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लापरवाही: पेड़ बनने से पहले ही सूख गए 30 फीसदी पौधे, पिछले साल जुलाई में 21 विभागों ने लगाए थे 55.68 लाख पौधे

Mon, 13 Jun 2022 01:05 PM IST
शिखा पांडेय दिनेश मिश्र, अमर उजाला, कानपुर देहात
दिनेश मिश्र, अमर उजाला, कानपुर देहात Published by: शिखा पांडेय Updated Mon, 13 Jun 2022 01:05 PM IST
सार

हरियाली को बढ़ावा देने के लिए जहां एक ओर बड़े स्तर पर पौध रोपण अभियान चलाया जाता है वहीं विभाग की लापरवाही के चलते पिछले साल लगाए गए लाखों पौधे सूख गए। 

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Lakhs of plants wereted due to the negligence of the department
सूखे पौधे - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हरियाली बढ़ाने के अभियान में बढ़ चढ़ कर भागीदारी करने वाले कई विभाग पौधों की सुरक्षा और समय पर सिंचाई को लेकर कतई संजीदा नहीं हैं। ऐसे में लगाने के कुछ दिन बाद ही पौधे सूख जाते हैं। इससे पौधों की लागत और श्रम दोनों जाया होते हैं। हरियाली भी नहीं बढ़ती। बीते वर्ष जुलाई में 21 विभागों ने 55.68 लाख पौधे लगाए थे। मई में कराए गए अंतर विभागीय सत्यापन में 38.79 लाख पौधे सुरक्षित बचे हैं। कुल 30.33 फीसदी पौधे सूख गए।

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हरियाली बढ़ाने के लिए प्रति वर्ष मानसून आने पर पौधे लगाए जाते हैं। बीते वर्ष नोडल वन विभाग ने 26.29 लाख पौधे लगाए थे। मई तक इनमें से 1427381 पौधे सूख गए। यानी कि वन विभाग लगाए गए पौधों में केवल 1201619 पौधे ही सुरक्षित बचा सका। यह लगाए गए पौधों का 45 फीसदी है। इसी प्रकार 20 अन्य विभागों ने 29.39 लाख पौधे लगाए थे।

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देखरेख व जरूरत पर सिंचाई के अभाव में मई तक 26.78 लाख पौधे ही सुरक्षित बचे। करीब 2.61 लाख पौधे सूख गए। अंतर विभागीय सत्यापन में सामने आया कि 91 फीसदी पौधे सुरक्षित बचा लिए गए। वन विभाग व 20 अन्य विभागों के लगाए पौधों में 69.67 फीसदी सुरक्षित बचाए गए। 

मानसून आने पर हर वर्ष पौधे लगाए जाते हैं। पौधों की सुरक्षा महत्वपूर्ण है। वहीं मौसम के उतार चढ़ाव की वजह से भी पौधे सूख जाते हैं। कुछ स्थानों पर छुट्टा मवेशी पौधों को नुकसान पहुंचाते हैं। बीते वर्ष लगाए गए पौधों में करीब 70 फीसदी पौधे सुरक्षित बचा लिए गए हैं। इस बार पौधरोपण में सुरक्षा की कार्ययोजना भी शामिल की गई है। शासन ने इसके निर्देश दिए हैं। तीन साल तक संबंधित विभाग पौधों की देखदेख की जिम्मेदारी निभाएंगे। - एके द्विवेदी, डीएफओ कानपुर देहात

इस तरह सामने आयी सही स्थिति 
वन विभाग हरियाली विभाग का नोडल है। मानसून के दौरान लगाए गए पौधों का साल में दो बार अंतर विभागीय सत्यापन कराया गया है। मई में कराए गए सत्यापन में विभागों की ओर से सुरक्षित बचे पौधों का ब्योरा वन विभाग को सौंपा गया है। जीवित पौधों की इस रिपोर्ट से यह आंकड़ा सामने आया है।

पौधे सुरक्षित बचाने में पशुपालन व नगर निकाय फिसड्डी
पशुपालन विभाग ने बीते वर्ष 8300 पौधे लगाए थे, लेकिन सिर्फ 1355 ही सुरक्षित बचे हैं। यह 16.32 फीसदी है। इसी प्रकार नगर निकाय ने 29754 पौधे लगाए थे। इसमें से केवल 4986 पौधे ही सुरक्षित बचाए जा सके। यह 16.75 फीसदी है। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने 37320 पौधे लगाए थे। इसमें से 10925 पौधे सुरक्षित बचाए जा सके। यह 29.27 फीसदी है। इसी प्रकार पंचायती राज विभाग ने एक लाख 56 हजार पौधे लगाए थे। अब 42109 पौधे सुरक्षित बच सके। यह 26.99 फीसदी है। 

बेसिक शिक्षा ने बचाई 75 फीसदी हरियाली
जिले में बेसिक शिक्षा विभाग का हरियाली बढ़ाने में सहयोग सबसे अधिक रहा है। हरियाली अभियान के नोडल वन विभाग से भी अधिक बेसिक शिक्षा विभाग ने 75 फीसदी पौधे सुरक्षित बचा लिए हैं। बीते वर्ष बेसिक शिक्षा विभाग ने 48264 पौधे लगाए थे। वन विभाग को भेजी रिपोर्ट में 36198 पौधे सुरक्षित होने का दावा किया गया है। 
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