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होमगार्ड भर्ती धांधली: डॉ. प्रवीण और डॉ. महेश निलंबित, डॉ. डीएस राजपूत पर भी शिकंजा
Wed, 21 Oct 2026 11:23 PM IST
Shikha Pandey
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: Shikha Pandey
Updated Wed, 21 Oct 2026 11:23 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
होमगार्ड भर्ती के दौरान रिश्वत लेने वाले जेल गए उर्सला के दोनों डॉक्टर निलंबित हो गए हैं। 48 घंटे जेल में रहने के बाद डॉ. प्रवीण और डॉ. महेश का स्वतः ही निलंबन हो गया है। वहीं, अब तीसरे डॉ. डीएस राजपूत पर भी पुलिस ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। हंगामे के वक्त अभ्यर्थियों ने डॉ. राजपूत पर भी रुपये वसूलने के आरोप लगाए थे।
15 अक्तूबर की रात पुलिस लाइन में मेडिकल परीक्षण के दौरान अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया था कि मेडिकल फिटनेस के नाम पर उनसे 15 से 20 हजार रुपये की वसूली की जा रही है। कोतवाली पुलिस ने उर्सला के डॉ. प्रवीण, डॉ. महेश, डॉ. डीएस राजपूत के अलावा चालक अजीत समेत छह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर दो डॉक्टरों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। एसीपी अमित कुमार पांडे ने बताया कि जेल भेजे गए डॉक्टर प्रवीण व महेश के खिलाफ ऑनलाइन रुपये लेने के साक्ष्य मिले थे। इसलिए इन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था लेकिन डॉ. राजपूत पर सिर्फ रुपये लेने के आरोप ही लगे थे। इस कारण उनकी गिरफ्तारी नहीं थी।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. शैलेंद्र तिवारी ने बताया कि सरकारी नियमों के अनुसार अगर कोई सरकारी कर्मचारी आपराधिक या अन्य मामलों में 48 घंटे से ज्यादा समय तक पुलिस या न्यायिक हिरासत में रहता है तो हिरासत की तिथि से उसे निलंबित माना जाता है। 48 घंटे से ज्यादा की सजा होने पर ये स्वतः ही लागू हो जाता है। नियमों के अनुसार वे निलंबित हो गए हैं। ऐसे में दोनों ही डॉक्टर अगर जमानत पर बाहर भी आ जाते हैं तो निजी प्रैक्टिस भी नहीं कर सकते हैं।
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15 अक्तूबर की रात पुलिस लाइन में मेडिकल परीक्षण के दौरान अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया था कि मेडिकल फिटनेस के नाम पर उनसे 15 से 20 हजार रुपये की वसूली की जा रही है। कोतवाली पुलिस ने उर्सला के डॉ. प्रवीण, डॉ. महेश, डॉ. डीएस राजपूत के अलावा चालक अजीत समेत छह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर दो डॉक्टरों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। एसीपी अमित कुमार पांडे ने बताया कि जेल भेजे गए डॉक्टर प्रवीण व महेश के खिलाफ ऑनलाइन रुपये लेने के साक्ष्य मिले थे। इसलिए इन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था लेकिन डॉ. राजपूत पर सिर्फ रुपये लेने के आरोप ही लगे थे। इस कारण उनकी गिरफ्तारी नहीं थी।
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चिकित्सा अधीक्षक डॉ. शैलेंद्र तिवारी ने बताया कि सरकारी नियमों के अनुसार अगर कोई सरकारी कर्मचारी आपराधिक या अन्य मामलों में 48 घंटे से ज्यादा समय तक पुलिस या न्यायिक हिरासत में रहता है तो हिरासत की तिथि से उसे निलंबित माना जाता है। 48 घंटे से ज्यादा की सजा होने पर ये स्वतः ही लागू हो जाता है। नियमों के अनुसार वे निलंबित हो गए हैं। ऐसे में दोनों ही डॉक्टर अगर जमानत पर बाहर भी आ जाते हैं तो निजी प्रैक्टिस भी नहीं कर सकते हैं।
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शारीरिक कमी होने के बाद भी दिखाया फिट
