करौली बाबा का खेल : झाड़-फूंक का आडंबर, सोशल मीडिया हैंडलर्स के हथकंडे, लोग ऐसे बनते थे शिकार
करौली बाबा के मामले में सामने आया है कि लॉकडाउन के दौरान बाबा ने सोशल एकाउंट हैंडलर्स का सहारा लिया था। साथ ही,पैसे देकर लोगों को भूत प्रेत का शिकार बताया और फिर झाड़ फूंक का नाटक किया। इसके झांसे में आए सैकड़ों लोग दूर दराज से आश्रम पहुंचते थे।
विस्तार
लॉकडाउन के दौरान जिस वक्त निर्मल बाबा का वर्चस्व धीरे-धीरे कम हो रहा था। उसी दौरान करौली बाबा उर्फ संतोष भदौरिया ने निर्मल बाबा की जगह पाने के लिए एक सोची समझी साजिश रची। साजिश के तहत उसने कुछ परिचितों को रुपये देकर उनपर भूत प्रेत का साया होने की बात कहलाई।
इसके बाद झाड़-फूंक से सही करने का नाटक दिखाया। इसका वीडियो बनाकर सोशल एकाउंट होल्डर्स के जरिये सोशल साइटों पर वायरल करवा दिया। देखते ही देखते सोशल मीडिया पर बाबा के लाखों भक्त हो गए। वीडियो के शेयर और लाइक बढ़ते गए।
फिर बाबा भक्तों को बिधनू स्थित आश्रम बुलाने लगा। आश्रम में पहुंचे लोगों से वसूली शुरू हो गई। करोड़ों का चंदा आने लगा। सोशल मीडिया पर अपना जाल बिछाने के लिए बाबा सोशल एकाउंट हैंडलर्स कोमोटी रकम भी देता है। इससे ज्यादा से ज्यादा प्रभावित होते हैं।
आईपीएस के संपर्क में आने के बाद शुरू किया जमीन का खेल
किसान यूनियन में रहने के दौरान संतोष भदौरिया की मुलाकात शहर के एक आईपीएस से हुई थी। संपर्क में आने के बाद बाबा विवादित जमीनों को कब्जाने और बेचने के काम में जुट गया। कुछ साल बाद उक्त आईपीएस विभाग के बड़े अधिकारी हो गए थे।
2017 में पूर्वज मुक्ति केंद्र खोला
इसी क्रम में उसने करौली गांव निवासी एक भदौरिया परिवार की जमीन सस्ते में खरीद ली। इसके बाद वहां आयुर्वेदिक एवं प्राकृतिक चिकित्सा का अस्पताल बनाया। फिर शहर में प्रचार प्रसार के लिए सिविल लाइन में क्लीनिक खोल लिया। सफलता न मिलने पर वर्ष 2017 में करौली में पूर्वज मुक्ति केंद्र खोल दिया गया।
बाबा का शातिर ठग ओम जायसवाल से भी नजदीकी संबंध
जेल में बंद होने के दौरान संतोष भदौरिया की मुलाकात ओम जायसवाल उर्फ राजन अहलूवालिया से हुई थी, जो क्लासिक रीजेंसी का मालिक था। ओम जायसवाल लोगों को बैंकों से लोन दिलाने के नाम पर ठगी करता था। ओम के संपर्क में आने के बाद संतोष भदौरिया ठगी करने लगा था।
करीबी की हत्या और बैंक फ्रॉड में आ चुका है नाम
संतोष भदौरिया का अपराध से पुराना नाता रहा है। वर्ष 1992 से उसके खिलाफ एक के बाद एक हत्या, हत्या का प्रयास, गाली गलौज, मारपीट, धमकी, एनएसए, धोखाधड़ी, बैंक फ्रॉड तक के मामले दर्ज हुए। समय के साथ धीरे-धीरे सभी मामले दबते गए। इसके बाद संतोष भदौरिया ने करौली बाबा का चोला ओढ़ लिया।
दो माह पहले बाबा ने आश्रम के पास स्थित गेस्ट हाउस संचालक नरेंद्र की जमीन पर भी कब्जा करना चाहा था। आरोप है कि संचालक ने जब इसका विरोध किया, तो बाबा ने एक युवती को थाने भेजकर संचालक को दुष्कर्म के मामले में फंसाकर जेल भिजवा दिया था। उसके जाते ही बाबा ने जमीन पर कब्जा कर लिया था।
हाल ही में हुआ था एक और विवाद
हाल ही में जरकला निवासी शिवम पाल व घुरूवाखेड़ा निवासी अंकित शर्मा से करौली बाबा की मौजूदगी में उनके गनरों से विवाद हो गया था। इसपर बाबा के गनरों ने फायरिंग करते हुए दहशत फैला दी थी। मामले में पीड़ितों ने बिधनू थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी लेकिन स्थानीय पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की थी।
बाबा के बर्ताव से तंग आकर कइयों ने छोड़ी थी नौकरी
रातपुरगांव निवासी जनक सिंह और सुरजीत सिंह करौली बाबा आश्रम में गार्ड की नौकरी करते थे। जनक ने बताया कि दो माह पहले दोनों सनिगवां के बघारा में एक तिलक समारोह में शामिल होने गए थे। वहां बाबा के निजी गार्डों संतोष सिंह और अवधेश सिंह के साथ उनका विवाद हो गया था।
संतोष ने की थी दो शादियां
संतोष भदौरिया उर्फ करौली बाबा ने दो शादियां की थीं। पहली पत्नी की बीमारी के कारण मौत हो गई थी। दूसरी पत्नी ममता तिवारी से दो बच्चे लव और कुश हैं। दो बेटे वर्तमान में शहर से बाहर हैं। सूत्रों के अनुसार संतोष भदौरिया ने कुछ साल पहले दूसरी पत्नी के कल्याणपुर स्थित प्लॉट को बेच दिया था।
बाबा के प्रसाद के आगे नतमस्तक है बिधनू पुलिस
बाबा के निजी गार्डों द्वारा आए दिन इलाके में विवाद किया जाता है। पीड़ित तहरीर लेकर चौकी और थाने पहुंचते थे, लेकिन पुलिसकर्मी कार्रवाई नहीं करते। इलाकाई लोगों का कहना है कि बाबा द्वारा हर माह समय से रुपयों का ‘प्रसाद’ पहुंचाया जाता है। यही कारण है कि पुलिस आश्रम से संबंधित किसी शिकायत को तरजीह नहीं देती है।