, चमियानी, अटवट, कटहर, गढ़ाकोला, सलेथू, भाटमऊ, अढौली, जाजनपुर, बैजुवामऊ, मेडीलालखेड़ा व परसंडा समेत अन्य गांवों की करीब एक लाख आबादी प्रदूषित पानी पीने को मजबूर है।