लोकसभा चुनाव 2019: मुलायम के घर में गठबंधन की परीक्षा, सूखा दूर करने की कोशिश में कांग्रेस
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सपा संरक्षक मुलायम सिंह के घर इटावा में इस बार अनुसूचित जाति आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रोफेसर रामशंकर कठेरिया के साथ गठबंधन का भी इम्तिहान है। दो बार आगरा से सांसद रह चुके कठेरिया को भाजपा ने इटावा लोकसभा क्षेत्र से मैदान में उतारा है। वैसे तो इटावा कठेरिया का भी गृह जिला है लेकिन उन्होंने कर्मभूमि आगरा को बनाया था। इस बार इटावा सुरक्षित सीट से उतरे प्रोफेसर रामशंकर को गठबंधन प्रत्याशी कमलेश कठेरिया और पिछली बार भाजपा से सांसद रहे कांग्रेस प्रत्याशी अशोक दोहरे टक्कर दे रहे हैं। गृह जिले में शिवपाल सिंह यादव के काम और उनके नाम के दम पर प्रसपा प्रत्याशी शंभूदयाल दोहरे मुकाबले को चतुष्कोणीय बनाने के प्रयास में जुटे हैं। दो कठेरिया और दो दोहरे प्रत्याशी होने से सवर्ण, मुस्लिम और गैर यादव ओबीसी वोटर इस बार निर्णायक साबित होंगे।
गठबंधन के लिए प्रतिष्ठा का सवाल
मुलायम सिंह का गृह जिला होने के कारण सपा के लिए ये सीट प्रतिष्ठा का प्रश्न है। 15 चुनावों में पांच बार मुलायम सिंह का ही इस सीट पर जादू चला। उनकी अगुवाई वाली सपा के प्रत्याशी ने चार और जनता दल ने एक बार सीट जीती। पिछली बार भाजपा ने 1,72,946 वोटों के बड़े अंतर से यह सीट सपा से छीन ली थी। इस बार भी भाजपा पूरी ताकत लगा रही है। इटावा में मुख्यमंत्री योगी और बसरेहर में उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य सभा कर चुके हैं। फिल्म स्टार असरानी एक सप्ताह से यहां डेरा जमाए हैं।
सूखा दूर करने की कोशिश में कांग्रेस
कांग्रेस इस सीट पर 35 साल से जीत के लिए तरस रही है। दोहरे बाहुल्य सीट पर इस बार पार्टी ने सांसद अशोक दोहरे को मैदान में उतारा है। दोहरे पिछली बार भाजपा के टिकट पर जीते थे। अब कांग्रेस दोहरे की बदौलत यहां पासा पलटने की उम्मीद कर रही है।
कब किसका रहा कब्जा
कुल प्रत्याशी
भाजपा, सपा (गठबंधन), कांग्रेस, प्रसपा समेत 13
विधानसभा क्षेत्र
इटावा (जिला इटावा)
भरथना (जिला इटावा)
औरैया (जिला औरैया)
दिबियापुर (जिला औरैया)
सिकंदरा (जिला कानपुर देहात)