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लॉकडाउन: मजदूरी बंद हुई तो 1500 में बेची साइकिल, बात नहीं बनी तो उधार लिए रूपये, गांव पहुंच चहक उठा
Sun, 31 May 2020 07:37 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरदोई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरदोई
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sun, 31 May 2020 07:37 PM IST
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जिला अस्पताल में बेटी की थर्मल स्क्रीनिंग कराता सर्वेश व उसका परिवार
- फोटो : amar ujala
लॉकडाउन के दौरान गैर प्रदेशों और जनपदों में फंसे श्रमिकों की सुरक्षित घर वापसी के दावों के बीच रविवार को कुछ अलग तस्वीर देखने को मिली। दिल्ली के मंगोलपुरी इलाके में मजदूरी करने वाले व्यक्ति घर पहुंचने के लिए अपनी साइकिल बेच दी। घर पहुंचने के लिए पर उतने रूपये काफी नहीं थे तो कुछ उधार रुपये लेकर परिवार सहित रविवार सुबह हरदोई पहुंचा।
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लॉकडाउन की दुश्वारियों को दरकिनार करते हुए वह सीधे जिला अस्पताल गया और अपनी व परिवार की थर्मल स्क्रीनिंग कराने के बाद घर चला गया। देहात कोतवाली क्षेत्र के ग्राम मम्मरपुरवा निवासी सर्वेश कुमार दिल्ली के मंगोलपुरी इलाके में मजदूरी करते थे। अपनी पत्नी शांती देवी पुत्री मनीषा और पुत्र वंश के साथ दिल्ली में ही रहते थे।
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सर्वेश के मुताबिक लॉकडाउन में मजदूरी बिलकुल बंद हो गई तो जैसे-तैसे परिवार चलाते रहे। कुछ लोगों से रुपये उधार लेकर भी काम चलाया, लेकिन लॉकडाउन बढ़ता ही गया। बीते शुक्रवार को उन्होंने दिल्ली में अपनी साइकिल 1500 रुपये में बेच दी और फिर एक परिचित से कुछ रुपये उधार लिए।
शुक्रवार को ही किसी तरह गाजियाबाद परिवार सहित पहुंचा और वहां से एक ट्रक पर सवार हो गया। ट्रक ने उसे शाहजहांपुर में रविवार सुबह उतार दिया तो फिर पुलिस कर्मियों के सहयोग से एक डाले पर परिवार सहित बैठकर हरदोई पहुंचा।
हरदोई पहुंचकर वह सीधे जिला चिकित्सालय गया और अपनी व परिवार की थर्मल स्क्रीनिंग कराई। थर्मल स्क्रीनिंग में परिवार स्वस्थ मिलने पर वह लोग अपने गांव मम्मरपुरवा चले गए। सर्वेश के मुताबिक दिल्ली से हरदोई तक आने में उसके 2600 रुपये खर्च हो गए।
शुक्रवार को ही किसी तरह गाजियाबाद परिवार सहित पहुंचा और वहां से एक ट्रक पर सवार हो गया। ट्रक ने उसे शाहजहांपुर में रविवार सुबह उतार दिया तो फिर पुलिस कर्मियों के सहयोग से एक डाले पर परिवार सहित बैठकर हरदोई पहुंचा।
हरदोई पहुंचकर वह सीधे जिला चिकित्सालय गया और अपनी व परिवार की थर्मल स्क्रीनिंग कराई। थर्मल स्क्रीनिंग में परिवार स्वस्थ मिलने पर वह लोग अपने गांव मम्मरपुरवा चले गए। सर्वेश के मुताबिक दिल्ली से हरदोई तक आने में उसके 2600 रुपये खर्च हो गए।