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Kanpur Violence : मुख्तार बाबा ने रखा था मंदिर की जमीन को गिरवी, प्रशासन और पुलिस ने शुरू की जांच

Mon, 18 Jul 2022 10:06 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Mon, 18 Jul 2022 10:06 AM IST
सार

वर्ष 2001 में शत्रु संपत्ति घोषित हुईं दारुल मौला और रामजानकी मंदिर की संपत्ति को मुख्तार बाबा ने बैंक में गिरवी रखा था। 2014 में बैंक ने एक करोड़ 61 लाख का लोन दिया था। छह सालों तक मुख्तार बाबा ने एक भी किस्त नहीं चुकाई थी। इस मामले में भी प्रशासन और पुलिस ने जांच शुरू की है। 

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Kanpur Violence, Mukhtar Baba had mortgaged the temple land, administration and police started investigation
मुख्तार बाबा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर में राम जानकी मंदिर पर कब्जा करने के आरोपी बाबा बिरयानी के मालिक मुख्तार अहमद उर्फ बाबा ने फर्जी तरीके से शत्रु संपत्ति को गिरवी रखकर 1.61 करोड़ का लोन लिया था। इस मामले में भी उसकी मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। जिला प्रशासन ने इस संबंध में लोन देने वाले बैंक से सारी जानकारी मांगी है।

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प्रशासन यह देखना चाहता है कि आखिर कैसे बाबा ने शत्रु संपत्ति को गिरवी रखकर करोड़ों का लोन ले लिया और किस तरह बैंक ने बिना पड़ताल किए ही लोन दे दिया। खास बात यह है कि इस लोन को देने के लिए भी बाबा ने जिन संपत्तियों के दस्तावेज बतौर गारंटी रखे थे, वह भी संभावित शत्रु संपत्तियां थी। 
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मामले के सामने आने के बाद प्रशासन के साथ-साथ अब वित्तीय जांच एजेंसियों के भी कान खड़े हो गए हैं। दरअसल, बाबा ने 2001 में शत्रु संपत्ति घोषित हो चुकी हीरामन का पुरवा स्थित संपत्ति को अपना बताते हुए बैंक ऑफ बड़ौदा की किदवई नगर शाखा से 2014 में 1.61 करोड़ रुपये का लोन लिया था। 

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इसके लिए उसने 2007 में संपत्ति के असल मालिक रहे पाकिस्तानी नागरिक शाहिद हलीम की मृत्यु के बाद पत्नी के नाम फर्जी हिबा दिखाते हुए मालिकाना हक दिखा दिया। साथ ही दारुल मौला और रामजानकी मंदिर वाली संपत्ति को गिरवी भी रख दिया। 2020 तक लोन की एक भी किस्त अदा न करने पर बैंक ने बाबा की पत्नी व बेटियों के नाम खुले लोन अकाउंट को नॉन परफार्मिंग एसेट (एनपीए) घोषित करते हुए कब्जा करने की सूचना जारी कर दी। 

इसी के बाद प्रशासन को भी यह सूचना मिली कि बाबा ने बिना एक रुपये खर्च किए ही शत्रु संपत्ति को गिरवी रखकर करोड़ों रुपये हड़प लिए। मामले ने तूल पकड़ा तो बाबा ने विवाद से बचने के लिए मई 2022 में पूरी रकम अदा कर दी। बैंक ने भी विवाद से बचने के लिए मामला सेटेल कर लिया और नो ड्यूज जारी कर दिया। 

जिला प्रशासन ने अब इसी मामले में बैंक से पूरी जानकारी मांग ली है। एसडीएम सदर अनुराज जैन ने लोन देने और लोन सेटेल करने के संबंध में पूरे दस्तावेज मांगे हैं। दस्तावेजों की पड़ताल से बाबा का पूरा खेल और साफ हो जाएगा। माना जा रहा है कि इस जांच के बाबा के खिलाफ इस मामले में भी एफआईआर दर्ज हो सकती है।

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