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किडनी कांड: दिल्ली के अपोलो अस्पताल को भी नोटिस, ये नाम आपके होश उड़ा देंगे
Sun, 24 Feb 2019 02:14 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sun, 24 Feb 2019 02:14 AM IST
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मानव अंगों (किडनी-लिवर) की खरीद फरोख्त में पुलिस ने दिल्ली के पीएसआरआई (पुष्पावति सिंहानिया रिसर्च इंस्टीट्यूट), फोर्टिस, गंगाराम के साथ ही इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल को भी नोटिस भेजा है। एसआईटी इन चारों अस्पतालों के प्रशासनिक अधिकारियों, डॉक्टरों और कर्मचारियों से पूछताछ करेगी। इसके लिए टीम दिल्ली पहुंच चुकी है।
कानपुर बर्रा से पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ में पीएसआरआई की कोऑर्डिनेटर सुनीता वर्मा और मिथुन का नाम सामने आया था। फोर्टिस की कोऑर्डिनेटर सोनिका के नाम का भी खुलासा इन्हीं आरोपियों ने किया था। इन कोऑर्डिनेटर के साथ मिलकर ही ये आरोपी किडनी और लिवर की सौदेबाजी करते थे।
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कानपुर बर्रा से पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ में पीएसआरआई की कोऑर्डिनेटर सुनीता वर्मा और मिथुन का नाम सामने आया था। फोर्टिस की कोऑर्डिनेटर सोनिका के नाम का भी खुलासा इन्हीं आरोपियों ने किया था। इन कोऑर्डिनेटर के साथ मिलकर ही ये आरोपी किडनी और लिवर की सौदेबाजी करते थे।
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अपोलो प्रबंधन ने दी सफाई, उनका नहीं लेनादेना
इसके अलावा 2016 में हुए किडनी कांड में अपोलो अस्पताल और वहां के एक नामचीन डॉक्टर का नाम आया था। डॉक्टर के दो निजी सचिव शैलेश सक्सेना व आदित्य भी आरोपी बनाए गए थे। शैलेश इस मामले में भी जेल भेजा गया है। इसलिए एसआईटी ने अपोलो प्रबंधन को भी नोटिस भेजा है। एसपी साउथ रवीना त्यागी के मुताबिक अस्पताल स्टाफ से पूछताछ करने के साथ ही जिन लोगों के नाम पहले सामने आए थे, उनसे भी पूछताछ की जाएगी।
नोटिस मिलने के बाद अपोलो अस्पताल प्रशासन ने अपनी वेबसाइट पर किडनी कांड के संबंध में सफाई दी है। लिखा है कि पुलिस ने उनसे संपर्क किया है। जो भी संभव सहयोग होगा, अस्पताल प्रशासन साथ देगा। कहा है कि ट्रांसप्लांट की जो कानूनी प्रक्रिया है, अस्पताल प्रशासन उसे पूरा करने के बाद ही ट्रांसप्लांट कराता है। यह भी लिखा है कि पुलिस ने जिन लोगों के नाम नोटिस में दर्र्ज किए हैं, वे उनके अस्पताल के नहीं हैं।
नोटिस मिलने के बाद अपोलो अस्पताल प्रशासन ने अपनी वेबसाइट पर किडनी कांड के संबंध में सफाई दी है। लिखा है कि पुलिस ने उनसे संपर्क किया है। जो भी संभव सहयोग होगा, अस्पताल प्रशासन साथ देगा। कहा है कि ट्रांसप्लांट की जो कानूनी प्रक्रिया है, अस्पताल प्रशासन उसे पूरा करने के बाद ही ट्रांसप्लांट कराता है। यह भी लिखा है कि पुलिस ने जिन लोगों के नाम नोटिस में दर्र्ज किए हैं, वे उनके अस्पताल के नहीं हैं।