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OMG! ऐसे हालात में है फूलन का परिवार
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sun, 13 Aug 2017 12:38 PM IST
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कभी जिस फूलन का नाम सुनते ही लोग कांप उठते थे आज उसी की मां दाने-दाने को तरस रही है। एक समय ऐसा था जब फूलन की एक आवाज पर लोगों के घरों में अनाज पहुंच जाता था, भू्खों के पेट भरते थे। आज उसी की मां को भूखी रह रही है। यही नहीं लोग डकैत की मां कहकर ताने देते हैं। ये हाल है फूलन की मां मूला देवी का। बेटी के जाने के बाद वो किस तरह की जिंदगी जी रही है। इस स्टोरी से आपको जानने को मिल जाएगा। बता दें हम फूलन का जिक्र इसलिए कर रहे हैं क्योंकि 10 अगस्त को फूलन देवी की बर्थ एनिवर्सिरी है।
हाथ में बंदूक उठाए हुए फूलन देवी (फाइल फोटो)
कौन थी फूलन...
चंबल के बीहड़ों से संसद तक पहुंचने वाली दस्यु सुंदरी फूलन देवी के बारे में कई किताबें लिखी गईं। बॉलीवुड की सबसे चर्चित फिल्म ‘बैंडिट क्वीन’ रिलीज हुई और तमाम बायोपिक डाक्युमेन्ट्री बनीं लेकिन उनके बचपन से जुड़े कई ऐसे रोचक किस्से हैं जिनके बारे में शायद कम ही लोग जानते होंगे।
फूलन देवी का पहला पति (फाइल फोटो)
फूलन के पहले पति का हाल
फूलन की शादी ग्यारह साल की उम्र में हुई थी लेकिन उनके पति पुत्तीलाल और पुत्तीलाल के परिवार ने उन्हें छोड़ दिया था। फूलन देवी के पहले पति पुत्ती लाल की उम्र करीब 75 साल है।पुत्तीलाल काफी वृद्ध हो चुके हैं और उन्हें ठीक से नहीं याद है कि किस साल में उनकी शादी फूलन देवी से हुई थी। पुत्तीलाल के मुताबिक सत्तर के दशक के आसपास उनकी शादी हुई थी। कुछ सालों तक फूलन देवी उनके साथ रहीं। पुत्तीलाल ने कहा कि अब बीहड़ों में पहले जैसी दहशत नहीं रहती। एक समय था जब फूलन देवी के नाम से पूरा इलाका थर्राता था। फूलन देवी मायके से ही डकैत बनकर आई थी।
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फूलन देवी (फाइल फोटो)
फूलन के दूजे पति दिल्ली में
फूलन के दूसरे पति उमेद सिंह का नाम सक्रिय राजनीति में आता है। हालांकि वे कहते हैं कि वे सिर्फ एकलव्य सेना का काम ही आगे बढ़ाना चाहेंगे। इसलिए वो अपनी पत्नी फूलन देवी द्वारा संगठित एकलव्य सेना के कामकाज पर ही ध्यान दे रहे हैं।बताते चलें कि उमेद सिंह अब दिल्ली में रहते हैं। उन्होंने पिछला चुनाव मायावती की पार्टी बीएसपी से लड़ा था और अभी भी उसके सदस्य हैं। उनका कहना है कि वे पार्टी नेतृत्व के आदेश पर ही पार्टी का काम भी देखते हैं।
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फूलन देवी की मां (फाइल फोटो)
फूलन देवी की मां दर्द...
उत्तर प्रदेश के जालौन जिले का छोटा सा गांव गुढ़ा का पुरवा में एक कच्चे, खिन्न-भिन्न हो चुके झोपड़ीनुमा घर में फूलन की मां मूला देवी (75) रहती है। साथ में उसकी बहन रामकली और रामकली का बेटा भी रहता है। ठीक से बात कर पाना भी मूला के वश में नहीं रहा। बुढ़ापे के कारण अब जुबान साफ जवाब दे पाने में सक्षम नहीं रही और सोचने समझने की क्षमता भी कम हो गई है। इसलिए कुछ भी पूछने पर वो गांव के ही कुछ लोगों द्वारा कब्जाई गई जमीन के बारे में बताने लगती हैं।पिछले कई सालों से वह दो वक्त के खाने को भी तरस रही है। कुछ समाजसेवी संगठन के लोग चावल, आटा, दाल आदि दे जाते हैं। इसी से गुजारा चल रहा है। पुलिस पूछताछ के नाम पर टॉर्चर करती थी। जब बेटी सांसद बनी, तब भी फूलन की मां इसी हाल में रही।