एसीपी ने बताया कि दो-तीन दिन में हुई जांच में एक अभ्यर्थी ऐसा मिला है जिसे डॉ. राजपूत ने शारीरिक कमी होने के बाद भी फिट दिखाया है। इसलिए डॉ. राजपूत को पूछताछ के लिए बुलाया गया था। जल्द ही दोनों का आमना-सामना भी कराया जा सकता है। वहीं, जांच में एक सुजीत नाम का व्यक्ति प्रकाश में आया है जिसे पांच हजार रुपये ऑनलाइन और 45 हजार रुपये नकद दिए जाने की बात सामने आ रही है। उसकी भी तलाश की जा रही है। इसके अलावा सभी आरोपियों के बैंक खाते भी जांचे जा रहे हैं।
पूरे मामले में उन्होंने कोई पैसे नहीं लिए हैं। उनके खाते में ऑनलाइन भी कोई रकम नहीं आई है। अगर ऐसा होता तो घटना के बाद सभी की तरह उनसे भी पुलिस पूछताछ करती। फिलहाल वह उर्सला में अपनी ड्यूटी कर रहे हैं। - डॉ. डीएस राजपूत
एसीपी ने बताया कि दो-तीन दिन में हुई जांच में एक अभ्यर्थी ऐसा मिला है जिसे डॉ. राजपूत ने शारीरिक कमी होने के बाद भी फिट दिखाया है। इसलिए डॉ. राजपूत को पूछताछ के लिए बुलाया गया था। जल्द ही दोनों का आमना-सामना भी कराया जा सकता है। वहीं, जांच में एक सुजीत नाम का व्यक्ति प्रकाश में आया है जिसे पांच हजार रुपये ऑनलाइन और 45 हजार रुपये नकद दिए जाने की बात सामने आ रही है। उसकी भी तलाश की जा रही है। इसके अलावा सभी आरोपियों के बैंक खाते भी जांचे जा रहे हैं।
पूरे मामले में उन्होंने कोई पैसे नहीं लिए हैं। उनके खाते में ऑनलाइन भी कोई रकम नहीं आई है। अगर ऐसा होता तो घटना के बाद सभी की तरह उनसे भी पुलिस पूछताछ करती। फिलहाल वह उर्सला में अपनी ड्यूटी कर रहे हैं। - डॉ. डीएस राजपूत
जेल में बंद डॉ. प्रवीण का बन रहा करोड़ों का अस्पताल
जेल में बंद डॉ. प्रवीण की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। सूत्रों के अनुसार उसकी प्रॉपर्टी की जांच भी हो सकती है। डॉ. प्रवीण काकादेव में अपना आलीशान हॉस्पिटल बनवा रहा है। करोड़ों रुपये का भवन है। साथी डॉक्टरों के अनुसार सरकारी डॉक्टर होने के बावजूद डॉ. प्रवीण शाम के वक्त निजी प्रैक्टिस करता था। वह शहर के पॉश इलाके अशोकनगर स्थित एक निजी अस्पताल में मरीजों की सर्जरी करता था और अवैध रूप से मोटी रकम वसूलता था। कई रोगियों को उर्सला से नर्सिंगहोम में ले जाकर सर्जरी भी करता था। अन्य विशेषज्ञ डॉक्टर दिन भर में औसतन तीन सर्जरी करते हैं वहीं डॉ. प्रवीण एक दिन में चार-पांच सर्जरी करता था। साथी चिकित्सकों का यह भी कहना है कि वह प्रत्येक सर्जरी के एवज में पांच से 15 हजार रुपये तक की रकम वसूलता था। डॉ. प्रवीण ने 2015 में उर्सला अस्पताल जॉइन किया था। इससे पहले वह सीएमओ के अंडर में ही नगर के स्वास्थ्य केंद्र में तैनात था।
जेल में बंद डॉ. प्रवीण की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। सूत्रों के अनुसार उसकी प्रॉपर्टी की जांच भी हो सकती है। डॉ. प्रवीण काकादेव में अपना आलीशान हॉस्पिटल बनवा रहा है। करोड़ों रुपये का भवन है। साथी डॉक्टरों के अनुसार सरकारी डॉक्टर होने के बावजूद डॉ. प्रवीण शाम के वक्त निजी प्रैक्टिस करता था। वह शहर के पॉश इलाके अशोकनगर स्थित एक निजी अस्पताल में मरीजों की सर्जरी करता था और अवैध रूप से मोटी रकम वसूलता था। कई रोगियों को उर्सला से नर्सिंगहोम में ले जाकर सर्जरी भी करता था। अन्य विशेषज्ञ डॉक्टर दिन भर में औसतन तीन सर्जरी करते हैं वहीं डॉ. प्रवीण एक दिन में चार-पांच सर्जरी करता था। साथी चिकित्सकों का यह भी कहना है कि वह प्रत्येक सर्जरी के एवज में पांच से 15 हजार रुपये तक की रकम वसूलता था। डॉ. प्रवीण ने 2015 में उर्सला अस्पताल जॉइन किया था। इससे पहले वह सीएमओ के अंडर में ही नगर के स्वास्थ्य केंद्र में तैनात था।