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Kanpur: केडीए के दो बाबू निलंबित, फाइलें दबाने और कोर्ट का नोटिस छिपाने का आरोप, कोर्ट के वारंट से खुला मामला

Fri, 10 Apr 2026 02:36 PM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: Himanshu Awasthi Updated Fri, 10 Apr 2026 02:36 PM IST
सार

Kanpur News: केडीए में जूही आवासीय योजना की फाइल दबाने और हाईकोर्ट के समन की जानकारी छिपाने के आरोप में बाबू राजेश कुमार और रजनी तोमर को सस्पेंड कर दिया गया है। बाबुओं की इस लापरवाही से केडीए उपाध्यक्ष और सचिव को अदालती वारंट का सामना करना पड़ा है।

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Kanpur Two KDA Clerks Suspended Accused of Suppressing Files and Concealing Court Notice
केडीए - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर में केडीए के दो बाबुओं को गुरुवार को निलंबित कर दिया गया। यह कार्रवाई जूही आवासीय योजना के एक प्लॉट से संबंधित फाइल दबाने और हाईकोर्ट के नोटिस की जानकारी छिपाने के आरोप में हुई है। मामले में पांच दिन पहले कोर्ट ने केडीए उपाध्यक्ष मदन सिंह गर्ब्याल और सचिव अभय कुमार पांडेय के खिलाफ जमानती वारंट भी जारी किया था।

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केडीए के अधिकारियों ने बताया कि जोन तीन के अंतर्गत जूही योजना के एक प्लॉट का दाखिल-खारिज नहीं हुआ था। भूस्वामी ने करीब एक साल पहले उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। न्यायालय में सुनवाई शुरू होने पर केडीए की ओर से पैरवी नहीं की गई। इस पर न्यायालय ने पांच दिन पहले दोनों के खिलाफ वारंट जारी कर दिया था। न्यायालय ने दोनों अधिकारियों को 11 मई को पेश होने के आदेश दिए हैं।

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राजेश कुमार और रजनी तोमर को कर दिया निलंबित
कोर्ट का आदेश मिलने पर केडीए उपाध्यक्ष और सचिव को मामले की जानकारी हुई। उपाध्यक्ष मदन सिंह गर्ब्याल ने तत्काल संबंधित फाइल तलब की है। उन्होंने विधि विभाग के प्रभारी विशेष कार्याधिकारी को उच्च न्यायालय में प्राधिकरण का पक्ष ठीक से रखने के निर्देश दिए हैं। विधि विभाग के प्रभारी विशेष कार्याधिकारी सत शुक्ला ने बताया कि राजेश कुमार और रजनी तोमर को निलंबित कर दिया गया है। केडीए मामले में जांच कर रहा है।

अधिकारियों को नहीं दी थी कोर्ट के समन की जानकारी
जांच में सामने आया कि उस समय जोन तीन के तत्कालीन बाबू राजेश कुमार ने इस फाइल को दबाए रखा था। उच्च न्यायालय में मामला पहुंचने के बाद विधि विभाग में कार्यरत महिला बाबू रजनी तोमर ने कोर्ट के समन की जानकारी उच्च अधिकारियों को नहीं दी। चार महीने पहले रजनी का तबादला लेखा विभाग में और राजेश का तबादला विधि विभाग में होने के बाद भी अधिकारियों को कोर्ट की कार्रवाई से अवगत नहीं कराया गया।

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