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हत्यारा डॉक्टर: दुनियाभर में कोरोना से मची तबाही के वीडियो देखता रहता था सुशील, बोलता था, अब बचना बेहद मुश्किल
Sun, 05 Dec 2021 06:04 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sun, 05 Dec 2021 06:04 PM IST
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triple murder: पत्नी चंद्रप्रभा के साथ डॉक्टर सुशील
- फोटो : amar ujala
कोरोना काल के दौरान दुनिया भर में हो रहीं मौतों और तबाही के बारे में जानने की डॉ. सुशील कुमार को बेहद रुचि थी। भाई सुनील ने बताया कि जब से कोरोना की शुरुआत हुई, तब से वह खाली समय मेें इसी से संबंधित वीडियो यू-ट्यूब पर देखता रहता था। वीडियो देखकर परेशान होता था और परिवार वालों से अजीबोगरीब बातें करने लगता था।
सुनील ने बताया कि कई बार उन्हें टोका तो आक्रोशित हो जाता था। कहता था कि कोविड से दुनिया नहीं बचेगी। सुनील के मुताबिक अधिकतर समय वह इसी तरह के वीडियो देखता रहता था। अवसाद में जाने के पीछे यह भी बड़ी वजह हो सकती है। परिवार वालों को भी वीडियो के बारे में बताता था। कहता था कि आज उस देश में इतने लोग मर गए। इंडिया में इतने मर गए। आगे भी मरते रहेंगे।
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पेंशन खत्म होने से छोड़ी सरकारी नौकरी, रहने लगा परेशान
सुशील जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में फोरेंसिक विभाग का एचओडी रहा है। चार-पांच साल पहले उसने नौकरी छोड़कर रामा मेडिकल कॉलेज ज्वाइन किया था। वहां का वह प्राचार्य भी रहा। वर्तमान में फोरेंसिक विभाग का एचओडी है। सुनील ने बताया कि जब से उसने सरकारी नौकरी छोड़ी थी, तब से वह परेशान रहता था। जब भी मिलता तो कहता था कि प्राइवेट नौकरी का कोई भरोसा नहीं है।
हत्यारा डॉक्टर बोलता था सरकारी नौकरी छोड़ की गलती
सरकारी नौकरी छोड़कर गलती की। सुशील ने जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस और एमडी की पढ़ाई की। फोरेंसिक विभाग के एचओडी रहने के अलावा कुछ समय तक पोस्टमार्टम प्रभारी भी रहा। परिजनों के मुताबिक पेंशन खत्म होने की वजह से उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़कर प्राइवेट नौकरी शुरू कर दी थी। भविष्य में नर्सिंग होम भी खोलना चाहता था। वर्तमान में उनकी सैलरी एक लाख 70 हजार रुपये थी। सरकारी स्कूल में प्रिंसिपल रहीं चंद्रप्रभा की सैलरी करीब एक लाख रुपये थी। ऐसे में आर्थिक रूप उन्हें कोई परेशानी नहीं थी।
आधा वेतन होने से भी अवसाद में था सुशील
कोविड काल में रामा में सुशील की ड्यूटी लगती थी। आमतौर पर वह सुबह साढ़े नौ से दोपहर साढ़े तीन बजे तक पढ़ाता था। सुनील का कहना है कि कोविड की वजह से सुशील की सैलरी आधी हो गई थी। इससे भी परेशान रहता था। मगर उसके पास कोई विकल्प नहीं था। हालांकि आर्थिक तंगी जैसे कोई हालात थे नहीं।
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सुनील ने बताया कि कई बार उन्हें टोका तो आक्रोशित हो जाता था। कहता था कि कोविड से दुनिया नहीं बचेगी। सुनील के मुताबिक अधिकतर समय वह इसी तरह के वीडियो देखता रहता था। अवसाद में जाने के पीछे यह भी बड़ी वजह हो सकती है। परिवार वालों को भी वीडियो के बारे में बताता था। कहता था कि आज उस देश में इतने लोग मर गए। इंडिया में इतने मर गए। आगे भी मरते रहेंगे।
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पेंशन खत्म होने से छोड़ी सरकारी नौकरी, रहने लगा परेशान
सुशील जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में फोरेंसिक विभाग का एचओडी रहा है। चार-पांच साल पहले उसने नौकरी छोड़कर रामा मेडिकल कॉलेज ज्वाइन किया था। वहां का वह प्राचार्य भी रहा। वर्तमान में फोरेंसिक विभाग का एचओडी है। सुनील ने बताया कि जब से उसने सरकारी नौकरी छोड़ी थी, तब से वह परेशान रहता था। जब भी मिलता तो कहता था कि प्राइवेट नौकरी का कोई भरोसा नहीं है।
हत्यारा डॉक्टर बोलता था सरकारी नौकरी छोड़ की गलती
सरकारी नौकरी छोड़कर गलती की। सुशील ने जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस और एमडी की पढ़ाई की। फोरेंसिक विभाग के एचओडी रहने के अलावा कुछ समय तक पोस्टमार्टम प्रभारी भी रहा। परिजनों के मुताबिक पेंशन खत्म होने की वजह से उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़कर प्राइवेट नौकरी शुरू कर दी थी। भविष्य में नर्सिंग होम भी खोलना चाहता था। वर्तमान में उनकी सैलरी एक लाख 70 हजार रुपये थी। सरकारी स्कूल में प्रिंसिपल रहीं चंद्रप्रभा की सैलरी करीब एक लाख रुपये थी। ऐसे में आर्थिक रूप उन्हें कोई परेशानी नहीं थी।
आधा वेतन होने से भी अवसाद में था सुशील
कोविड काल में रामा में सुशील की ड्यूटी लगती थी। आमतौर पर वह सुबह साढ़े नौ से दोपहर साढ़े तीन बजे तक पढ़ाता था। सुनील का कहना है कि कोविड की वजह से सुशील की सैलरी आधी हो गई थी। इससे भी परेशान रहता था। मगर उसके पास कोई विकल्प नहीं था। हालांकि आर्थिक तंगी जैसे कोई हालात थे नहीं।