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Kanpur: अब अखिलेश दुबे के छह ऑडियो वायरल हुए, जांच में किए गए शामिल
Sat, 27 Sep 2025 09:46 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 27 Sep 2025 09:46 PM IST
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अधिवक्ता अखिलेश दुबे
- फोटो : अमर उजाला
स्वरूपनगर के होटल कारोबारी पर सामूहिक दुष्कर्म का झूठी रिपोर्ट लिखा 2.5 करोड़ की रंगदारी लेने के आरोपी अधिवक्ता अखिलेश दुबे के अब छह ऑडियो वायरल हुए हैं। यह ऑडियो क्रमश: 25, 39, 52 सेकेंड, 1.16, 1.39 और 1.59 मिनट के हैं। हालांकि यह ऑडियो पुराने बताए जा रहे हैं। उस दाैरान अखिलेश ने होटल कारोबारी पर मदद के बहाने दबाव बनाकर रुपये हासिल करने की कोशिश की लेकिन मकसद में सफल न हो सका। इसके बाद उसने कारोबारी के बेटे को फोन कर पिता पर सामूहिक दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज होने की बात बता जेल जाने का डरा दिखा मामला हल कराने के बहाने अकेले मिलने का दबाव देकर बुलाया। इन सभी ऑडियो को होटल कारोबारी की ओर से दर्ज कराई रिपोर्ट की विवेचना में जुटी किदवईनगर पुलिस ने जांच में शामिल किया है। पेश है इन ऑडियो में हुई वार्तालाप...
पहला ऑडियो (1.59 मिनट)
अखिलेश दुबे : हैलो पुष्पेंद्र तुम्हारे पिता के खिलाफ नौबस्ता थाने में गैंगरेप का मुकदमा दर्ज हुआ है। क्या तुम्हें मालूम है, अपने पिता जी से कहो भागे नहीं। पहले पूरी बात बताएं कि करना क्या है जिससे उनकी मदद हो सके। ये ऐसा करते रहेंगे और किसी दिन लटक जाएंगे। फिर पता लगेगा कि क्या हो गया। डरने दबने की जरूरत नहीं है। पहले आकर बताएं समस्या क्या है ताकि हम उनकी कुछ मदद कर सकें। किसी ने हमें बताया तो लगा कि मैं तुमको पूरी बात बताऊं। क्योंकि ये अक्ल के दुश्मन हैं इनको समझाना बेकार है। यह बीमारी को पाल कर फोड़े को कैंसर में बदल रहे हैं। पता तो लगे कि इसमें क्या है जिसने भी मुकदमा लिखाया होगा उसने इनसे संपर्क किया होगा। इसलिए बातचीत सही तरीके से करके इसका रास्ता निकालना है। नहीं तो इसमें इनका ज्यादा नुकसान हो जाएगा। तुम समझ नहीं पाओगे कि कहां नुकसान हो गया। एक लाइन में मैंने तुमको पूरी बात बता दी ठीक है। ज्यादा टाइम नहीं है। इसमें वारंट ले लेंगे फिर मैनेजमेंट नहीं हो पाएगा। तुम पिता से बात करना फिर मेरे पास अकेले आना। हमको जिससे भी मदद के लिए कहना होगा उस अधिकारी को बुलाकर कह देंगे। यह भी समझ लेंगे कि पैरवी कौन कर रहा है ताकि उसको समझाया जा सके। हमें तो मालूम भी नहीं है कि मामला क्या है। बात कर लेना। बता दिया। नहीं तो पुलिस आकर दबिश दे देगी घर या होटल में तुम्हारी बेइज्जती हो जाएगी।
दूसरा ऑडियो (1.16 मिनट)
अखिलेश : झांसी से पुलिस बल आया है दो कमरे खुलवा देना।
पुष्पेंद्र: अच्छा, कुछ नाम बताएं।
अखिलेश : झांसी के एडिशनल एसपी हैं। अवनीश गौतम के नाम से कर लो। और हां देखो सुबह की चाय की व्यवस्था दिखवा लेना। खाना तो हम करा लेंगे। कोई दिक्कत नहीं है। खाना हो तो तुम भी अपनी ही जिम्मेदारी पर करा लेना। अभी तो हम खिलाकर भेजेंगे। सुबह के लिए तुम व्यवस्था कर लेना। हमें दो कमरों के नंबर बताओ किसमे हैं।
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पुष्पेंद्र : अभी नंबर तो नहीं हैं लेकिन आप इन्हें भेज दो रूम करवा देंगे।
अखिलेश : अरे मैं खुद आऊंगा छोड़ने उन्हें। मैं तुम्हारा नंबर भी दे दूंगा। ये कल रहेंगे। आधिकारिक काम से आए हैं। वहां के एसपी ने भेजा है। यहां के एडीजी साहब से मिलना है जो अपने कानपुर पुलिस के हैं। उन्हें कुछ काम करना है तो यह लोग काम करा कर ही जाएंगे। 24 से 36 घंटे लगेंगे काम कराने में अभी तो करा ही रहे हैं। कल तक काम चलेगा इनका। करा दो, दो कमरे अवनीश गौतम के नाम से।
