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पारिवारिक चाचा की हत्या में दो भतीजों को आजीवन कारावास
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फर्रुखाबाद। जिला जज शिवशंकर प्रसाद ने पारिवारिक चाचा की हत्या में तीन भतीजों को दोषी पाया है। उन्होंने कोर्ट में मौजूद दो भतीजों को उम्रकैद और 15-15 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने पर अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। फरार तीसरे भतीजे को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने के लिए गैर जमानती वारंट जारी किया है।
मेरापुर थाना क्षेत्र के गांव नदौरा निवासी किसान ज्ञानसिंह की परिवार के भाई इकबाल सिंह से जमीन के बंटवारे को लेकर रंजिश चल रही थी। एक मार्च 2018 की शाम छह बजे नलकूप के पास ज्ञानसिंह खड़े थे। उसी समय इकबाल सिंह बेटे अजय, कैलाश सिंह और रवेंद्र सिंह के साथ लाठी-डंडे लेकर आया और जमीन की रंजिश में ज्ञानसिंह पर हमला बोल दिया। शोर सुनकर परिवार के लोग नलकूप पर पहुंचे, हमलावर धमकी देकर भाग गए।
गंभीर रूप घायल ज्ञानसिंह को परिजनों ने लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया था। उसी दिन रात ज्ञानसिंह की मौत हो गई। पुत्र भूपाल सिंह ने पारिवारिक ताऊ इकबाल सिंह, उनके पुत्र अजय, कैलाश सिंह और रवेंद्र सिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विवेचना में इकबाल पर लगाया गया आरोप गलत पाया गया। विवेचक ने इकबाल सिंह का नाम हटाकर उनके पुत्र अजय, कैलाश सिंह व रवेंद्र सिंह के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया।
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तीनों भाइयों ने मुकदमे में जमानत कराई। तीनों खेती और मजदूरी का काम करने लगे। मुकदमे की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील व जिला शासकीय अधिवक्ता सुदेश प्रताप सिंह ने दलीलें पेश कीं। जिला जज ने पारिवारिक चाचा की हत्या में तीनों भतीजों को हत्या और धमकी देने के जुर्म में दोषी करार दिया। सजा सुनाने के दौरान कोर्ट में अजय और कैलाश सिंह उपस्थित हुए।
जिला जज ने अजय और कैलाश को आजीवन कारावास और जुर्माने से दंडित किया। दोनों को न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जेल भेज दिया। दोषसिद्ध रवेंद्र सिंह निर्णय सुनाने के दौरान कोर्ट में उपस्थित नहीं हुआ। पत्रावली अलग कर उसकी गिरफ्तारी के लिए गैर जमानती वारंट जारी किया गया है। जुर्माना राशि वसूल होने पर 50 प्रतिशत धनराशि ज्ञानसिंह के आश्रितों को समान अंश में बतौर क्षतिपूर्ति देने का आदेश जिला जज ने दिया है।
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मेरापुर थाना क्षेत्र के गांव नदौरा निवासी किसान ज्ञानसिंह की परिवार के भाई इकबाल सिंह से जमीन के बंटवारे को लेकर रंजिश चल रही थी। एक मार्च 2018 की शाम छह बजे नलकूप के पास ज्ञानसिंह खड़े थे। उसी समय इकबाल सिंह बेटे अजय, कैलाश सिंह और रवेंद्र सिंह के साथ लाठी-डंडे लेकर आया और जमीन की रंजिश में ज्ञानसिंह पर हमला बोल दिया। शोर सुनकर परिवार के लोग नलकूप पर पहुंचे, हमलावर धमकी देकर भाग गए।
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गंभीर रूप घायल ज्ञानसिंह को परिजनों ने लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया था। उसी दिन रात ज्ञानसिंह की मौत हो गई। पुत्र भूपाल सिंह ने पारिवारिक ताऊ इकबाल सिंह, उनके पुत्र अजय, कैलाश सिंह और रवेंद्र सिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विवेचना में इकबाल पर लगाया गया आरोप गलत पाया गया। विवेचक ने इकबाल सिंह का नाम हटाकर उनके पुत्र अजय, कैलाश सिंह व रवेंद्र सिंह के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया।
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तीनों भाइयों ने मुकदमे में जमानत कराई। तीनों खेती और मजदूरी का काम करने लगे। मुकदमे की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील व जिला शासकीय अधिवक्ता सुदेश प्रताप सिंह ने दलीलें पेश कीं। जिला जज ने पारिवारिक चाचा की हत्या में तीनों भतीजों को हत्या और धमकी देने के जुर्म में दोषी करार दिया। सजा सुनाने के दौरान कोर्ट में अजय और कैलाश सिंह उपस्थित हुए।
जिला जज ने अजय और कैलाश को आजीवन कारावास और जुर्माने से दंडित किया। दोनों को न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जेल भेज दिया। दोषसिद्ध रवेंद्र सिंह निर्णय सुनाने के दौरान कोर्ट में उपस्थित नहीं हुआ। पत्रावली अलग कर उसकी गिरफ्तारी के लिए गैर जमानती वारंट जारी किया गया है। जुर्माना राशि वसूल होने पर 50 प्रतिशत धनराशि ज्ञानसिंह के आश्रितों को समान अंश में बतौर क्षतिपूर्ति देने का आदेश जिला जज ने दिया है।