कारगिल: फतेहपुर के सपूत ने देश के लिए न्यौछावर किए थे प्राण, शादी के डेढ़ साल बाद गर्भ में पल रही थी बेटी
कारगिल युद्ध में फतेहपुर का भी लाल बलिदान हुआ था। कारगिल में दुश्मन से मुकाबला करते हुए 10 जून 1999 को झाऊपुर की माटी का यह जांबाज ने शहादत पाई थी। ब्लॉक अमौली मुख्यालय से दो किमी दूर स्थित झाऊपुर के वीर सपूत विजय पाल की 10 पैरा कमांडो जोधपुर में तैनाती थी। कारगिल पहाड़ी में पाकिस्तान के कब्जा करने के बाद छिड़े युद्ध में दस जून 1999 को विजयपाल ने दुश्मनों के छक्के छुड़ाते हुए एक चौकी फतह कर ली थी।
सुबह चार बजे उनके ऊपर ग्रेनेड से हमला किया था। इसमें जांबाज विजयपाल बलिदान हो गए थे। 16 जून को जांबाज का पार्थिव शरीर पैतृक गांव झाऊपुर लाया गया था। यहां राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। अमौली कोरियां मार्ग पर गांव के समीप सड़क किनारे उनकी याद में स्मारक का निर्माण कराया गया। इसमें समाधि स्थल और भव्य प्रतिमा लगाकर फूल पौधों से सुसज्जित किया गया। स्मारक स्थल में हर साल 10 जून को बलिदान दिवस का आयोजन होता है। इसमें बड़ी संख्या में लोग श्रद्धांजलि समर्पित कर शहीद के व्यक्तित्व, कृतित्व पर प्रकाश डालते हैं।
पत्नी सुषमा यादव, बेटी विजय लक्ष्मी के साथ कानपुर में आवंटित आवास में रहकर कारगिल पेट्रोल पंप का संचालन करती हैं। बेटी दिल्ली में पीसीएस की तैयारी कर रही है। पिता राम सागर यादव, मां सुखदेई ने बताया कि बेटे का दुख इसलिए हल्का हो जाता है कि वह देश के लिए बलिदान हुआ है। छोटेभाई अजय पाल यादव ने बताया कि उस समय उसकी उम्र 12 साल थी। वह भी देश की सेवा में जाना चाहता था, लेकिन भर्ती न होने से मायूस होना पड़ा। अब गांव में रहकर दुग्ध डेरी के साथ कृषि कार्य करता है।