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सांस की तकलीफ फिर भी पैदल किया 140 किमी का सफर, बोलीं शरीर और पैर जवाब दे चुके पर घर पहुंचना मजबूरी
Mon, 06 Apr 2020 09:23 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Mon, 06 Apr 2020 09:23 PM IST
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घाटमपुर के नगीना गांव की जय देवी ने दवा के लिए पैदल तय की कानपुर की दूरी
- फोटो : amar ujala
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कोरोना वायरस से बचाव के लिए लॉकडाउन के इस दौर में तमाम तरह की दुश्वारियां झेल रहे लोगों को डॉक्टरों की उपलब्धता और दवाइयाें के लिए भी जूझना पड़ रहा है। इस समय तमाम निजी डॉक्टरों ने अपनी प्रैक्टिस बंद कर रखी है।
सरकारी अस्पतालों में भी कोरोना से संबंधित मरीजों को ही प्राथमिकता मिल रही। ऐसे में अन्य बीमारियों से परेशान लोगों को समुचित इलाज नहीं मिल पा रहा है। जिले के गांव, कस्बों की हालत तो और भी खराब है। सोमवार को मूसानगर, घाटमपुर के नगीना गांव की जय देवी (50) को ऐसी ही दुश्वारी से दो-चार हो पड़ा।
नौबस्ता चौराहे पर थकी हारी बैठीं जय देवी आठ घंटा पैदल चलकर डॉक्टर की तलाश में कानपुर पहुंची थीं। कई घंटे भटकने के बाद उन्हें मोतीझील इलाके में दवा तो मिल गई, लेकिन इतनी उम्र में 70 किलोमीटर दूर गांव पहुंचने के लिए दोबारा पैदल चलने की सोचकर कांप उठीं।
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उन्होंने बताया कि उन्हें सांस लेने में दिक्कत होती है। फेफड़ों में संक्रमण है। आसपास के क्षेत्र में कोई अच्छा डॉक्टर न मिलने की वजह से ही वे कानपुर आईं। घर में पति और बेटे नहीं हैं। दो बेटियां हैं जिन्हें घर पर ही छोड़कर आई हैं। रात होने से पहले उन्हें अपने गांव पहुंचना है। शरीर थक चुका है और पैर जवाब दे चुके हैं। लेकिन चलना तो पड़ेगा।
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सरकारी अस्पतालों में भी कोरोना से संबंधित मरीजों को ही प्राथमिकता मिल रही। ऐसे में अन्य बीमारियों से परेशान लोगों को समुचित इलाज नहीं मिल पा रहा है। जिले के गांव, कस्बों की हालत तो और भी खराब है। सोमवार को मूसानगर, घाटमपुर के नगीना गांव की जय देवी (50) को ऐसी ही दुश्वारी से दो-चार हो पड़ा।
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नौबस्ता चौराहे पर थकी हारी बैठीं जय देवी आठ घंटा पैदल चलकर डॉक्टर की तलाश में कानपुर पहुंची थीं। कई घंटे भटकने के बाद उन्हें मोतीझील इलाके में दवा तो मिल गई, लेकिन इतनी उम्र में 70 किलोमीटर दूर गांव पहुंचने के लिए दोबारा पैदल चलने की सोचकर कांप उठीं।
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उन्होंने बताया कि उन्हें सांस लेने में दिक्कत होती है। फेफड़ों में संक्रमण है। आसपास के क्षेत्र में कोई अच्छा डॉक्टर न मिलने की वजह से ही वे कानपुर आईं। घर में पति और बेटे नहीं हैं। दो बेटियां हैं जिन्हें घर पर ही छोड़कर आई हैं। रात होने से पहले उन्हें अपने गांव पहुंचना है। शरीर थक चुका है और पैर जवाब दे चुके हैं। लेकिन चलना तो पड़ेगा।