Sikh Riots: जेल भेजे गए दो आरोपियों की हालत बिगड़ी, दोनों उम्रदराज और बीमार, चलने को भी लेना पड़ रहा सहारा
सिख विरोधी दंगे में एसआईटी अब तक 28 आरोपियों को जेल भेज चुकी है। इनमें ज्यादातर आरोपी उम्रदराज और बीमार हैं। इन्हीं में से दो आरोपियों की हालत बिगड़ गई है, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
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कानपुर सिख विरोधी दंगे के मामले में जेल भेजे गए दो आरोपी बीमार हो गए हैं। दोनों उम्रदराज हैं, जिन्हें जेल अस्पताल में भर्ती किया गया है। एसआईटी दंगों से संबंधित 12 केसों में चार्जशीट की तरफ बढ़ रही है। इनमें 96 आरोपियों की पहचान की गई है। 74 आरोपी जीवित हैं। इनमें से 28 की गिरफ्तारी हो चुकी है। जेल अधीक्षक बीडी पांडेय ने बताया कि योगेंद्र व अब्दुल रहमान शुगर, बीपी की बीमारी से ग्रसित हैं। बिना सहारे चल भी नहीं पा रहे हैं।
पूर्व मंत्री का भतीजा राघवेंद्र नहीं आ रहा हाथ
निराला नगर तिहरे हत्याकांड का मुख्य आरोपी पूर्व मंत्री का भतीजा राघवेंद्र सिंह कुशवाहा है। एसआईटी उसकी तलाश में झांसी, महोबा, फतेहपुर समेत आधा दर्जन जिलों में दबिश दे रही है। रिश्तेदारों से पूछताछ की लेकिन सुराग नहीं लगा। एसआईटी डीआईजी बालेंदु भूषण सिंह ने बताया कि राघवेंद्र के खिलाफ पहले गैर जमानती वारंट लिया जाएगा। उसके बाद कुर्की की कार्रवाई की जाएगी।
एसआईटी की कार्रवाई को सराहा
अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य सरदार परविंदर सिंह शनिवार को शहर में थे। उनसे डीआईजी बालेंदु भूषण सिंह व उनकी पूरी टीम ने मुलाकात की। डीआईजी ने अब तक की कार्रवाई का विवरण बताया। इस पर परविंदर सिंह ने टीम को सराहा। उन्होंने कहा कि करीब चार दशक पुराने मामले में आरोपियों को खोज निकालना, सुबूत जुटाकर उनको जेल भेजना सराहनीय है। दिल्ली में 2700 सिख मारे गए थे, जिसमें एसआईटी सिर्फ नौ को जेल भेज पाई है। यहां 28 आरोपी जेल जा चुके हैं।
बालेंदु भूषण ही डीआईजी एसआईटी रहेंगे
डीआईजी बालेंदु भूषण सिंह का शुक्रवार को लॉजिस्टिक विभाग में ट्रांसफर कर दिया गया था। जानकारी होने पर सिख संगठनों ने मांग की थी कि उनसे एसआईटी का प्रभार न लिया जाए। इसके बाद तय हुआ है कि बालेंदु भूषण लॉजिस्टिक विभाग में तैनात रहने के साथ एसआईटी प्रमुख की भी जिम्मेदारी अतिरिक्त प्रभार के रूप में निभाएंगे।