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lok sabha election 2024: कल्याण की त्रिमूर्ति के लिए विरासत भी चुनौती

Mon, 29 Apr 2024 02:54 PM IST
शिखा पांडेय जितेंद्र दीक्षित, अमर उजाला, फर्रुखाबाद
जितेंद्र दीक्षित, अमर उजाला, फर्रुखाबाद Published by: शिखा पांडेय Updated Mon, 29 Apr 2024 02:54 PM IST
सार

lok sabha election 2024: कल्याण सिंह लोधी बिरादरी का बड़ा चेहरा थे। यूपी में आबादी के हिसाब से लोधी समाज की तकरीबन 8 फीसदी हिस्सेदारी है। यह विधानसभा की 70 से 80 फीसदी सीटों पर जीत-हार तय करती है। लोकसभा की लगभग 10 सीटों पर इन्हीं से समीकरण सधता है।

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lok sabha election 2024: Legacy also a challenge for the trinity of welfare in Farrukhabad
मुकेश राजपूत, राजवीर सिंह, साक्षी महाराज - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यह लोकसभा चुनाव भाजपा के दिग्गज नेता रहे कल्याण सिंह के बिना हो रहा है। उन्होंने अपने रहते ही लोध बेल्ट में अपनी विरासत के चेहरे तैयार कर लिए थे। इनमें बेटे राजवीर, साक्षी महाराज और सांसद मुकेश राजपूत शामिल हैं। इस बार इनके लिए जीत के साथ ही विरासत की कसौटी पर खरा उतरना भी चुनौती होगी।

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कल्याण सिंह लोधी बिरादरी का बड़ा चेहरा थे। यूपी में आबादी के हिसाब से लोधी समाज की तकरीबन 8 फीसदी हिस्सेदारी है। यह विधानसभा की 70 से 80 फीसदी सीटों पर जीत-हार तय करती है। लोकसभा की लगभग 10 सीटों पर इन्हीं से समीकरण सधता है। इस चुनाव में कल्याण की विरासत उनकी त्रिमूर्ति पर टिक गई है।
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लोधी बहुल एटा, इटावा, बुलंदशहर, आगरा, फर्रुखाबाद, बदायूं, हाथरस, बरेली सीट भाजपा के पास हैं। 2019 के चुनाव में मुरादाबाद सपा और अमरोहा सीट बसपा ने जीती थी। इन सीटों की हवा कन्नौज, हरदोई, शाहजहांपुर, बदायूं, मैनपुरी में भी असर डालती है। इनमें मैनपुरी छोड़कर बाकी सीट पिछले चुनाव में भाजपा जीती थी। साक्षी महाराज के उन्नाव से उतरने के बाद यहां की आसपास की सीट पर भी उनका प्रभाव असर करता रहा है। रुनी चुरसई के अरविंद राजपूत कहते हैं कि लोधी बिरादरी ने हमेशा कल्याण सिंह पर भरोसा किया। इन्होंने ही उन्हें बड़ा नेता बनाया था।

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कल्याण की त्रिमूर्ति
राजवीर सिंह
कल्याण सिंह के बेटे हैं। एटा सीट से 2014 और 2019 के चुनाव में भाजपा से जीत दर्ज की है। इस सीट से 2009 में कल्याण सिंह जीते थे। 2010 में कल्याण सिंह ने जनक्रांति पार्टी बनाई थी। तब राजवीर सिंह को अध्यक्ष बनाया था। इस चुनाव में भी वह भाजपा से एटा से उम्मीदवार हैं।

साक्षी महाराज
कल्याण सिंह के करीबी रहे। वर्ष 1991 के चुनाव में मथुरा सीट से भाजपा से जीत हासिल की थी। भाजपा से ही वह 1996 और 1998 में फर्रुखाबाद संसदीय सीट से जीते। 2014 और 2019 के चुनाव में भाजपा ने उन्नाव सीट से भरोसा जताया। इस बार भी जीते। कल्याण सिंह के वापस भाजपा में जाने के बाद राष्ट्रीय क्रांति पार्टी की कमान संभाली थी। इस बार भी वह भाजपा से उन्नाव सीट से मैदान में हैं।

मुकेश राजपूत
कल्याण सिंह के सियासी शिष्य माने जाते हैं। कल्याण सिंह ने 1999 में भाजपा से निलंबन के बाद राष्ट्रीय क्रांति पार्टी बनाई थी। मुकेश राजपूत तब पार्टी के साथ हो लिए। कल्याण सिंह ने तब उन्हें बड़ी जिम्मेदारियां दी थीं। वह वर्ष 2000 से 2005 और 2006 से 2012 तक दो बार जिला पंचायत अध्यक्ष पर पर काबिज रहे। 2014 में फर्रुखाबाद सीट से कल्याण सिंह ने टिकट दिलाया था। वह यह और 2019 का चुनाव भाजपा के टिकट से जीते। इस बार भी यहीं से उम्मीदवार हैं।
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