Kanpur: तेजी से बढ़ेगा चमड़ा उद्योग, क्रेडिट लिमिट बढ़ने से MSME इकाइयों को राहत, इस तरह से मिलेगा फायदा
Kanpur News: बजट में एमएसएमई के लिए क्रेडिट कार्ड लिमिट को पांच करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ कर दिया गया है। इसका मतलब यह है कि इतने कर्ज की गारंटी सरकार देगी। क्रेडिट लिमिट में पांच करोड़ की इस वृद्धि से एसएमएमई इकाइयों को अतिरिक्त कार्यशील पूंजी उपलब्ध होगी।
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आम बजट में चमड़ा और एमएसएमई क्षेत्र को केंद्रीय बजट में मिली राहतों से कानपुर के कारोबारियों की उम्मीदें उड़ान भरने लगी हैं। कानपुर अपने चर्म उत्पादों और मध्यम, लघु व सूक्ष्म इकाइयों (एमएसएमई) के लिए ही जाना जाता है। नम क्रोम-टैन्ड चमड़े (वेट ब्लू लेदर) के आयात पर और बिना रंगे हुए सूखे टैन्ड चमड़े (क्रस्ट लेदर) के निर्यात पर शुल्क खत्म होने से चमड़ा कारोबारियों की मुहमांगी मुराद पूरी हो गई।
वेट ब्लू लेदर पर पहले 11 प्रतिशत आयात शुल्क और क्रस्ट लेदर पर 20 प्रतिशत निर्यात शुल्क लगता था। अब इन पर उक्त शुल्क शून्य कर दिया गया है। इससे अकेले फिनिश्ड लेदर का निर्यात ही करीब 500 करोड़ रुपये बढ़ने की संभावना है। इसके अलावा फोकस उत्पाद योजना की घोषणा को लेकर भी फुटवियर व अन्य चर्म उत्पाद बनाने वाले कारोबारी भी उत्साहित हैं।
लिमिट को पांच करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ किया
इस योजना में चमड़े के अलावा अन्य सामग्री से बनाए जाने वाले उच्च गुणवत्ता वाले जूतों की डिजाइनिंग, निर्माण और मशीनरी के लिए करीब छह हजार करोड़ के पैकेज की घोषणा की गई है। इसके अलावा शहर में स्थित 35 हजार एमएसएमई इकाइयां भी बजट प्रावधानों को लेकर उत्साहित हैं। बजट में इनके लिए क्रेडिट कार्ड लिमिट को पांच करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ कर दिया गया है।
खिलौनों का मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की घोषणा
इसका मतलब यह है कि इतने कर्ज की गारंटी सरकार देगी। क्रेडिट लिमिट में पांच करोड़ की इस वृद्धि से एसएमएमई इकाइयों को अतिरिक्त कार्यशील पूंजी उपलब्ध होगी। बजट में देश को खिलौनों का मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की घोषणा भी हुई है। शहर में भी इनका सालाना 100 करोड़ का कारोबार होता है। संभव हो इस घोषणा के बाद शहर में खिलौना निर्माण इकाइयां खुल जाएं।
एमएसएमई इकाइयों को इस तरह मिलेगा इनकम टैक्स में राहत से लाभ
इनकम टैक्स में राहत का शहर के बाजार पर खासा प्रभाव दिखेगा और इसका प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ शहर की एमएसएमई इकाइयों को मिलेगा। शहर में 75 हजार कर्मचारी ऐसे हैं, जिनका वेतन 12 लाख से कम है। अब इनको टैक्स नहीं देना पड़ेगा तो बचत करेंगे या बाजार में सोना, चांदी, इलेक्ट्रॉनिक्स समेत अन्य ट्रेडों में खर्च करेंगे। मांग बढ़ने से एमएसएमई इकाइयों का उत्पादन बढ़ेगा। इससे बाजार में बूम आने की संभावना है।