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हर किसी के दिल में अमिट छाप छोड़ गए अटल जी, पढ़िए उनके पत्र मित्र की कहानी
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Fri, 24 Aug 2018 02:26 PM IST
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Atal Bihari Vajpayee
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भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी वैसे तो हर किसी के दिल में अमिट छाप छोड़ गए हैं। उनके निधन के बाद से हर किसी की आंख नम है। लेकिन कानपुर (बिरहाना रोड) के कपड़ा कारोबारी सत्यनारायण सिंहानिया और अटल जी का रिश्ता कुछ अलग तरह का था। दोनों एक दूसरे को पेनपॉल (पत्र मित्र) कहा करते थे। यह रिश्ता कई दशक तक चला।
सत्यनारायण सिंहानिया बताते हैं कि अटल जी से उनकी कानपुर में सक्रियता की दौरान ही मुलाकात हुई थी। वह मेस्टन रोड, नयागंज और गंगा किनारे बैठकें किया करते थे। उनसे यदा कदा मुलाकात हो जाती थी। जब वे पहली बार सांसद बने तो उनकी शख्सियत मन मस्तिष्क में ताजा हो गई। बधाई देने के लिए उन्हें पत्र लिखा और फिर भूल गया कि उन्हें कौन पत्र भेजेगा। कुछ दिन बाद अटल जी के हाथ का लिखा हुआ पत्र मिला। शुभकामनाओं के बदले उन्होंने धन्यवाद दिया और कानपुर के हाल पूछे। अटल जी का पत्र पढ़कर मन खुशी से झूम उठा। इसके बाद यदा कदा उन्हें पत्र लिखने लगा। जब वे पहली बार प्रधानमंत्री बने तब भी पत्र लिखकर बधाई दी। उसी अंदाज में उनका जवाब आया।
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सत्यनारायण सिंहानिया बताते हैं कि अटल जी से उनकी कानपुर में सक्रियता की दौरान ही मुलाकात हुई थी। वह मेस्टन रोड, नयागंज और गंगा किनारे बैठकें किया करते थे। उनसे यदा कदा मुलाकात हो जाती थी। जब वे पहली बार सांसद बने तो उनकी शख्सियत मन मस्तिष्क में ताजा हो गई। बधाई देने के लिए उन्हें पत्र लिखा और फिर भूल गया कि उन्हें कौन पत्र भेजेगा। कुछ दिन बाद अटल जी के हाथ का लिखा हुआ पत्र मिला। शुभकामनाओं के बदले उन्होंने धन्यवाद दिया और कानपुर के हाल पूछे। अटल जी का पत्र पढ़कर मन खुशी से झूम उठा। इसके बाद यदा कदा उन्हें पत्र लिखने लगा। जब वे पहली बार प्रधानमंत्री बने तब भी पत्र लिखकर बधाई दी। उसी अंदाज में उनका जवाब आया।
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अटलजी की कुल देवी का मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
सिंहानिया बताते हैं कि अटल जी से उनकी मुलाकातें भले ही अधिक न हुई हों लेकिन वे याद रखते थे। अटल जी के कुछ पत्र तो आज भी उनके लिए धरोहर की तरह हैं।
Atal Bihari Vajpayee
एक पत्र का मजमून (13 जून 1996)...
प्रिय श्री सिंहानिया
आपका शुभकामना संदेश प्राप्त हुआ। आभारी हूं। आपके सहयोग और समर्थन से 11वीं लोकसभा के चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी। इसी के आधार पर राष्ट्रपति ने मुझे प्रधानमंत्री के पद पर नियुक्त किया, लेकिन संख्या बल में कमी के कारण मुझे हटना पड़ा। वर्तमान परिस्थिति हमारे लिए एक अवसर भी है और चुनौती भी। अपने प्रयत्नों में तीव्रता लाकर और परिश्रम की पराकाष्ठा करके हमें अपने लक्ष्य को पाना है। देश के सभी भागों और समाज के सभी वर्गों तक अपना संदेश प्रभावी ढंग से पहुंचाकर ही हम राष्ट्रीय आकांक्षा की पूर्ति कर सकते हैं। मुझे विश्वास है कि आप दोगुनी मेहनत से जुटेंगे और अवसर आने पर संख्या बल में थोड़ी सी कमी हमारे मार्ग में बाधा नहीं बनेगी।
आपका-- अटल बिहारी वाजपेयी
प्रिय श्री सिंहानिया
आपका शुभकामना संदेश प्राप्त हुआ। आभारी हूं। आपके सहयोग और समर्थन से 11वीं लोकसभा के चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी। इसी के आधार पर राष्ट्रपति ने मुझे प्रधानमंत्री के पद पर नियुक्त किया, लेकिन संख्या बल में कमी के कारण मुझे हटना पड़ा। वर्तमान परिस्थिति हमारे लिए एक अवसर भी है और चुनौती भी। अपने प्रयत्नों में तीव्रता लाकर और परिश्रम की पराकाष्ठा करके हमें अपने लक्ष्य को पाना है। देश के सभी भागों और समाज के सभी वर्गों तक अपना संदेश प्रभावी ढंग से पहुंचाकर ही हम राष्ट्रीय आकांक्षा की पूर्ति कर सकते हैं। मुझे विश्वास है कि आप दोगुनी मेहनत से जुटेंगे और अवसर आने पर संख्या बल में थोड़ी सी कमी हमारे मार्ग में बाधा नहीं बनेगी।
आपका-- अटल बिहारी वाजपेयी