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अब 'एयर गन' बिक्री के लिए भी लाइसेंस जरूरी, ये हैं कारण
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sat, 22 Jul 2017 04:17 PM IST
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अब सिर्फ निशानेबाजी के शौकिनों के लिए ही नहीं बल्कि एयर गन की बिक्री करने वाले दुकानदारों को भी शस्त्र लाइसेंस लेना होगा। कोई भी दुकानदार अब बिना लाइसेंस लिए एयर गन की बिक्री नहीं कर सकेंगे। उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के एडीएम सिटी धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि एयर गन बेचने के लिए लाइसेंस आवश्यक कर दिया गया है। अभी कानपुर के मेस्टन रोड स्थित सागर एंड कंपनी और श्याम एंड कंपनी को लाइसेंस दिए गए हैं। केंद्र सरकार ने इसके लिए गजट जारी किया है, जिसका जुलाई से पालन शुरू हो गया है।
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यहां होता है एयर गन का इस्तेमाल
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एयर गन और पिस्टल में छर्रे प्रयोग होते हैं। मेले आदि में गुब्बारे फोड़ने के अलावा अब स्कूल और प्राइवेट शूटिंग रेंज भी इनका प्रयोग निशानेबाजी सिखाने के लिए हो रहा है। इस एयर गन और पिस्टल में .177, .20, .22 और .25 बोर के छर्रे प्रयोग होते हैं। कुछ रायफल में नुकीले छर्रे तो कुछ में छोटी लोहे की बॉल को प्रयोग किया जाता है। जबकि शिकारी अक्सर .22 या .25 बोर की गन प्रयोग करते हैं। इसकी मारक क्षमता 50 से 100 मीटर तक होती है। अमूमन भारतीय एयर गन तीन हजार से चालीस हजार रुपये तक की है। जबकि विदेशी एयर गन पांच लाख रुपये तक की आती हैं। विदेशी गन में सिलेंडर प्रयोग की भी सुविधा होती है, जिसके कारण उसकी मारक क्षमता सौ गुना ज्यादा तेज हो जाती है। प्रोफेशनल शिकारी इस गन का प्रयोग करते हैं।
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जान भी ले सकते हैं छर्रे
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जानकारों के अनुसार एयर गन खिलौना नहीं, बल्कि किसी की जान भी ले सकती है। मेले आदि या आम शूटिंग रेंज में प्रयोग होने वाली गन के छर्रे .177 बोर के होते हैं। लेकिन यह भी यदि पास से लगें तो घायल कर सकते हैं। जबकि .22 और .25 बोर के छर्रे या बॉल यदि सिर या दिल के पास लग जाये तो जान भी ले सकते हैं।
इसलिए जारी हुआ गजट
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सरकार के सामने करीब दो दर्जन ऐसे मामले आए हैं, जिनमें एयर गन का दुरुपयोग किया गया। इस कारण सरकार ने एयर गन के लिए लाइसेंस लेने का गजट जारी किया है।
कारण बताना होगा
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एअर गन लाइसेंस के लिए आम शस्त्र लाइसेंस की तरह आवेदन करते हुए इसे रखने का कारण भी बताना होगा पुलिस रिपोर्ट भी लगेगी। इसके लिए एक हजार रुपये शुल्क होगा। जबकि नवीनीकरण शुल्क 500 रुपये होगा।