Kanpur: वकील बेटे ने लड़ी मां-बाप के हक की लड़ाई, आठ साल बाद मिला न्याय, कोर्ट ने सुनाया ये फैसला
Kanpur News: उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को ब्याज सहित बीमा राशि के भुगतान के निर्देश दिए हैं। बीमा कंपनी ने पहले से बीमारी की बात कहकर भुगतान करने से इनकार कर दिया था।
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उत्तर प्रदेश के कानपुर में माता-पिता की बीमा राशि का भुगतान न करने पर बीमा कंपनी के खिलाफ अधिवक्ता पुत्र ने आठ साल की लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। मुकदमे की सुनवाई के दौरान माता-पिता की मृत्यु भी हो गई, लेकिन पुत्र ने हार नहीं मानी।
आखिर उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष बिकानू राम ने बीमा कंपनी को बीमा धन दो लाख रुपये सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से आठ साल के ब्याज के साथ अदा करने का निर्देश दिया। साथ ही बीमा कंपनी पर पांच हजार रुपये जुर्माना भी लगाया।
बाबूपुरवा कॉलोनी निवासी शिवनरेंद्र शर्मा ने पंजाब नेशनल बैंक में अपना खाता खुलवाया था। स्कीम के तहत 29 जनवरी 2013 को दो लाख रुपये का कैशलेस दुर्घटना बीमा भी हो गया। इसमें शिवनरेंद्र और उनकी पत्नी रामश्री दोनों शामिल थे।
इलाज में 2,58,774 रुपये हुए खर्च
अगले महीने रामश्री दुर्घटना में घायल हो गईं। प्रारंभिक इलाज घर पर हुआ, लेकिन रामश्री को शरीर में दर्द और बुखार की शिकायत रहने लगी। उन्होंने कई डॉक्टरों से इलाज कराया और कई दिनों तक अस्पताल में भी भर्ती रहीं। इलाज के दौरान 258774 रुपये खर्च हो गए।
बीमा कंपनी से क्लेम से मना किया
शिवनरेंद्र ने बीमा कंपनी से क्लेम मांगा, तो कंपनी ने पहले से बीमारी होने की बात कहते हुए इनकार कर दिया। इस पर शिवनरेंद्र ने 15 मई 2015 को ओरियंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड शाखा ट्रांसपोर्ट नगर के खिलाफ रिपोर्ट लिखाई थी।
आठ साल मिला इंसाफ, बेटे ने लड़ी लंबी लड़ाई
इसमें प्रबंधक, मेडी एसिस्ट इंडिया टीपीए प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक व शाखा प्रबंधक के खिलाफ उपभोक्ता फोरम में परिवाद दर्ज कराया था। मुकदमे की सुनवाई के दौरान ही रामश्री और शिवनरेंद्र की मौत हो गई। इसके शिवनरेंद्र के पुत्र अधिवक्ता मनीष कुमार शर्मा ने पैरवी की।