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कानपुर: लॉकडाउन के बीच राहत भरी खबर, एक सप्ताह में दो लाख श्रमिक काम पर लौटेेंगे

Thu, 07 May 2020 04:57 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Thu, 07 May 2020 04:57 PM IST
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Lockdown in kanpur: Two lakh workers will return to work in a week
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : गूगल
कानपुर में औद्योगिक इकाइयों के संचालन की अनुमति मिलने से हफ्ते भर में करीब दो लाख श्रमिक और कर्मचारी काम पर लौट आएंगे। फिलहाल 50 हजार से अधिक कर्मचारी व श्रमिक विभिन्न औद्योगिक इकाइयों में काम कर रहे हैं। 17 मई को जब लॉकडाउन खत्म होगा तो करीब ढाई लाख लोग औद्योगिक क्षेत्रों में काम कर रहे होंगे। करीब डेढ़ महीने से जारी लॉकडाउन के बीच यह राहत भरी खबर है।
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प्रदेश सरकार ने चमड़ा छोड़कर सभी तरह की औद्योगिक इकाइयों को चलने की सशर्त मंजूरी दी है। हफ्ते भर में सभी औद्योगिक इकाइयां चालू हो जाएंगी। इन इकाइयों के चलने से फिलहाल शहर में ही खाली बैठे कामगारों के सामने से रोजगार का संकट खत्म होगा। हालांकि सभी औद्योगिक इकाइयां 50 फीसदी से ज्यादा कामगारों से काम नहीं ले सकेंगी।
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शुरुआत में 25 से 35 फीसदी कर्मचारियों से ही काम चलाना पड़ेगा। औद्योगिक संगठनों के आंकड़ों के मुताबिक शहरी क्षेत्र में आती छोटी बड़ी सभी औद्योगिक इकाइयों की संख्या 20 हजार से अधिक है। प्रत्येक इकाई में 10 से लेकर एक हजार कर्मचारी तक काम करते हैं। जिले के करीब आठ लाख लोग इनमें रोजगार पाते हैं।
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इनमें से करीब दो लाख लोग टेनरियों और चमड़ा कारोबार के जरिये रोजगार पाते हैं। करीब दो लाख श्रमिक बाहरी राज्यों के होते हैं। फैक्ट्रियां संचालित होने से सबसे अधिक लाभ शहर के लोगों को ही मिलेगा। बावजूद इसके जब तक 100 प्रतिशत श्रमिकों के साथ उत्पादन चालू नहीं होता, तब तक पांच से छह लाख लोगों के हाथ से काम छिना रहेगा। 

सोशल डिस्टेंसिंग होगी बड़ी चुनौती
चालू हुई औद्योगिक इकाइयों में सोशल डिस्टेंसिंग के साथ काम करना बड़ी चुनौती होगी। बीते डेढ़ महीने में देखा गया है कि राहत के नाम पर लोगों ने किस तरह से मनमानी की और सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाईं। चाहे वे मोहल्ले की दुकानें हों, सब्जी मंडी हों या फिर बैंक। यहां पर पहुंचे लोगों ने और प्रतिष्ठानों ने सोशल डिस्टेंसिंग का बिल्कुल भी पालन नहीं कराया। अब चालू हुईं फैक्ट्रियों में सोशल डिस्टेंसिंग या सरकार के नियमों का पालन नहीं हो पाया तो कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए किए गए अब तक के उपायों पर पानी फिर सकता है।

मानकों का पालन बनेगा उत्पादन में बाधा
हालांकि शहर में 2500 से औद्योगिक इकाइयां चालू हो चुकी हैं, लेकिन सौ फीसदी उत्पादन के पक्ष में अभी उद्यमी भी नहीं हैं। लघु उद्योग भारती के सरंक्षक लाडली प्रसाद का कहना है कि अधिक संख्या में श्रमिकों से काम कराने पर मानकों का पालन संभव नहीं होगा। ऐसे में 25 से 50 फीसदी कर्मचारियों के साथ ही काम कराया जाना उचित है। चूंकि सभी तरह की औद्योगिक इकाइयों के चलने की मंजूरी मिली है। इसलिए औद्योगिक क्षेत्र में भीड़ बढ़ेगी। यदि किसी प्रतिष्ठान में कोई संक्रमित हुआ तो पूरा क्षेत्र हॉटस्पॉट घोषित हो जाएगा। इस वजह से बहुत एहतियात की जरूरत है।

फैक्ट फाइल
20 हजार से अधिक छोटी बड़ी इकाइयां हैं जिले में
05 लाख से अधिक लोग बेरोजगार रहेंगे जब तक पूरी क्षमता से नहीं शुरू होंगे उद्योग
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