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कानपुर: रिकॉर्ड आवंटन के बावजूद शक्कर का संकट गहराया, जांच की उठाई मांग, मुख्यमंत्री को भेजा पत्र
Tue, 13 Oct 2026 10:01 PM IST
Shikha Pandey
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: Shikha Pandey
Updated Tue, 13 Oct 2026 10:01 PM IST
सार
दि कानपुर शुगर मर्चेंट्स एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजा। चीनी उपलब्धता बढ़ाने की मांग की है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
विस्तार
केंद्र सरकार की ओर से अक्तूबर में रिकॉर्ड 30 लाख टन शक्कर का आवंटन किए जाने के बावजूद प्रदेश में शक्कर का गंभीर संकट बना हुआ है। कानपुर शुगर मर्चेंट्स एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर जांच कराने और आम उपभोक्ताओं के लिए शक्कर की उपलब्धता के लिए हस्तक्षेप की मांग की है।
एसोसिएशन के सभापति गोपाल किशन महेश्वरी ने बताया कि केंद्र सरकार ने अक्तूबर के पहले पखवाड़े में 14 लाख टन और दूसरे पखवाड़े में 16 लाख टन शक्कर आवंटित की थी। यह अब तक का सर्वाधिक मासिक आवंटन है। प्रदेश सरकार ने नॉन-रिफाइंड चीनी के मूल्य 4500 रुपये और 4600 रुपये (जीएसटी अतिरिक्त) प्रति क्विंटल निर्धारित किए थे। ये मूल्य प्रदेश के भीतर के उपभोक्ताओं के लिए थे। हालांकि प्रदेश के बाहर और थोक उपभोक्ताओं के लिए कोई मूल्य सीमा तय नहीं की गई थी।
इसी कारण पहले पखवाड़े में आवंटित चीनी का लगभग 75-80 फीसदी हिस्सा प्रदेश के बाहर या थोक उपभोक्ताओं को बेच दिया गया। इससे प्रदेश के आम उपभोक्ताओं के लिए शक्कर का अभाव हो गया है। एसोसिएशन ने मिलों की ओर से प्रदेश के बाहर और थोक उपभोक्ताओं को बेची जाने वाली शक्कर के मूल्यों में अंतर खत्म करने की मांग की है। पड़ोसी राज्यों में चीनी का भाव लगभग 5100 रुपये से 5400 रुपये प्रति क्विंटल (एक्स-मिल) है। इस अंतर के कारण मिलें प्रदेश के बाहर शक्कर बेचने को प्राथमिकता दे रही हैं। एसोसिएशन ने प्रदेश के बाहर और थोक उपभोक्ताओं को जाने वाली शक्कर की मात्रा को नियंत्रित करने का सुझाव दिया है। उन्होंने सरकार से शक्कर का मूल्य पड़ोसी राज्यों के भावों को ध्यान में रखकर निर्धारित करने को कहा है।
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एसोसिएशन के सभापति गोपाल किशन महेश्वरी ने बताया कि केंद्र सरकार ने अक्तूबर के पहले पखवाड़े में 14 लाख टन और दूसरे पखवाड़े में 16 लाख टन शक्कर आवंटित की थी। यह अब तक का सर्वाधिक मासिक आवंटन है। प्रदेश सरकार ने नॉन-रिफाइंड चीनी के मूल्य 4500 रुपये और 4600 रुपये (जीएसटी अतिरिक्त) प्रति क्विंटल निर्धारित किए थे। ये मूल्य प्रदेश के भीतर के उपभोक्ताओं के लिए थे। हालांकि प्रदेश के बाहर और थोक उपभोक्ताओं के लिए कोई मूल्य सीमा तय नहीं की गई थी।
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इसी कारण पहले पखवाड़े में आवंटित चीनी का लगभग 75-80 फीसदी हिस्सा प्रदेश के बाहर या थोक उपभोक्ताओं को बेच दिया गया। इससे प्रदेश के आम उपभोक्ताओं के लिए शक्कर का अभाव हो गया है। एसोसिएशन ने मिलों की ओर से प्रदेश के बाहर और थोक उपभोक्ताओं को बेची जाने वाली शक्कर के मूल्यों में अंतर खत्म करने की मांग की है। पड़ोसी राज्यों में चीनी का भाव लगभग 5100 रुपये से 5400 रुपये प्रति क्विंटल (एक्स-मिल) है। इस अंतर के कारण मिलें प्रदेश के बाहर शक्कर बेचने को प्राथमिकता दे रही हैं। एसोसिएशन ने प्रदेश के बाहर और थोक उपभोक्ताओं को जाने वाली शक्कर की मात्रा को नियंत्रित करने का सुझाव दिया है। उन्होंने सरकार से शक्कर का मूल्य पड़ोसी राज्यों के भावों को ध्यान में रखकर निर्धारित करने को कहा है।
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