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खुशखबर: दवाओं के साइड इफेक्ट की मिलेगी सटीक जानकारी, देश का सबसे बड़ा माइक्रोस्कोप पहुंचा आईआईटी

Sun, 03 Jul 2022 11:20 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Sun, 03 Jul 2022 11:20 PM IST
सार

आईआईटी कानपुर से अब दवाओं के साइड इफेक्ट की भी सटीक जानकारी मिलेगी। दरअसल, देश का सबसे बड़ा माइक्रोस्कोप आईआईटी पहुंच गया है। इसे नीदरलैंड से 30 करोड़ रुपये के बजट से मंगवाया गया है।
 

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Khuskhabar, Country's largest microscope reached IIT Kanpur, will get accurate information about the side effects of medicines
आईआईटी कानपुर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

आईआईटी कानपुर में दवाओं के साइड इफेक्ट की सटीक जानकारी देने और उससे बचाव के लिए देश का सबसे बड़ा माइक्रोस्कोप पहुंच गया है। नीदरलैंड से 30 करोड़ रुपये के बजट से माइक्रोस्कोप को आईआईटी मंगवाया गया है। इस माइक्रोस्कोप को आईआईटी की लैब में स्थापित करने में करीब एक महीना लगेगा। 

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इस माइक्रोस्कोप की मदद से दवाओं के साइड इफेक्ट का पता लगाने से लेकर सटीक रिसर्च की जा सकेगी। इसकी मदद से मानव शरीर पर होने वाले दवाओं के साइड इफेक्ट से बचाने के शोध से दवाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। इस माइक्रोस्कोप को एडवांस इमर्जिंग सेंटर में रखा गया है। यह भवन पूरी तरह वाइब्रेशन फ्री होगा।
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संस्थान के बॉयोसाइंस एंड बॉयोइंजीनियरिंग विभाग के प्रो. अरुण शुक्ला ने बताया कि कई बार दवाएं साइड इफेक्ट करती हैं। एक बीमारी को ठीक करने के लिए दी जाने वाली दवा दूसरे अंगों को प्रभावित करती हैं। अभी तक दवाओं के साइड इफेक्ट का पता लगाने के लिए दूसरों देशों पर निर्भर थे। इस माइक्रोस्कोप की मदद से अब यह सुविधा आईआईटी कानपुर में मिलेगी। 

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इस मशीन से देशभर के संस्थानों को भी रिसर्च करने का मिलेगा। इससे नई दवाएं खोजने में मदद मिलेगी और उसकी कीमत कम होगी। प्रो. शुक्ला ने बताया कि यह माइक्रोस्कोप करीब 10 टन का है। फिलहाल मशीन को खोला नहीं गया है, इसे स्थापित करने में एक महीने से अधिक का समय लगेगा। 

इस मशीन की सहायता से बनेंगी सटीक दवाएं
साइड इफेक्ट के बारे में सटीक जानकारी देने वाला क्रायो इलेक्ट्रान माइक्रोस्कोप को साइंस एंड इंजीनियरिंग रिसर्च बोर्ड की मदद से मंगाया गया है। अक्सर किडनी, लिवर, फेफड़े, दिल में समस्या होने पर प्रोटीन की दिशा गड़बड़ा जाती है। मतलब हो सकता है दिल की दवा से निकलने वाला प्रोटीन दूसरे अंगों के लिए घातक हो। 

इस माइक्रोस्कोप की मदद से प्रोटीन की दशा पता चल सकेगी। इसकी रिपोर्ट के आधार पर रसायनिक परिवर्तन कराने से सटीक दवाएं बनाई जा सकेंगी। इसमें -180 डिग्री सेल्सियस तक तापमान रखने की सुविधा है। इस माइक्रोस्कोप की मदद से प्रोटीन की सिग्नलिंग कराई जा सकेगी।

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