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लोन में धोखाधड़ी: कंपनी निदेशकों ने की करोड़ों के लोन की हेराफेरी, सीबीआई ने दर्ज की रिपोर्ट

Fri, 14 Jan 2022 04:15 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Fri, 14 Jan 2022 04:15 PM IST
सार

 हाइड्रिक फार्म्स इनपुट के निदेशकों के 10 करोड़ के लोन खाते एनपीए होने का मामला में 
 सीबीआई ने लखनऊ में दर्ज की है रिपोर्ट। फर्म खुशहाली केंद्र के जरिये कृषि उत्पादों का कारोबार करती है। जांच में पता चला कि जिस दिन लोन के 10 करोड़ रुपये बैंक से ट्रांसफर हुए, उसी दिन पूरी रकम फोरटेक बायो साइंस नाम की एक कंपनी में ट्रांसफर कर दिए गए

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Loan fraud: Company directors misappropriated loans worth crores, CBI filed report
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

स्माॅल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (सिडबी) की ओर से लखनऊ और दिल्ली में रहने वाले हाइड्रिक फार्म्स इनपुट के निदेशकों के खिलाफ सीबीआई ने लखनऊ में रिपोर्ट दर्ज कराई है। बैंक की आंतरिक जांच में पता चला है कि निदेशकों ने लोन के रुपयों में गोलमाल किया है। बैंक से जिस दिन लोन की रकम खातों में पहुंची, उसी दिन दूसरी बैंक के खाते में ट्रांसफर कर दी गई। लोन की रकम का कहीं जिक्र नहीं किया गया। इसे बीज और फर्टिलाइजर की खरीद में खर्च करना दिखा दिया गया।
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सिडबी के डीजीएम श्यामानंद यादव ने पांच जनवरी को सीबीआई में हाइड्रिक फार्म्स इनपुट लिमिटेड के निदेशक पंकज रस्तोगी, परेश रस्तोगी, दीपक रस्तोगी और अज्ञात अफसरों के खिलाफ प्रार्थना पत्र दिया था। इसमें बताया कि कंपनी ने लोन का आवेदन किया था। अप्रैल 2015 में लोन स्वीकृत हो गया। इसके बाद इन्होंने नियमित किस्तों का भुगतान नहीं किया। 2017 में इनके खाते एनपीए हो गए। लोन वसूली की कार्रवाई की गई और आंतरिक जांच भी शुरू हुई।
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जांच में पता चला कि जिस दिन लोन के 10 करोड़ रुपये बैंक से ट्रांसफर हुए, उसी दिन पूरी रकम फोरटेक बायो साइंस नाम की एक कंपनी में ट्रांसफर कर दिए गए। निदेशकों ने चार्टर्ड एकाउंटेंट फर्म मित्तल पवन एंड एसोसिएट्स द्वारा पूरे फंड के इस्तेमाल का सर्टिफिकेट दे दिया।
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इसमें बताया गया कि 4.88 करोड़ बीज सप्लायर, 1.26 करोड़ फर्टिलाइजर सप्लायर, 4.47 करोड़ रुपये केमिकल्स सप्लायर को दिए गए। 30 लाख रुपये विविध खर्च में दिखाए गए।बताया गया कि आरोपियों के पते दिल्ली और लखनऊ के हैं। इनकी बंधक संपत्ति के पते भी लखनऊ के हैं। इनके बैंक लोन लखनऊ सिडबी से हुए हैं। मामले में आरोपी सीए दिल्ली या लखनऊ के हैं। 

माइक्रो फाइनेंस से जुड़ी कंपनी, फोरेंसिक ऑडिट में मिली गड़गड़ी

कानपुर। सिडबी ने तीन जनवरी को निर्माण भारती आर्थिक व सामाजिक विकास संगठन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। इसमें 24.20 करोड़ रुपये के फ्राड का आरोप है। सीबीआई ने पांच लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज की गई है। इसमें फर्म, फर्म के निदेशक प्रशांत राव, शानू मोसेस, रेजिना फिलिप और चार्टर्ड एकाउंटेंट श्याम लाल का नाम है। फर्जीवाड़े का खेल फर्जी दस्तावेजों और झूठी सूचनाओं के आधार पर खेला गया।

बताया गया कि कंपनी माइक्रो फाइनेंस का काम करती है। इसका मुख्यालय दिल्ली में है, जबकि एक कार्यालय लखनऊ में है। जून 2006 तक कानपुर, बनारस और मध्यप्रदेश में काम होता था। इनको 2008 में लोन स्वीकृत किया गया था। इनके खाते एक साल बाद ही एनपीए हो गए थे।


बैंक की ओर से की गई जांच में और फोरेंसिक ऑडिट में लोन की रकम का हेरफेर किया गया। अलग-अलग फर्मों को लोन देना दिखाया गया। फिर बताया गया कि संबंधित फर्म बंद हो गई और पैसा डूब गया।
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