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लैप्टोस्पायरोसिस तो नहीं ले रहा रोगियों की जान! जानवरों के मूत्र से फैलती है बीमारी, जांच की भी सुविधा नहीं

Tue, 14 Sep 2021 09:02 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Tue, 14 Sep 2021 09:02 AM IST
सार

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में स्क्रब टाइफस और लैप्टोस्पायरोसिस जांच की सुविधा नहीं है। डॉक्टरों ने निजी पैथोलॉजियों में सैंपल भेजने शुरू किए हैं।

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Leptospirosis is not taking lives of patients! The disease spreads through the urine of animals, there is no facility for testing
बुखार से मचा कोहराम - फोटो : amar ujala

विस्तार

बुखार के रोगियों के लक्षण देखकर अब शक लैप्टोस्पायरोसिस की ओर जा रहा है। इसी बीमारी से लोगों की मौत की आशंका जताई जा रही है। लक्षणों को मिलाने पर डॉक्टर यही डायग्नोसिस बता रहे हैं। इस पर स्वास्थ्य विभाग ने नालियों में छिड़काव और झाड़ियों को काटना शुरू करा दिया है।
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दूसरी तरफ जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में स्क्रब टाइफस और लैप्टोस्पायरोसिस जांच की सुविधा नहीं है। डॉक्टरों ने निजी पैथोलॉजियों में सैंपल भेजने शुरू किए हैं। नगर में बुखार से मर रहे रोगियों की जांच डेंगू, कोरोना और मलेरिया निगेटिव आने के बाद स्क्रब टाइफस और लैप्टोस्पायरोसिस पर डाक्टरों ने गौर करना शुरू कर दिया है।
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लैप्टोस्पायरोसिस के रोगी बीते सालों में बहुत कम संख्या में मिलते थे। यह बीमारी जानवरों के मूत्र से फैलती है। इसमें लैप्टोस्पायरा इनटेरोजिन बैक्टीरिया होता है। बुखार के रोगियों में जो लक्षण मिल रहे हैं, वे इस बीमारी से मिलते हैं। इसमें भी अचानक ठंड देकर बुखार और ब्लीडिंग होती है।

इसके साथ ही मल्टी आर्गन फेल हो जाते हैं।कल्याणपुर सीएचसी प्रभारी डॉ. अविनाश यादव ने बताया कि क्षेत्र में दवा का छिड़काव कराया जा रहा है। नालियाें की साफ कराई जा रही है। इसके साथ ही झाड़ियां काटी जा रही हैं। चूहे और जानवर यह बीमारी फैलाते हैं। गुर्दे और लिवर फेल होने पर इस बीमारी को विल्स डिजीज भी कहते हैं।

इसकी पहचान के लिए मैट जांच होती है। सीनियर फिजिशियन डॉ. जेएस कुशवाहा का कहना है कि इसके इक्का-दुक्का रोगी आते हैं। वहीं, निजी पैथोलॉजी संचालकों का कहना है कि टाइफस और लैप्टोस्पायरोसिस के प्रति डॉक्टर जागरुक नहीं हैं लेकिन अब सैंपल भेज रहे हैं। सीएमओ नैपाल सिंह ने बताया कि सैंपल जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज भेजे जा रहे हैं। वहां से जांच कराई जाएगी।
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