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लॉकडाउन: महाराष्ट्र से 600 किमी. पैदल चलकर पहुंचे एमपी, यूपी की बसों से घर लौटे
Mon, 27 Apr 2020 08:49 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महोबा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महोबा
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Mon, 27 Apr 2020 08:49 PM IST
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बस में बैठे मजदूर
- फोटो : amar ujala
लॉकडाउन का दूसरा चरण तीन मई को खत्म होगा लेकिन इस दौरान खाने-पीने का जुगाड़ न होने पर श्रमिकों का महानगरों से घरों की तरफ पलायन जारी है। लॉकडाउन लागू होने के बाद से लगातार कोई श्रमिक पैदल तो कोई वाहनों से घरों की ओर जा रहे हैं।
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सोमवार को महाराष्ट्र प्रांत के ठाणे से मजदूरी करके 12 दिन तक 600 किमी. पैदल चलने के बाद मध्यप्रदेश में लगी यूपी सरकार की बसों से श्रमिकों को घरों के लिए रवाना किया गया। बुरी तरह से थके व भूखे श्रमिकों को मध्यप्रदेश प्रशासन ने भोजन कराया।
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सिद्धार्थ नगर से कमाने के लिए महाराष्ट्र के ठाणे गए श्रमिकों को लॉकडाउन के बाद कामकाज ठप हो जाने से दो जून की रोटी के लाले पड़ने लगे। श्रमिक शफीउल्ला, खरकू, अजीत, मुन्ना, नीरज, वृंदावन, सुशील ने बताया कि वह ठाणे में मजदूरी करते थे।
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25 मार्च से लॉकडाउन के कामकाज ठप हो गया था लेकिन लॉकडाउन खुलने की उम्मीद में कुछ दिन ठहर गए और घर पर रखे खाने-पीने के सामान से काम चलाया। दूसरे चरण के लॉकडाउन की घोषणा के बाद उनका सारा सामान खत्म हो गया।
श्रमिकों ने बताया कि वह अपने करीब 50 साथियों के साथ पैदल आए हैं। रास्ते में खाने को जो कुछ मिला वो खा लिया और न मिलने पर भूखे ही पैदल चलते रहे। 12 दिनों की असहनीय यात्रा करने बाद किसी तरह मध्यप्रदेश पहुंचे।
यहां पर यूपी सरकार ने बसों की व्यवस्था कर रखी थी। बसों से सिद्धार्थ नगर जाते समय श्रमिकों की बस रोडवेज स्टैंड महोबा के पास रुकी। जहां पर प्रशासन ने लंच पैकेट दिए। श्रमिकों ने बताया कि उनके आगे-पीछे तीन गाड़ियां चल रही थीं जिनमें 100 लोग सिद्धार्थ नगर जा रहे थे।
श्रमिकों ने बताया कि वह अपने करीब 50 साथियों के साथ पैदल आए हैं। रास्ते में खाने को जो कुछ मिला वो खा लिया और न मिलने पर भूखे ही पैदल चलते रहे। 12 दिनों की असहनीय यात्रा करने बाद किसी तरह मध्यप्रदेश पहुंचे।
यहां पर यूपी सरकार ने बसों की व्यवस्था कर रखी थी। बसों से सिद्धार्थ नगर जाते समय श्रमिकों की बस रोडवेज स्टैंड महोबा के पास रुकी। जहां पर प्रशासन ने लंच पैकेट दिए। श्रमिकों ने बताया कि उनके आगे-पीछे तीन गाड़ियां चल रही थीं जिनमें 100 लोग सिद्धार्थ नगर जा रहे थे।