Murder of Lawyer: 20 साल पहले गोलियां बरसाकर वकील को मारा, दो भाइयों बाले और अतीक को उम्रकैद की सजा
Kanpur News: एडीजीसी प्रद्युम्न अवस्थी ने बताया कि अभियोजन की ओर से मृतक के भाई इफ्तखार अहमद व चश्मदीद मो. नासिर समेत 10 गवाह कोर्ट में पेश किए गए। सबूतों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने दोनों को हत्या का दोषी मानकर सजा सुनाई।
विस्तार
कानपुर में कचहरी से लौट रहे अधिवक्ता की 20 साल पहले सरेआम ताबड़तोड़ गोलियां चलाकर हत्या करने वाले शातिर अपराधी भाइयों कुली बाजार निवासी इकबाल उर्फ बाले व अतीक को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। अपर जिला जज नवम शेष बहादुर निषाद ने 25-25 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है।
जुर्माने की आधी राशि पीड़ित के परिजनों को मिलेगी। मुकदमे के दो अन्य आरोपियों की मौत हो चुकी है। कुली बाजार निवासी मो. नासिर 24 मार्च 2004 को चचेरे भाई व अधिवक्ता खुर्शीद अहमद के साथ कचहरी का काम निपटाकर शाम को स्कूटर से वापस जा रहे थे।
डीएवी लॉ कॉलेज के पास घात लगाकर बैठे चार शातिर अपराधी भाइयों अतीक, रफीक, बिल्लू उर्फ तौफीक व इकबाल उर्फ बाले ने खुर्शीद पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर हत्या कर दी थी। नासिर ने चारों भाइयों के खिलाफ कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। कहा था कि खुर्शीद अभियुक्तों के खिलाफ मुकदमों में पैरवी करते थे।
रफीक व बिल्लू की मौत हो चुकी है
इसलिए चारों ने रंजिश में खुर्शीद की हत्या कर दी। एडीजीसी प्रद्युम्न अवस्थी ने बताया कि अभियोजन की ओर से मृतक के भाई इफ्तखार अहमद व चश्मदीद मो. नासिर समेत 10 गवाह कोर्ट में पेश किए गए। सबूतों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने दोनों को हत्या का दोषी मानकर सजा सुनाई। रफीक व बिल्लू की मौत हो चुकी है। सजा पर सुनवाई के दौरान कानपुर जेल में बंद इकबाल को कोर्ट में हाजिर किया गया, जबकि आगरा जेल में बंद अतीक की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये पेशी हुई।
2007 में तय हुए आरोप
एडीजीसी प्रद्युम्न अवस्थी ने बताया कि फरार रहने के कारण अतीक, रफीक, बिल्लू उर्फ तौफीक व इकबाल उर्फ बाले के खिलाफ 14 अगस्त 2004 को मफरूरी में चार्जशीट कोर्ट भेजी गई थी। वारंट जारी होने पर इकबाल कोर्ट में हाजिर हो गया था, जिसके बाद उसकी फाइल अन्य अभियुक्तों से अलग कर दी गई थी।
2017 से मुकदमे में गवाही शुरू हुई
इसके बाद अतीक भी हाजिर हुआ। रफीक व बिल्लू की मौत हो गई थी। अतीक के खिलाफ 10 मई 2007 को व इकबाल के खिलाफ 2 जून 2007 को आरोप तय किए गए, लेकिन दस साल तक गवाही शुरू नहीं हो सकी। 16 अगस्त 2017 से मुकदमे में गवाही शुरू हुई।
दहशत इतनी कि कोई गवाही को नहीं था तैयार... दी जाए फांसी
एडीजीसी ने तर्क रखा कि दोनों दुर्दांत अपराधी हैं। अतीक के ऊपर बीस से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं, जबकि इकबाल पर तीस से ज्यादा मुकदमे हैं। दोनों को कई मुकदमों में सजा भी हो चुकी है। इनकी दहशत इतनी थी कि मुकदमे में कोई गवाही देने तक को तैयार नहीं था।
दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई
ऐसे अपराधियों को फांसी की सजा दी जानी चाहिए। वहीं बचाव पक्ष का तर्क था कि दोनों लगभग 18 साल से जेल में बंद हैं। गरीब व्यक्ति हैं। उम्र भी बहुत ज्यादा हो चुकी है, इसलिए सजा में रहम बरता जाए। कोर्ट ने अपराध को विरल से विरलतम श्रेणी का न मानते हुए दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई।