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लॉकडाउन में रोजगार छिना तो आई गांव की याद, घर पहुंचने की चाहत में पांव में पड़ गए छाले
Mon, 04 May 2020 12:19 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कन्नौज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कन्नौज
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Mon, 04 May 2020 12:19 AM IST
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यूपी लॉकडाउन
- फोटो : अमर उजाला
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कन्नौज के तालग्राम में कोरोना का भय और लॉकडाउन ने बाहर मजदूरी करके गुजर-बसर करने वालों के लिए आफत ला दी। सबको अब घर पहुंचने की जल्दी है। पांव में छाले पड़ते जा रहे हैं, लेकिन पैदल चलने का हौसला नहीं टूट रहा। जहां किसी ने कुछ दे दिया तो खा लिया। बस घर पहुंचने की चाहत में पैदल चलते चले जा रहे हैं।
लॉकडाउन उन लोगों के लिए परेशानी बन गया है जो परिवार के साथ घर से दूर रहकर दो वक्त की रोटी कमा रहे हैं। रविवार को 10 घंटे पैदल चलकर 11 लोग कन्नौज पहुंचे। कई के पैर में सूजन थी और कई के पैर में पैदल चलकर छाले पड़ गए थे, लेकिन उनका यही कहना था कि बस घर पहुंच जाएं। उन्नाव के अजगेन निवासी लखन ने बताया वह फर्रुखाबाद में एक प्राइवेट कंपनी में काम करता है।
पत्नी गायत्री के साथ वह वहीं पर रहता है। पहले 21 दिन फिर 19 दिन का लॉकडाउन होने के बाद वह तीन मई को लॉकडाउन खुलने का इंतजार था लेकिन 17 मई तक फिर से लॉकडाउन बढ़ जाने से उसका सब्र टूट गया। वह पत्नी को लेकर पैदल ही निकल पड़ा। बताया इतने दिन में जो कुछ कमाया था सारे रुपये खर्च हो गए। यहीं के अर्जुन, सत्यम, अजय आदि लोग भी निजी कंपनी में काम करते थे।
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लॉकडाउन उन लोगों के लिए परेशानी बन गया है जो परिवार के साथ घर से दूर रहकर दो वक्त की रोटी कमा रहे हैं। रविवार को 10 घंटे पैदल चलकर 11 लोग कन्नौज पहुंचे। कई के पैर में सूजन थी और कई के पैर में पैदल चलकर छाले पड़ गए थे, लेकिन उनका यही कहना था कि बस घर पहुंच जाएं। उन्नाव के अजगेन निवासी लखन ने बताया वह फर्रुखाबाद में एक प्राइवेट कंपनी में काम करता है।
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पत्नी गायत्री के साथ वह वहीं पर रहता है। पहले 21 दिन फिर 19 दिन का लॉकडाउन होने के बाद वह तीन मई को लॉकडाउन खुलने का इंतजार था लेकिन 17 मई तक फिर से लॉकडाउन बढ़ जाने से उसका सब्र टूट गया। वह पत्नी को लेकर पैदल ही निकल पड़ा। बताया इतने दिन में जो कुछ कमाया था सारे रुपये खर्च हो गए। यहीं के अर्जुन, सत्यम, अजय आदि लोग भी निजी कंपनी में काम करते थे।
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लॉकडाउन में कंपनी बंद हो गई तो खाने के साथ रहने की दिक्कत होने लगी। उन्नाव क्षेत्र के 11 लोग रात 12 बजे के बाद अपना सामान लेकर पैदल ही घर से निकल पड़े। यह सुबह 10 बजे कन्नौज पहुंचे थे। तालग्राम प्रतिनिधि के अनुसार थाना तालग्राम के मधई नगला गांव में 50 मजदूरों का जत्था पैदल पहुंचा। ग्रामीणों से भोजन मांगा।
भाजपा जिला कार्यकारिणी के सदस्य राजेश भदौरिया भोजन की व्यवस्था कराई। इन मजदूरों ने स्वयं को गाजीपुर, सुल्तानपुर, सीतापुर, बस्ती, गोंडा, मुजफ्फरपुर, बलिया का रहने वाला बताया। भाजपा नेता ने राजस्व अधिकारियों व पुलिस को अवगत कराया। इसके बाद भी कोई मदद को नहीं आया। गोरखपुर रुस्तम ढाला निवासी लव कुश चौधरी, चंद्रभान, अजय कुमार, अरविंद, सुधीर, गाजीपुर के फैजान अंसारी, रियाजुदीन, मऊ के आशीष, शिवा ने बताया मथुरा में एग्रीकल्चर कंपनी में काम करते हैं।
लॉकडाउन में कंपनी बंद हो जाने से अर्थिक तंगी आ गई। बताया अभी लॉकडाउन खत्म होने की उम्मीद नहीं है इसलिए पैदल ही निकल पड़े, जहां बस्ती मिल जाती है, वहां मांगकर खाना खा लेते हैं। बताया घर घर जाने को मदद न मिलने पर पुलिस की निगाह बचाकर घर जाने को मजबूर हैं।
उन्नाव जा रहे अमन ने बताया कि वह सिर्फ कुछ कपड़े रखकर ही फर्रुखाबाद से से चले थे। रास्ते में समाजसेवियों और पुलिस के जवानों ने उन्हें खाने के पैकेट दिए। कुछ देर बैठकर आराम करने की जगह भी दी। इससे उन्हें खाने पीने की परेशानी तो नहीं हुई लेकिन चलते चलते पैरों में छाले पड़ गए। इससे चलने में दिक्कत हो रही है। अब घर पहुंचने के बाद ही आराम करेंगे।
भाजपा जिला कार्यकारिणी के सदस्य राजेश भदौरिया भोजन की व्यवस्था कराई। इन मजदूरों ने स्वयं को गाजीपुर, सुल्तानपुर, सीतापुर, बस्ती, गोंडा, मुजफ्फरपुर, बलिया का रहने वाला बताया। भाजपा नेता ने राजस्व अधिकारियों व पुलिस को अवगत कराया। इसके बाद भी कोई मदद को नहीं आया। गोरखपुर रुस्तम ढाला निवासी लव कुश चौधरी, चंद्रभान, अजय कुमार, अरविंद, सुधीर, गाजीपुर के फैजान अंसारी, रियाजुदीन, मऊ के आशीष, शिवा ने बताया मथुरा में एग्रीकल्चर कंपनी में काम करते हैं।
लॉकडाउन में कंपनी बंद हो जाने से अर्थिक तंगी आ गई। बताया अभी लॉकडाउन खत्म होने की उम्मीद नहीं है इसलिए पैदल ही निकल पड़े, जहां बस्ती मिल जाती है, वहां मांगकर खाना खा लेते हैं। बताया घर घर जाने को मदद न मिलने पर पुलिस की निगाह बचाकर घर जाने को मजबूर हैं।
उन्नाव जा रहे अमन ने बताया कि वह सिर्फ कुछ कपड़े रखकर ही फर्रुखाबाद से से चले थे। रास्ते में समाजसेवियों और पुलिस के जवानों ने उन्हें खाने के पैकेट दिए। कुछ देर बैठकर आराम करने की जगह भी दी। इससे उन्हें खाने पीने की परेशानी तो नहीं हुई लेकिन चलते चलते पैरों में छाले पड़ गए। इससे चलने में दिक्कत हो रही है। अब घर पहुंचने के बाद ही आराम करेंगे।