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बिल्हौर में बनेगी देश की दूसरी अर्थ साइंस लैब

Sat, 13 Aug 2016 01:39 AM IST
राहुल त्रिपाठी/ कानपुर
राहुल त्रिपाठी/ कानपुर Updated Sat, 13 Aug 2016 01:39 AM IST
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Boils down to form the country's second-Earth Science Lab
एसडीएम बिल्हौर आलोक कुमार से चर्चा करते आईआईटी वैज्ञानिक केश्री हर्षा, सोहम अडला। - फोटो : amarujala
बिल्हौर (कानपुर)। प्रदेश में तेजी से हो रहे जलवायु परिवर्तन के कारणों का पता लगाने के लिए पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, भारत सरकार और आईआईटी कानपुर मिलकर रिसर्च करेंगे। इसके लिए स्टेबलिशमेंट ए क्रिटिकल जोन ऑब्जरवेशन इन गंगा बेसिन प्रोजेक्ट के तहत देश की दूसरी पृथ्वी विज्ञान प्रयोगशाला भी आईआईटी द्वारा स्थापित की जाएगी। 
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आईआईटी कानपुर ने बिल्हौर तहसील के चौबेपुर में पांडु नदी और निचली गंग नहर बेसिन के मध्य अनुसंधान क्षेत्र का चयन सेटेलाइट के माध्यम से कर लिया है। तीन वर्षों में प्रयोगशाला तैयार कर जल-थल-वायु में हो रहे बदलावों पर रिसर्च शुरू हो जाएगी।
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आईआईटी कानपुर के पृथ्वी विज्ञान विभाग के हेड प्रोफेसर राजीव सिन्हा के निर्देशन में अनुसंधान कर रहे वैज्ञानिक के. श्री हर्षा ने बताया कि स्टेबलिशमेंट ए क्रिटिकल जोन ऑब्जरवेशन इन गंगा बेसिन प्रोजेक्ट पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय का है, इसमें उ.प्र. में हो रहे जलवायु परिवर्तन के वास्तविक कारणों का पता लगाना जाना है। रिसर्च के लिए चौबेपुर क्षेत्र के बनी और बसंठी गांव के 20 किमी. सर्किल के क्षेत्र का चुनाव किया गया है। यहीं पृथ्वी विज्ञान प्रयोगशाला स्थापित की जाएगी।
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देश की पहली पृथ्वी विज्ञान प्रयोगशाला करीब 10 साल पहले कर्नाटक के कबनी नदी बेसिन क्षेत्र में स्थापित की गई थी। आईआईटी की रिसर्च के मुताबिक भूगर्भ जल के अत्यधिक दोहन से बीते कई दशकों में प्रदेश में भूकंप के कई नए क्षेत्र बने हैं। इसके साथ-साथ जलवायु में भी अंतर आया है।

रिसर्च के बाद जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए भी सुझाव मंत्रालय को दिए जाएंगे।     पांडु नदी और निचली गंग नहर के मध्य काफी बड़े क्षेत्र में खाली भूमि पड़ी है। एसडीएम आलोक कुमार ने बताया कि भारत सरकार की योजना है, इसलिए बनी, बसंठी के ग्राम प्रधान सहित जिला प्रशासन अनुसंधानकर्ताओं का पूरा सहयोग करेगा।

ये होगा रिसर्च मेंः आईआईटी वैज्ञानिक सोहम अडला ने बताया कि मिट्टी की गुणवत्ता, भूगर्भ जल की स्थिति, सूर्य की चमक और किरणों की रफ्तार, वर्षभर तापमान में होने वाले बदलाव, वायु की दिशा, नहर में पानी की स्थिति, वाष्पन, भूकंप जोखिम, मौसम आदि पर रिचर्स की जाएगी। इसके लिए अनुसंधानकर्ता सुनील निषाद, अतुल कुमार, कृपा शंकर, अरुण शर्मा को नियुक्त किया गया है जो लगातार क्षेत्र में रहकर कार्य करेंगे।

इन पर होगी रिसर्च
पर्यावरण, मृदा, मौसम, वायु, पृथ्वी की आंतरिक संरचना, वायुमंडल, भू-आकृतिक, तापमान, वर्षा, जल संचयन, भूगर्भ जलस्तर, सूर्य चमक व उसकी किरणें, वाष्पन आदि।

यहां होगा अनुसंधान
प्रतापपुर, बिरोहा, निगोहा, दिलीपनगर, घिन्नीपुरवा,  सिंहपुर, मुडहर, मनोह,  बोझा,  बिकरू बसेन, कंजटी, बसंठी, शेरपुर बैरा, बहरमपुर, छिटिकपुर, गौरी बाघपुर आदि।

 
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