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कानपुर: तेंदुए का पता नहीं, ठंड से पिंजड़े में मर गया बकरा, अब दूसरे बकरे को बांधकर शुरू की गई निगरानी

Thu, 02 Dec 2021 10:31 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Thu, 02 Dec 2021 10:31 AM IST
सार

विभागीय अधिकारियों के अनुसार वन विभाग की तरफ से आसपास जो कैमरे लगाए गए हैं, उसमें इस क्षेत्र में काफी संख्या में कुत्ते दिखे हैं। ऐसा माना जा रहा है कि तेंदुए को कुत्तों के रूप में भोजन आसानी से उपलब्ध हो रहा है इस वजह ये यह अनुमान लगाया जा रहा है कि तेंदुए के इस क्षेत्र में अभी बने रहने की संभावना है।

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Leopard in college: forest department team could not catch the leopard
अब तक तेंदुए को नहीं पकड़ पाई वन विभाग की टीम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर के नवाबगंज क्षेत्र स्थित वीएसएसडी कालेज में पिछले दिनों सीसीटीवी कैमरे में नजर आए तेंदुए का बुधवार को भी पता नहीं चल पाया। एक दिन पहले तेंदुए को पकड़ने के लिए लगाए गए पिंजडे़ में बांधा गया बकरा ठंड से मर गया। अब फिर से पिंजड़े में दूसरा बकरा बांधा गया है। 
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वन विभाग के अनुसार तेंदुए को पकड़ने के लिए तीन पिंजड़े लगाए हैं। साथ ही उसे ट्रैंकुलाइज (बेहोश) करने के इंतजाम भी किए गए हैं। वन विभाग की टीम लगातार कॉलेज के आसपास और बैराज स्थित पार्क में निगरानी कर रही है।
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विभागीय अधिकारियों के अनुसार वन विभाग की तरफ से आसपास जो कैमरे लगाए गए हैं, उसमें इस क्षेत्र में काफी संख्या में कुत्ते दिखे हैं। ऐसा माना जा रहा है कि तेंदुए को कुत्तों के रूप में भोजन आसानी से उपलब्ध हो रहा है इस वजह ये यह अनुमान लगाया जा रहा है कि तेंदुए के इस क्षेत्र में अभी बने रहने की संभावना है।

यही वजह है कि पिंजड़े में तेंदुए को लाने के लिए काफी प्रयास किया जा रहा है। यह भी बताया जा रहा है कि आसपास की झाड़ियों में कुत्ते ही हड्डियां भी मिली हैं। लेकिन वहां पर तेंदुए के निशान नहीं दिखे।

वन विभाग की टीम लगातार इस क्षेत्र में तेंदुए की तलाश में लगी है। अभी तक उसका कोई निशान नहीं मिला है। पहले दिन ही वह सीसीटीवी कैमरे में आया था। बुधवार को लगाए गए कैमरों से खींची गई तस्वीरों के साथ कालेज के सीसीटीवी कैमरे की तस्वीरों का परीक्षण भी किया गया, लेकिन तेंदुआ नहीं दिखा।- अरविंद यादव, डीएफओ


बैराज की तरफ देखा गया तेंदुआ
बैराज के आसपास के क्षेत्रों में तेंदुए को देखे जाने की बात कही जा रही है। लेकिन कैमरे में वह नजर नहीं आया है। आज से करीब 10 साल पहले जाजमऊ के प्योदी शेखपुर गांव में भी तेंदुआ आया था। उस समय भी कई दिनों तक पेट्रोलिंग के बाद उसका कहीं पता नहीं चला था। खेतों में उसके पैरों के निशान जरूर मिले थे।
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