Kanpur Solver Gang: दिल्ली का माफिया...प्रयागराज के ग्राहक और बिहार के साॅल्वर, ऐसे खुल रही हैं गिरोह की परतें
Kanpur News: पुलिस की शुरुआती जांच में दिल्ली, प्रयागराज और बिहार की कोचिंग मंडियों का कनेक्शन सामने आया है। वहीं, दो दर्जन से ज्यादा सॉल्वर पकड़े जाने पर कानपुर की काकादेव कोचिंग मंडी भी पुलिस के रडार पर है।
विस्तार
कानपुर में यूपीएसएसएससी की ग्राम पंचायत अधिकारी, ग्राम विकास अधिकारी और समाज कल्याण पर्यवेक्षक की परीक्षाओं के दौरान पकड़े गए सॉल्वरों के तार दिल्ली की मुखर्जीनगर कोचिंग मंडी से जुड़ रहे हैं। पुलिस की जांच में इस बात के संकेत मिले हैं कि सॉल्वर गिरोह मुखर्जीनगर में बैठा है।
वहीं से प्रयागराज की कोचिंग मंडी से ग्राहक तय करता था और फिर दिल्ली व प्रयागराज में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले बिहार के युवाओं को परीक्षा देने के लिए भेजता था। पुलिस अब दिल्ली, प्रयागराज और बिहार के इस त्रिकोणीय नेटवर्क को खंगालने में जुट गई है।
साथ ही बड़ी संख्या में कानपुर में सॉल्वर पकड़े जाने के बाद उनके कानपुर की काकादेव कोचिंग मंडी से कनेक्ट ढूंढ रही है। ऐसा इसलिए है क्योंकि पहले हुई कई परीक्षाओं में एसटीएफ ने जितनी बार सॉल्वरों को पकड़ा, उनका कहीं न कहीं काकादेव कोचिंग मंडी से कनेक्शन रहा है।
सॉल्वरों का प्रयागराज या बिहार से जुड़ाव
दरअसल, दो दिन की परीक्षा के दौरान पकड़े गए ज्यादातर सॉल्वरों का प्रयागराज या बिहार से कहीं न कहीं जुड़ाव मिला है। हालांकि सॉल्वर सीधे तौर पर किसी भी अभ्यर्थी को नहीं जानते थे। हालांकि जांच में यह बात जरूर सामने आई है कि परीक्षा देने पहुंचे ज्यादातर सॉल्वर बिहार के थे।
सॉल्वर बड़े गिरोह के नेटवर्क में शामिल
साथ ही, उनका कोई न कोई संपर्क दिल्ली में मुखर्जीनगर में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले युवाओं से था। पुलिस भी इस बात इत्तेफाक रखती है कि वहां के ही साथियों की मदद से सॉल्वर बड़े गिरोह के नेटवर्क में शामिल हुए हों। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए जांच बढ़ाई जा रही है।
दिल्ली का माफिया, प्रयागराज के ग्राहक, बिहार के सॉल्वर
सोमवार को पकड़े गए सॉल्वरों की जांच में पता चला है कि दिल्ली में बैठे सॉल्वर गिरोह के सदस्य एजेंटों के जरिये परीक्षार्थियों और सॉल्वरों के बीच माध्यम बन पास कराने का ठेका लेता और सॉल्वरों को परीक्षा के लिए आने-जाने और संबंधित शहर में रुकने की व्यवस्था करता। साथ ही परीक्षा के एवज में मोटी रकम भी दी जाती।
उपकरणों पर नकेल से फंसा पेंच
एसटीएफ के सूत्रों की मानें, तो इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के इस्तेमाल पर जांच एजेंसियां खास नजर रखे थीं। सर्विलांस की मदद से फोन के इस्तेमाल पर नकेल कसने की वजह से गिरोह किसी सॉल्वर को बैठाने का ही ठेका ले रहे हैं। यही वजह है कि इस बार सॉल्वर बैठाने की कोशिश ज्यादा की गई।
दो दिवसीय परीक्षा के दौरान जितने भी सॉल्वर और नकलची मिले हैं, उनकी कहां-कहां गतिविधियां रही हैं, इसकी जांच की जा रही है। दिल्ली, प्रयागराज और बिहार से इनके संपर्क की बात सामने आई है। ऐसे में यह देखा जाएगा कि यह एक-दूसरे से संपर्क में थे या किसी कॉमन कनेक्शन के जरिये इन सभी को कानपुर भेजा गया था। -बीपी जोगदंड, पुलिस आयुक्त, कानपुर