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lockdown in kanpur: लॉकडाउन में बंद हुआ इलाज, मनोरोगी छात्र की हालत बिगड़ी, फांसी लगाकर दी जान
Tue, 21 Apr 2020 08:50 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Tue, 21 Apr 2020 08:50 PM IST
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फांसी
- फोटो : social media
कानपुर के कल्याणपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत रावतपुर गांव में 12वीं क्लास के छात्र यश गुप्ता (17) ने खुदकुशी कर ली। पिता ने बताया कि मनोरोग से पीड़ित बेटे का लॉकडाउन में इलाज बंद हो गया। उसकी फिर से तबीयत बिगड़ने लगी। डॉक्टर को दिखाने के लिए कई बार पुलिस और प्रशासन के हेल्प लाइन पर मदद मांगी।
इसके बावजूद मदद को कोई नहीं पहुंचा। मंगलवार सुबह बेटे का शव फंदे से लटका देखकर पुलिस को सूचना दी। रावतपुर गांव निवासी मेडिकल स्टोर संचालक हरिओम गुप्ता का मझला बेटा यश जुगल देवी स्कूल से पढ़ाई कर रहा था। कुछ सालों से यश मानसिक बीमारी से जूझ रहा था।
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इसके बावजूद मदद को कोई नहीं पहुंचा। मंगलवार सुबह बेटे का शव फंदे से लटका देखकर पुलिस को सूचना दी। रावतपुर गांव निवासी मेडिकल स्टोर संचालक हरिओम गुप्ता का मझला बेटा यश जुगल देवी स्कूल से पढ़ाई कर रहा था। कुछ सालों से यश मानसिक बीमारी से जूझ रहा था।
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हरिओम ने बताया कि किदवईनगर के डॉ. मनीष निगम बेटे का इलाज कर रहे थे। काफी हद तक वह ठीक हो चुका था। लॉकडाउन की वजह से इलाज बंद हो गया। वह बार-बार घर से बाहर जाने की जिद करने लगा।
बेटे की हालत देखकर वह रात में उसे साथ लेकर बाहर वाले कमरे में सोते थे। सोमवार रात यश अचानक उठकर अंदर के कमरे में गया और पंखे के सहारे चादर के फंदे से लटक गया। बड़े बेटे फार्मासिस्ट हिमांशु की भी मानसिक हालत ठीक नहीं है। भाई की मौत के बाद से वह काफी परेशान है।
कूलर ठीक होता तो बच सकती थी जान
हरिओम ने बताया कि लॉकडाउन की वजह से वह खराब कूलर को ठीक नहीं करा पाए। बाहर के कमरे में खिड़की से हवा आने की वजह से वह परिवार के साथ वहीं सोते हैं। सोमवार रात उमस हुई तो कोई छत पर कोई घर के बाहर चला गया। इस वजह से यश पर किसी की निगाह नहीं पड़ी।
बेटे की हालत देखकर वह रात में उसे साथ लेकर बाहर वाले कमरे में सोते थे। सोमवार रात यश अचानक उठकर अंदर के कमरे में गया और पंखे के सहारे चादर के फंदे से लटक गया। बड़े बेटे फार्मासिस्ट हिमांशु की भी मानसिक हालत ठीक नहीं है। भाई की मौत के बाद से वह काफी परेशान है।
कूलर ठीक होता तो बच सकती थी जान
हरिओम ने बताया कि लॉकडाउन की वजह से वह खराब कूलर को ठीक नहीं करा पाए। बाहर के कमरे में खिड़की से हवा आने की वजह से वह परिवार के साथ वहीं सोते हैं। सोमवार रात उमस हुई तो कोई छत पर कोई घर के बाहर चला गया। इस वजह से यश पर किसी की निगाह नहीं पड़ी।