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Kanpur: क्रांति की धरती पर शिवोहम से माहौल शिवमय, पद्मश्री कैलाश खेर के गीतों ने बढ़ाई आध्यात्मिकता
Sat, 28 Feb 2026 11:53 PM IST
Shikha Pandey
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: Shikha Pandey
Updated Sat, 28 Feb 2026 11:53 PM IST
सार
कैलाश खेर के गीतों ने शिवोहम की आध्यात्मिकता बढ़ाई। तौबा रे तौबा तेरी सूरत से श्रोताओं पर दीवानगी छाई।
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शिवोहम के मंच पर कैलाश खेर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
शिवोहम के मंच पर थिरकती रंग-बिरंगी रोशनी, अटखेलियां करता धुएं का गुबार और हर-हर महादेव की ध्वनि से माहौल शिवमय हो गया। जब शिव वंदना के स्वर गूंजते तो लोग दीवानगी में नाच उठते। पद्मश्री कैलाश खेर ने जोगी तेरा रंग रंगीला गीत छेड़ा तो जैसे श्रोता सुधबुध खो बैठे। भगवान शिव का वर्चुअल अवतार देख भक्त गदगद हो गए और भक्ति का जुनून सिर चढ़ बोलने लगा। भजन और गीतों का सिलसिला चलता रहा। जब एक गीत खत्म होता तो तंद्रा भंग होती और फिर स्वर लहरी कहीं बहा ले जाती।
शनिवार शाम से छत्रपति शाहूजी महाराज विवि के मैदान में अमर उजाला जीवांजलि शिवोहम का मंच सजा। मंच की स्क्रीन पर शिव का वर्चुअल अवतार के साथ लेजर लाइट ने अठखेलियां शुरू कीं। कैलासा डीजे की तेज धुनों से लोगों में थिरकन आ गई। भक्तिमय माहौल हो गया। विवि का मैदान खचाखच भर गया। बच्चे-बड़े, बूढ़े और महिलाएं मंत्र मुग्ध से मंच पर निगाहें गड़ाए रहे।
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शनिवार शाम से छत्रपति शाहूजी महाराज विवि के मैदान में अमर उजाला जीवांजलि शिवोहम का मंच सजा। मंच की स्क्रीन पर शिव का वर्चुअल अवतार के साथ लेजर लाइट ने अठखेलियां शुरू कीं। कैलासा डीजे की तेज धुनों से लोगों में थिरकन आ गई। भक्तिमय माहौल हो गया। विवि का मैदान खचाखच भर गया। बच्चे-बड़े, बूढ़े और महिलाएं मंत्र मुग्ध से मंच पर निगाहें गड़ाए रहे।
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शिवोहम के मंच पर कैलाश खेर
- फोटो : अमर उजाला
पदमश्री कैलाश खेर ने आते ही यारा जोगी-जय यारा गीत छेड़ा। लय-ताल के साथ लेजर लाइट भी नृत्य करती। दूर आसमान तक लेजर चली जाती और अठखेलियां कर अचानक गुम होती। देखते -देखते आध्यत्मिकता लोगों के दिलो-दिमाग पर छा गई। दो गीत सुनाने के बाद पदमश्री खेर बोले-कानपुर आपको प्रणाम। श्रोताओं में शोर बरपा हुआ। यह भोलेनाथ का उत्सव है। कानपुर संतों, क्रांतिकारियों की धरती है। कानपुर में बिठूर है और मां गंगा है।
शिवोहम के मंच पर कैलाश खेर
- फोटो : अमर उजाला
हम अपनी आध्यात्मिक जड़ों की तरफ चले हैं। संक्षिप्त संबोधन के बाद फिर खेर गाने लगे, तौबा, तौबा, तौबा रे तेरी सूरत-माशाल्लाह रे कानपुर तेरी सूरत। गीत खत्म करके खेर रुके और बोले कि अब सिंगो। अच्छा रिकार्ड हुआ तो इंस्टाग्राम पर डालेंगे। इस पर युवा जोश में आ गए। नया गीते छेड़ा-कैसे बताएं कि तुझको चाहें, यार बता न पाएं। खेर ने अमीर खुसरो को भी याद किया। कहा कि वह यूपी के रहने वाले थे। फिर खुसरो का गीत पिया के रंग रंग दीनी ओढ़नी सुनाकर सूफी रंग की पर्त माहौल पर चढ़ा दी।
कार्यक्रम की शुरुआत में गंगा आरती हुई। इस दौरान लोगों ने अपने मोबाइल फोन की फ्लैश लाइट जला दी। खेर ने इस मौके पर कौन है वो, कहां से वो आया, क्या कभी अंबर से सूर्य बिछड़ता है, प्रीत की लत मोहे ऐसी लागी, अल्लाह के बंदे हंस दे, हीरे मोती मैं न चाहूं आदि गीत सुनाए। शिव स्तुति में डमरू बजाते हुए एक पैर पर नाचे भी। इस दौरान खेर ने लड़कियों को मंच पर बुलाया। सबने भक्ति गीतों पर नृत्य किया। इस मौके पर उन्होंने सेल्फी ली। श्रोताओं की भीड़ से गदगद खेर बोले कि इसे सोशल मीडिया पर भी शेयर करेंगे।