Kanpur Violence: दूसरे केस के 52 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल, तीन साजिशकर्ताओं पर जल्द लगेगी रासुका
नई सड़क हिंसा मामले में पुलिस अब तक दो केसों में 52-52 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट लगा चुकी है। एक केस की विवेचना अंतिम दौर में है। तो वहीं, दो केसों में चार आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट लगना बाकी है।
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कानपुर में नई सड़क हिंसा के मामले में पुलिस ने दूसरे केस में भी 52 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। पहले केस में भी यह संख्या 52 ही है। इन दोनों केसों में चार आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट लगनी बाकी है। तीसरे केस में भी जल्द चार्जशीट लगाई जाएगी। तीनों केसों में अधिकतर आरोपी एक ही हैं।
नई सड़क पर तीन जून को हिंसा हुई थी। बेकनगंज थाने में तीन केस दर्ज किए थे। पुलिस ने 62 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था, जिसमें से छह बेकसूर थे, जिनको पुलिस ने जेल से रिहा कराया था। वर्तमान में 56 आरोपी जेल में बंद हैं। दो सप्ताह पहले पुलिस ने एक केस में 47 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।
अब उस केस में पांच और आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। दूसरे केस में भी 52 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र पुलिस ने दाखिल कर दिया है। जो चार आरोपी बचे हैं, जल्द उनके खिलाफ भी साक्ष्य संकलन कर पुलिस चार्जशीट लगाएगी।
तीन साजिशकर्ताओं पर जल्द लगेगी रासुका
मुख्य साजिशकर्ता हयात जफर हाशमी पर रासुका लगाया जा चुका है। उसके तीन करीबी साथी जावेद, राहिल और एक अन्य की रासुका की फाइल पुलिस ने तैयार कर ली है। जैसे-जैसे यह आरोपी जमानत अर्जी कोर्ट में लगाएंगे वैसे ही पुलिस रासुका की प्रक्रिया पूरी करेगी। उधर फंडिंग करने वाले बिल्डर हाजी वसी व मुख्तार बाबा पर रासुका लगना मुश्किल है, क्योंकि हिंसा भड़काने व सीधेतौर पर उसमें शामिल होने के साक्ष्य नहीं है।
हिस्ट्रीशीटर अकील खिचड़ी की जमानत अर्जी खारिज
चंद्रेश्वर हाता खाली कराने के लिए रुपये देकर ईंट-पत्थर चलाने वाले लड़कों को इकट्ठा करने के आरोपी कर्नलगंज के गम्मू खां का हाता निवासी हिस्ट्रीशीटर अकील खिचड़ी और ईदगाह कालोनी कर्नलगंज निवासी अलीशान की जमानत अर्जियां अपर जिला जज 16 जितेंद्र कुमार द्विवेदी ने खारिज कर दी हैं।
जमानत पर सुनवाई के दौरान एडीजीसी दिनेश अग्रवाल व विशेष लोक अभियोजक पंकज त्रिपाठी ने कोर्ट में तर्क रखा कि नई सड़क पर तीन जून को हुए बवाल मामले में बंदी की आड़ में बिल्डर हाजी वसी और मुख्तार बाबा ने चंद्रेश्वर हाता कब्जाने की रणनीत बनाई थी।
इसी के तहत डी-2 गैंग के अफजाल को दस लाख रुपये बयाना दिया गया और हाते पर कब्जे के बाद एक करोड़ रुपये देने का वादा किया गया। अफजाल ने हिस्ट्रीशीटर अकील खिचड़ी और सबलू को चार-चार लाख रुपये देकर ईंट-पत्थर, गोली-बम चलाने के लिए लड़कों की व्यवस्था करने का जिम्मा सौंपा था। अकील ने ही एक से पांच हजार रुपये में उपद्रव के लिए लड़कों को तैयार किया था।
अकील डी-13 गैंग का सदस्य है। घटना में अकील नामजद आरोपी है और घटना के बाद से फरार हो गया था। वहीं अकील के अधिवक्ता ने घटना के दिन नई सड़क पर अकील के मौजूद न रहने और झूठा फंसाए जाने का तर्क रखा। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने अकील की तीनों मुकदमों में जमानत अर्जी खारिज कर दी। वहीं नामजद आरोपी अलीशान ने एक मुकदमे में जमानत अर्जी दाखिल की थी जो खारिज हो गई।
अकील घटना के बाद लगभग डेढ़ माह तक फरार रहा था। उसने कोर्ट में अग्रिम जमानत अर्जी भी दाखिल की थी जो खारिज हो गई थी जिसके बाद 25 जुलाई को वह गुपचुप तरीके से न्यायालय में समर्पण कर जेल चला गया था। हिस्ट्रीशीटर अकील पर बेकनगंज, कर्नलगंज और रेलबाजार थानों में कुल 13 मुकदमे दर्ज हैं। -दिनेश अग्रवाल, एडीजीसी