{"_id":"5ec18bdb8ebc3e90ae67be04","slug":"lock-down-akbarpur-news-knp560673070","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब गांव में ही रहेंगे, लगाएगें फेरी, करेंगे खेती-किसानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब गांव में ही रहेंगे, लगाएगें फेरी, करेंगे खेती-किसानी
विज्ञापन
बारा टोल प्लाजा पर बैठे प्रवासी मजदूर।
- फोटो : AKBARPUR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कानपुर देहात। लॉकडॉउन के चलते प्रवासी मजदूरों का रोजगार छिन गया है। घर लौट रहे प्रवासी मजदूर भूखे-प्यासे कई दिनों तक पैदल चले। रास्ते में कई जगह पुलिस ने उन्हें लठियाया। गृह जनपद लौट रहे मजदूरों का कहना है कि अब रोजगार के लिए सैकड़ों किलोमीटर दूर जाने के बजाय गांव में ही रहकर रोजगार तलाशेंगे।
सिद्धार्थ नगर के बस्ती निवासी रामकिशोर, गणेश, महातम वर्मा, विजय, कुलदीप, कल्लू, रन्नू, श्याम सुंदर, रामकेश आदि ने बताया कि वह लोग इंदौर में कैटरिंग का काम करते थे। इंदौर के राजेंद्र नगर से साइकिल से घर लौट रहे इन श्रमिकों ने बताया कि लॉकडॉउन में काम छिनने से बचत के रुपये भी खर्च हो गए। जब कोई रास्ता नहीं नजर आया, तो साइकिल से ही घर के लिए निकल पड़े। कई जगह पुलिस के रोकने पर अंदर के रास्तों से निकलना पड़ा। अब जल्द से जल्द घर पहुंचना चाहते हैं। लॉकडॉउन खुला, तो भी गांव में रहकर काम करेंगे। बाहर नहीं जाएंगे।
गोरखपुर के हाटा निवासी त्रिवेनी पासवान, सत्यदेव पासवान व सतेंद्र चौहान ने बताया कि महाराष्ट्र के अहमदनगर में कैटरिंग का काम करते थे। कोरोना आपदा में काम बंद हो गया। कई दिन भटके, पैदल भी चले अब घर पहुंचना ही मंजिल है। हालात सुधर गए, तो भी महाराष्ट्र नहीं जाएंगे। गांव में ही रहकर फेरी लगाएंगे या फिर खेतीबाड़ी करेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
सिद्धार्थ नगर के बस्ती निवासी रामकिशोर, गणेश, महातम वर्मा, विजय, कुलदीप, कल्लू, रन्नू, श्याम सुंदर, रामकेश आदि ने बताया कि वह लोग इंदौर में कैटरिंग का काम करते थे। इंदौर के राजेंद्र नगर से साइकिल से घर लौट रहे इन श्रमिकों ने बताया कि लॉकडॉउन में काम छिनने से बचत के रुपये भी खर्च हो गए। जब कोई रास्ता नहीं नजर आया, तो साइकिल से ही घर के लिए निकल पड़े। कई जगह पुलिस के रोकने पर अंदर के रास्तों से निकलना पड़ा। अब जल्द से जल्द घर पहुंचना चाहते हैं। लॉकडॉउन खुला, तो भी गांव में रहकर काम करेंगे। बाहर नहीं जाएंगे।
विज्ञापन
गोरखपुर के हाटा निवासी त्रिवेनी पासवान, सत्यदेव पासवान व सतेंद्र चौहान ने बताया कि महाराष्ट्र के अहमदनगर में कैटरिंग का काम करते थे। कोरोना आपदा में काम बंद हो गया। कई दिन भटके, पैदल भी चले अब घर पहुंचना ही मंजिल है। हालात सुधर गए, तो भी महाराष्ट्र नहीं जाएंगे। गांव में ही रहकर फेरी लगाएंगे या फिर खेतीबाड़ी करेंगे।
विज्ञापन