पुष्पेंद्र : ठीक हैं कराते हैं नमस्कार।
अन्य तीन में होटल के कमरे बुक करने की हो रही बात
वहीं, तीन अन्य ऑडियो में वह अपने परिवार के सदस्य, रिश्तेदार और पुलिस कर्मियों के लिए होटल के कमरे बुक कराने की बात करता सुना जा सकता है। वहीं, 1.39 मिनट वाले ऑडियो में वह यह कह रहा कि जिसने भी मुकदमा लिखाया है। वीआईपी तरीके से लिखाया है। नौबस्ता में मुकदमा क्यों लिखाया यह भी समझना पड़ेगा।
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पहला ऑडियो (1.59 मिनट)
अखिलेश दुबे : हैलो पुष्पेंद्र तुम्हारे पिता के खिलाफ नौबस्ता थाने में गैंगरेप का मुकदमा दर्ज हुआ है। क्या तुम्हें मालूम है, अपने पिता जी से कहो भागे नहीं। पहले पूरी बात बताएं कि करना क्या है जिससे उनकी मदद हो सके। ये ऐसा करते रहेंगे और किसी दिन लटक जाएंगे। फिर पता लगेगा कि क्या हो गया। डरने दबने की जरूरत नहीं है। पहले आकर बताएं समस्या क्या है ताकि हम उनकी कुछ मदद कर सकें। किसी ने हमें बताया तो लगा कि मैं तुमको पूरी बात बताऊं। क्योंकि ये अक्ल के दुश्मन हैं इनको समझाना बेकार है। यह बीमारी को पाल कर फोड़े को कैंसर में बदल रहे हैं। पता तो लगे कि इसमें क्या है जिसने भी मुकदमा लिखाया होगा उसने इनसे संपर्क किया होगा। इसलिए बातचीत सही तरीके से करके इसका रास्ता निकालना है। नहीं तो इसमें इनका ज्यादा नुकसान हो जाएगा। तुम समझ नहीं पाओगे कि कहां नुकसान हो गया। एक लाइन में मैंने तुमको पूरी बात बता दी ठीक है। ज्यादा टाइम नहीं है। इसमें वारंट ले लेंगे फिर मैनेजमेंट नहीं हो पाएगा। तुम पिता से बात करना फिर मेरे पास अकेले आना। हमको जिससे भी मदद के लिए कहना होगा उस अधिकारी को बुलाकर कह देंगे। यह भी समझ लेंगे कि पैरवी कौन कर रहा है ताकि उसको समझाया जा सके। हमें तो मालूम भी नहीं है कि मामला क्या है। बात कर लेना। बता दिया। नहीं तो पुलिस आकर दबिश दे देगी घर या होटल में तुम्हारी बेइज्जती हो जाएगी।
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दूसरा ऑडियो (1.16 मिनट)
अखिलेश : झांसी से पुलिस बल आया है दो कमरे खुलवा देना।
पुष्पेंद्र: अच्छा, कुछ नाम बताएं।
अखिलेश : झांसी के एडिशनल एसपी हैं। अवनीश गौतम के नाम से कर लो। और हां देखो सुबह की चाय की व्यवस्था दिखवा लेना। खाना तो हम करा लेंगे। कोई दिक्कत नहीं है। खाना हो तो तुम भी अपनी ही जिम्मेदारी पर करा लेना। अभी तो हम खिलाकर भेजेंगे। सुबह के लिए तुम व्यवस्था कर लेना। हमें दो कमरों के नंबर बताओ किसमे हैं।
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पुष्पेंद्र : अभी नंबर तो नहीं हैं लेकिन आप इन्हें भेज दो रूम करवा देंगे।
अखिलेश : अरे मैं खुद आऊंगा छोड़ने उन्हें। मैं तुम्हारा नंबर भी दे दूंगा। ये कल रहेंगे। आधिकारिक काम से आए हैं। वहां के एसपी ने भेजा है। यहां के एडीजी साहब से मिलना है जो अपने कानपुर पुलिस के हैं। उन्हें कुछ काम करना है तो यह लोग काम करा कर ही जाएंगे। 24 से 36 घंटे लगेंगे काम कराने में अभी तो करा ही रहे हैं। कल तक काम चलेगा इनका। करा दो, दो कमरे अवनीश गौतम के नाम से।
पुष्पेंद्र : ठीक हैं कराते हैं नमस्कार।
अन्य तीन में होटल के कमरे बुक करने की हो रही बात
वहीं, तीन अन्य ऑडियो में वह अपने परिवार के सदस्य, रिश्तेदार और पुलिस कर्मियों के लिए होटल के कमरे बुक कराने की बात करता सुना जा सकता है। वहीं, 1.39 मिनट वाले ऑडियो में वह यह कह रहा कि जिसने भी मुकदमा लिखाया है। वीआईपी तरीके से लिखाया है। नौबस्ता में मुकदमा क्यों लिखाया यह भी समझना पड़ेगा।