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कानपुर: चुनाव से पहले सुहेल अहमद के कांग्रेस में आने से पार्टी के अंदर मची खींचतान
Sat, 01 Jan 2022 08:53 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sat, 01 Jan 2022 08:53 PM IST
सार
सुहेल अहमद के आने से 10 से अधिक कांग्रेसी नेताओं के कान खड़े हो गए हैं। बताया जा रहा है कि अब सभी अपनी दावेदारी पक्की करने के लिए एक दूसरे की काट निकालने में जुट गए हैं। सुहेल अहमद की समाजवादी पार्टी में और क्षेत्र में अच्छी छवि बताई जाती है।
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अजय कुमार लल्लू के साथ सुहेल अहमद
- फोटो : amar ujala
विस्तार
कानपुर में पिछले दिनों वर्तमान और पूर्व पार्षदों के साथ समाजवादी पार्टी को छोड़कर पूर्व पार्षद दल नेता सुहेल अहमद के कांग्रेस पार्टी में आ जाने से कांग्रेस के अंदर ही खींचतान तेज हो गई है। सुहेल को सीसामऊ विधानसभा क्षेत्र से 2022 के लिए कांग्रेस का प्रबल दावेदार माना जा रहा है।
यही वजह है कि इस सीट पर अभी तक दावेदारी करने वाले 10 से अधिक कांग्रेसी नेताओं के कान खड़े हो गए हैं। बताया जा रहा है कि अब सभी अपनी दावेदारी पक्की करने के लिए एक दूसरे की काट निकालने में जुट गए हैं। सुहेल अहमद की समाजवादी पार्टी में और क्षेत्र में अच्छी छवि बताई जाती है।
इसी को देखते हुए कांग्रेस ने उन्हें अपने खेमे में शामिल किया है। यह भी चर्चा है कि कांग्रेस के अंदर कई धड़े हैं, जिसमें से कैंट क्षेत्र से कांग्रेस के विधायक सोहिल अंसारी ने सुहेल अहमद को पार्टी में शामिल कराकर अपना सिक्का जमाया है। सुहेल को जब लखनऊ में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने सदस्यता दिलाई तो वहां पर भी यह चर्चा थी कि सुहेल सीसामऊ से पार्टी का चेहरा बन सकते हैं।
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ऐसे में पिछले काफी समय से सीसामऊ क्षेत्र चुनाव लड़ने का सपना देख रहे बाकी दावेदारों को भी लगता है कि यदि वे जरा भी चूके तो टिकट हाथ से जा सकती है। इस बीच कांग्रेस में शामिल हुए सुहेल अहमद का कहना है कि यदि पार्टी उन्हें प्रत्याशी के रूप में चुनती है तो वह जरूर चुनाव लड़ेंगे।
सुहेल की वजह से सपा में भी हलचल
पिछले 25 वर्ष से समाजवादी पार्टी में रहे पार्षद सुहेल अहमद के कांग्रेस में आने से सपा में भी काफी हलचल है। दरअसल 2017 के विधानसभा चुनाव भी सुहेल अहमद ने निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ने का दावा किया था। उस समय उन्हें पार्टी और सपा के वरिष्ठ समर्थकों की तरफ से यह कहकर मना लिया गया था कि उनके लड़ने से मुस्लिम बिरादरी का वोट बंट सकता है। इस बार उनके कांग्रेस में आने से बिरादरी के बीच भी लामबंदी शुरू हो गई है।
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यही वजह है कि इस सीट पर अभी तक दावेदारी करने वाले 10 से अधिक कांग्रेसी नेताओं के कान खड़े हो गए हैं। बताया जा रहा है कि अब सभी अपनी दावेदारी पक्की करने के लिए एक दूसरे की काट निकालने में जुट गए हैं। सुहेल अहमद की समाजवादी पार्टी में और क्षेत्र में अच्छी छवि बताई जाती है।
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इसी को देखते हुए कांग्रेस ने उन्हें अपने खेमे में शामिल किया है। यह भी चर्चा है कि कांग्रेस के अंदर कई धड़े हैं, जिसमें से कैंट क्षेत्र से कांग्रेस के विधायक सोहिल अंसारी ने सुहेल अहमद को पार्टी में शामिल कराकर अपना सिक्का जमाया है। सुहेल को जब लखनऊ में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने सदस्यता दिलाई तो वहां पर भी यह चर्चा थी कि सुहेल सीसामऊ से पार्टी का चेहरा बन सकते हैं।
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ऐसे में पिछले काफी समय से सीसामऊ क्षेत्र चुनाव लड़ने का सपना देख रहे बाकी दावेदारों को भी लगता है कि यदि वे जरा भी चूके तो टिकट हाथ से जा सकती है। इस बीच कांग्रेस में शामिल हुए सुहेल अहमद का कहना है कि यदि पार्टी उन्हें प्रत्याशी के रूप में चुनती है तो वह जरूर चुनाव लड़ेंगे।
सुहेल की वजह से सपा में भी हलचल
पिछले 25 वर्ष से समाजवादी पार्टी में रहे पार्षद सुहेल अहमद के कांग्रेस में आने से सपा में भी काफी हलचल है। दरअसल 2017 के विधानसभा चुनाव भी सुहेल अहमद ने निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ने का दावा किया था। उस समय उन्हें पार्टी और सपा के वरिष्ठ समर्थकों की तरफ से यह कहकर मना लिया गया था कि उनके लड़ने से मुस्लिम बिरादरी का वोट बंट सकता है। इस बार उनके कांग्रेस में आने से बिरादरी के बीच भी लामबंदी शुरू हो गई है।