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बलिदान दिवस: 'रानी लक्ष्मीबाई' की ये 10 बातें महिलाओं में भर देंगी जोश, जानें अनसुनी कहानियां
शिखा पाण्डेय, अमरउजाला कानपुर
Updated Mon, 18 Jun 2018 04:25 PM IST
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रानी लक्ष्मीबाई
उम्र कुल तेइस की थी, मनुज नहीं अवतारी थी, हमको जीवित करने आयी, बन स्वतन्त्रता नारी थी...ये पक्तियां भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों का मुकाबला करने वाली पहली महिला व वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई के लिए कही गयी हैं। रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर जानें उनके जीवन से जुड़ी अनसुनी कहानियां...
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जानें लक्ष्मीबाई से जुड़ी विशेष बातें
रानी लक्ष्मीबाई
- रानी लक्ष्मीबाई मराठा शासित झांसी की रानी और भारत की स्वतंत्रता संग्राम की पहली वीरांगना थीं।
- सन् 1857 भारत का प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम हुआ जिसमें लक्ष्मीबाई ने अहम भूमिका निभाई।
- सन् 1857 भारत का प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम हुआ जिसमें लक्ष्मीबाई ने अहम भूमिका निभाई।
रानी लक्ष्मीबाई
- अपने शौर्य से अंग्रेजों के दांत खट्टे करने व रणयज्ञ में अपने प्राणों की आहुति देने वाले योद्धाअों में वीरांगना लक्ष्मीबाई का नाम सर्वोपरी माना जाता है।
- अपने सैन्य कौशल का परिचय देते हुए अंग्रेजों से मुकाबला करने के लिए उन्होंने अपने तरीके से सेना का गठन किया।
- अपने सैन्य कौशल का परिचय देते हुए अंग्रेजों से मुकाबला करने के लिए उन्होंने अपने तरीके से सेना का गठन किया।
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रानी लक्ष्मीबाई
- रानी लक्ष्मीबाई घुड सवारी और तलवारबाजी दोनों में ही निपुण थीं।
- अपने महल के बीचों बीच उन्होंने घुड सवारी के लिए अलग से स्थान बनवाया था।
- अपने महल के बीचों बीच उन्होंने घुड सवारी के लिए अलग से स्थान बनवाया था।
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रानी लक्ष्मीबाई
- लक्ष्मीबाई के घोड़ों के नाम सारंगी, पवन, और बादल था। सन्1858 के समय किले से निकलने में घोड़े बादल की अहम भूमिका थी।
- रानी लक्ष्मीबाई में महिलाअों को सबला बनाने के लिए स्त्री सेना का गठन किया। साथ ही उन्हें घुड़सवारी व शस्त्र चलाना भी सिखाया।
- रानी लक्ष्मीबाई में महिलाअों को सबला बनाने के लिए स्त्री सेना का गठन किया। साथ ही उन्हें घुड़सवारी व शस्त्र चलाना भी सिखाया।