फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Kanpur tour: President was taught spiritual lessons by Baburam, Kovind became emotional after remembering his guru

कानपुर दौरा: राष्ट्रपति को बाबूराम ने पढ़ाया था अध्यात्म का पाठ, गुरु को याद कर भावुक हुए कोविंद

Sat, 26 Jun 2021 10:04 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा त्रिपुरेश अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
त्रिपुरेश अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Sat, 26 Jun 2021 10:04 AM IST
सार

झींझक निवासी अंजनी लल्लन शरण बाजपेई ने बताया कि पिता दिवंगत बाबूराम बाजपेई राष्ट्रपति के आध्यात्मिक गुरु थे।

विज्ञापन
Kanpur tour: President was taught spiritual lessons by Baburam, Kovind became emotional after remembering his guru
राष्ट्रपति की कानपुर यात्रा - फोटो : amar ujala

विस्तार

राष्ट्रपति बनने के बाद पहली बार झींझक स्टेशन पहुंचे रामनाथ कोविंद अपने आध्यात्मिक गुरु बाबूराम बाजपेई और मित्र रामविलास त्रिपाठी को मंच से याद करना नहीं भूले। कोरोना महामारी में उन्हें खोने का दुख जताते हुए वह भावुक हो गए। श्रद्धांजलि देकर उनके आदर्शों पर चलने की प्रेरणा दी।
विज्ञापन


झींझक निवासी अंजनी लल्लन शरण बाजपेई ने बताया कि पिता दिवंगत बाबूराम बाजपेई राष्ट्रपति के आध्यात्मिक गुरु थे। यादें साझा करते हुए बताया कि तीन साल की उम्र में राष्ट्रपति की मां कलावती का निधन हो गया था। उस दौरान पिता पड़ोस में ही रहते थे। मां के न होने पर कोविंद के पालन का जिम्मा उनकी दादी ने लिया था।
विज्ञापन


इसके बाद वह पिता दिवंगत बाबूलाल के संपर्क मेें आ गए। शुरुआत से ही अध्यात्म में रुचि होने के कारण वह घंटों बातें किया करते। कोविंद ने उन्हीं से अध्यात्म का पाठ पढ़ा। उनके राज्यसभा सदस्य रहने के दौरान भी एक-दूसरे के घर दोनों का आनाजाना लगा रहा। बिहार का राज्यपाल और राष्ट्रपति बनने पर शपथ ग्रहण समारोह में भी उन्होंने बाबूराम बाजपेई को बुलाया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


अंजनी लल्लन शरण ने बताया कि एक मई को पिता बाबूराम बाजपेई का निधन हो गया था। जानकारी पर राष्ट्रपति ने शोक संदेश भेजा था। झींझक में राष्ट्रपति द्वारा अपने आध्यात्मिक गुरु का जिक्र मंच से करने पर उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। कहा कि राष्ट्रपति ने आज भी उनके परिवार को याद रखा है यह बड़ी बात है।

 

राष्ट्रपति की भेंट की मूर्ति का आज भी करते पूजन
अंजनी लल्लन शरण ने बताया कि राज्यसभा सदस्य रहने के दौरान कोविंद वर्ष-2004 में मानसरोवर यात्रा पर गए थे। वहां से लौटने के बाद वह उनसे कानपुर आवास पर मिलने गए थे। वहां उन्होंने अपने आध्यात्मिक गुरु के लिए भगवान शिव की छोटी सी मूर्ति और रुद्राक्ष की माला भेंट की थी। इसे वह अपने घर में रखे हुए हैं और पूरे परिवार के साथ आज भी पूजन अर्चन करते हैं।

कोविंद के मित्र और चुनाव संयोजक भी रहे रामविलास
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने करीबी मित्र रसूलाबाद के रामविलास त्रिपाठी के निधन पर भी दुख जताया। रामविलास के बेटे जीतू त्रिपाठी ने बताया कि पिताजी और राष्ट्रपति की मित्रता वर्ष-1991 में लोकसभा चुनाव के दौरान हुई थी। उस समय कोविंद लोकसभा का चुनाव लड़ रहे थे। पिताजी उनके चुनाव संयोजक थे। राष्ट्रपति कई बार उनके घर आए, साथ ही रसूलाबाद के आजाद चौक के निकट बिल्हौर रोड पार्टी कार्यालय में आनाजाना भी होता था।

13 दिसंबर 2016 को बड़े भाई देवेंद्र त्रिपाठी की बेटी प्रिया की शादी में बिहार के राज्यपाल के तौर पर रामनाथ कोविंद हेलीकॉप्टर से घर आए और परिजनों से मुलाकात की थी। उन्होंने सेना में लेफ्टिनेंट पद पर चयनित हुए भाई शैलेंद्र त्रिपाठी के बेटे समीर त्रिपाठी की पीठ थपथपाकर उज्ज्वल भविष्य की कामना की थी। उन्होंने 27 जून को राष्ट्रपति से मुलाकात होने की संभावना जताई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed