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UP: एक सीट... एक पार्टी, चुनाव मैदान में उतरे दो उम्मीदवार; सबसे अधिक चार बार इस सीट से बने निर्दलीय सांसद
Fri, 15 Mar 2024 01:02 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 15 Mar 2024 01:02 PM IST
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कांग्रेस
- फोटो : social media
बात 1999 के लोकसभा चुनाव की है। कांग्रेस ने शहर की सीट पर मदन मोहन को पार्टी सिंबल देकर नामांकन के लिए रवाना कर दिया। नेताजी ने भी अपने ज्योतिष से बात की और तय तिथि व मुहूर्त पर प्रस्तावक और गिने चुने करीबी समर्थकों के साथ नामांकन दाखिल करने पहुंच गए।
नामांकन का पर्चा दाखिल करने के बाद उनके समर्थक शक्ति प्रदर्शन कर चुनावी जंग में उतरने का एलान करने की तैयारियों में जुटे ही थे कि अगले दिन तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष सलमान खुर्शीद के निर्देश पर तत्कालीन मेयर श्रीप्रकाश जायसवाल ने भी पार्टी सिंबल पर गाजे बाजे व पूरे लाव-लश्कर के साथ नामांकन दाखिल कर दिया।
मदन मोहन ने काफी प्रयास किया लेकिन उनकी दाल नहीं गली और अंत में जायसवाल चुनाव लड़े और करीब 33 हजार वोट से जीत भी गए। -जैसा कि पूर्व पार्षद अनिल बाजपेई भुल्लर ने बताया।
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सबसे ज्यादा चार बार नगर सीट से बने निर्दलीय सांसद
वहीं, एसएम बनर्जी पहले ऐसे नेता रहे, जिन्होंने यहां पर नौकरी करते हुए ऐसा जनाधार बनाया कि लगातार चार बार सांसद बने। मूलरूप से कोलकाता के रहने वाले बनर्जी यहां पर मजदूरों के नेता के रूप में सबसे बड़ा चेहरा था। 1957 से लेकर 1971 तक वे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में बाजी मारते रहे। महानगर की औद्योगिक इकाइयों में काम करने वाले हर शख्स की जुबान पर बस एक ही नाम रहा है। इसके अलावा जगतवीर सिंह द्रोण भाजपा से तीन बार, श्रीप्रकाश जायसवाल कांग्रेस से तीन बार, व्यापारियों के सबसे बड़े नेता के रूप में जाने गए श्याम बिहारी मिश्रा चार बाद सांसद बने। हालांकि वे कानपुर देहात से सांसद बनते रहे।
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नामांकन का पर्चा दाखिल करने के बाद उनके समर्थक शक्ति प्रदर्शन कर चुनावी जंग में उतरने का एलान करने की तैयारियों में जुटे ही थे कि अगले दिन तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष सलमान खुर्शीद के निर्देश पर तत्कालीन मेयर श्रीप्रकाश जायसवाल ने भी पार्टी सिंबल पर गाजे बाजे व पूरे लाव-लश्कर के साथ नामांकन दाखिल कर दिया।
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मदन मोहन ने काफी प्रयास किया लेकिन उनकी दाल नहीं गली और अंत में जायसवाल चुनाव लड़े और करीब 33 हजार वोट से जीत भी गए। -जैसा कि पूर्व पार्षद अनिल बाजपेई भुल्लर ने बताया।
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सबसे ज्यादा चार बार नगर सीट से बने निर्दलीय सांसद
वहीं, एसएम बनर्जी पहले ऐसे नेता रहे, जिन्होंने यहां पर नौकरी करते हुए ऐसा जनाधार बनाया कि लगातार चार बार सांसद बने। मूलरूप से कोलकाता के रहने वाले बनर्जी यहां पर मजदूरों के नेता के रूप में सबसे बड़ा चेहरा था। 1957 से लेकर 1971 तक वे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में बाजी मारते रहे। महानगर की औद्योगिक इकाइयों में काम करने वाले हर शख्स की जुबान पर बस एक ही नाम रहा है। इसके अलावा जगतवीर सिंह द्रोण भाजपा से तीन बार, श्रीप्रकाश जायसवाल कांग्रेस से तीन बार, व्यापारियों के सबसे बड़े नेता के रूप में जाने गए श्याम बिहारी मिश्रा चार बाद सांसद बने। हालांकि वे कानपुर देहात से सांसद बनते रहे।