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Behmai Kand: लालाराम और श्रीराम का फूलन का अपहरण करना बना कांड की वजह, बीहड़ में रखकर किया था सामूहिक दुष्कर्म

Thu, 15 Feb 2024 04:17 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर देहात
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर देहात Published by: शाहरुख खान Updated Thu, 15 Feb 2024 04:17 PM IST
सार

लालाराम और श्रीराम द्वारा फूलन देवी का अपहरण करना बेहमई कांड की वजह बना। इन लोगों ने बीहड़ में रखकर फूलन के साथ कई दिनों तक ज्यादती की थी।

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Behmai Kand kanpur Lalaram and Shriram kidnapping of Phoolan became reason for Behmai Kand kanpur dehat
Behmai Kand kanpur - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर देहात के राजपुर के दमनपुर गांव निवासी सगे भाई लालाराम व श्रीराम जमीन विवाद के बाद बीहड़ में कूदे थे। एक पुलिस अधिकारी के विस्वास में आकर दोनों ने फूलन का अपहरण कर लिया था। लोग कहते हैं कि डकैत लाला राम व श्रीराम का अपराध बेहमई कांड की वजह बना। 
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बेहमई पहुंचकर फूलन से पकड़े गए लोगों से पूछा था कि लाला राम कहां है, इसके बाद ताबड़तोड़ गोली चला दीं। यमुना नदी के दोनों ओर कानपुर देहात व जालौन जिले में मेव ठाकुरों के कई गांव हैं। बीहड़ में विक्रम मल्लाह का बड़ा गैंग था। मुस्तकीम डाकू भी विक्रम की सलाह पर वारदात करता था। 
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दमनपुर के लाला राम व श्रीराम विक्रम गैंग में ही थे। बताते हैं कि विक्रम गैंग को खत्म करने के लिए कानपुर के पुलिस इंस्पेक्टर श्यामवीर सिंह राठौर ने सजातीय लालाराम व श्रीराम डकैत से संपर्क साधा। दोनों डकैत भाइयों ने ससुराल बैरामऊ में सोए विक्रम व उसके साथी बारेलाल को मार दिया। 
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इसके बाद फूलन का अपहरण कर ले गए। बताते हैं कि इन लोगों ने फूलन संग कई दिनों तक ज्यादती की। फूलन को बेहमई बीहड़ में रखा गया। कई दिन बाद बहाने से निकली फूलन यमुना में कूद गई और तैरकर पाल गांव जा पहुंची। वहां डकैत मुस्तकीम के गैंग में शामिल हो गई। 

इस बीच डकैत लालाराम व श्रीराम ने कई मल्लाहों को मार दिया। बेहमई में पकड़ छोड़ने व इसके इर्द गिर्द हुई इन मल्लाहों की हत्या की घटनाओं पर फूलन की नफरत बेहमई के प्रति बढ़ गई। उसने बेहमई के लोगों को डकैत लाला राम श्रीराम से मिला मान लिया। 

 

इसके बाद अपमान का बदला लेने के लिए उसने दलबल के साथ 14 फरवरी 1981 को धावा बोल दिया और ताबड़तोड़ फायरिंग की। फूलन का साथी डकैत मुस्तकीम 4 मार्च 2015 को डेरापुर में पुलिस मुठभेड़ में मारा गया।

बेहमई कांड : 43 साल बाद आया फैसला, एक को उम्रकैद, एक बरी
कानपुर देहात के बहुचर्चित बेहमई कांड का 43 साल बाद कोर्ट ने बुधवार शाम फैसला सुनाया। एंटी डकैती कोर्ट के विशेष न्यायाधीश अमित मालवीय की अदालत ने श्यामबाबू (65) को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 50 हजार का अर्थदंड भी लगाया है। वहीं, एक अन्य आरोपी विश्वनाथ को सबूतों के अभाव में दोषमुक्त करार दिया है।

 

सिकंदरा के बेहमई गांव में 14 फरवरी 1981 को दस्यु फूलन देवी ने सामूहिक नरसंहार की घटना को अंजाम दिया था। जिसमें 24 लोगों को एक लाइन में खड़ा कर गोली मारी गई थी। इसमें से 20 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी। जबकि छह लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। गांव के ही वादी राजाराम ने मुकदमा दर्ज कराया था। 

 

मामले की सुनवाई एंटी डकैती कोर्ट में चल रही थी। बचाव पक्ष के अधिवक्ता गिरीश नारायण दुबे के अनुसार, 24 नवंबर 1982 तक मामले में 15 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई थी। लेकिन फूलन देवी को पकड़ा नहीं जा सका था। इनके खिलाफ आरोप पत्र अदालत में दाखिल कर दिए गए थे। 

 

मामले में कुछ आरोपियों के मध्य प्रदेश की जेल में बंद होने के कारण मुकदमे में उनकी हाजिरी न होने से लंबे समय तक आरोपियों पर आरोप तय नहीं हो सके। जिससे मुकदमे की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। इसी दौरान कुछ आरोपियों की मौत हो गई, जबकि कुछ की जमानत होने के बाद वे फरार हो गए थे।

 

वर्ष 2007 में आरोपी रामसिंह, रतीराम, भीखा व बाबूराम के खिलाफ पहली बार आरोप तय हुए थे। वहीं, 2012 में आरोपी पोसा, विश्वनाथ व श्यामबाबू के अलावा रामसिंह और भीखा पर दोबारा आरोप तय हुए थे। कोर्ट में हाजिर हो रहे सिर्फ पांच आरोपियों पर मुकदमा आगे बढ़ाया गया। जिला शासकीय अधिवक्ता राजू पोरवाल ने बताया कि मामले में 31 साल बाद 24 सितंबर 2012 को मुकदमा वादी राजाराम की पहली बार कोर्ट में गवाही हुई। अभियोजन की ओर से 2015 तक कुल 15 गवाह पेश किए गए। इसके बाद कानूनी दांवपेच में उलझे इस मुकदमे का फैसला आने में नौ साल लग गए। इस दौरान एक-एक कर सभी अभियुक्तों की मौत हो गई। सिर्फ श्यामबाबू और विश्वनाथ ही बचे थे। सबूतों और गवाहों के आधार पर बुधवार को कोर्ट ने श्यामबाबू को उम्रकैद की सजा सुनाई और उस पर 50 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। विश्वनाथ को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया है।

 

इनकी हुई थी हत्या
बेहमई नरसंहार कांड में तुलसीराम, राजेंद्र सिंह, सुरेंद्र सिंह, जगन्नाथ सिंह, वीरेंद्र सिंह, रामाधार सिंह, शिवराम सिंह, रामचंद्र सिंह, शिवबालक, बनवारी सिंह पुत्र महाराज सिंह, लाल सिंह, नरेश सिंह, दशरथ सिंह, वनवारी सिंह पुत्र लाखन सिंह, हिम्मत सिंह, हुकुम सिंह, हरिओम सिंह, राम अवतार सिंह निवासी बेहमई, तुलसीराम निवासी राजपुर तथा नजीर खां निवासी सिकंदरा की बर्बरतापूर्वक हत्या कर दी गई थी।
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