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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Kanpur SGST tightens its grip on plastic traders detects tax evasion of Rs 2.72 crore from bogus firms

Kanpur: प्लास्टिक कारोबारी पर SGST का शिकंजा, बोगस फर्मों से 2.72 करोड़ की टैक्स चोरी पकड़ी, 50 लाख कराए जमा

Fri, 20 Feb 2026 01:11 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Fri, 20 Feb 2026 01:11 PM IST
सार

Kanpur News: कलक्टरगंज में एसजीएसटी की टीम ने प्लास्टिक और स्क्रैप कारोबारी के तीन ठिकानों पर छापा मारकर 2.72 करोड़ रुपये के फर्जी आईटीसी क्लेम का खुलासा किया है। विभाग की सख्ती के बाद कारोबारी ने मौके पर ही 50 लाख रुपये सरेंडर किए।

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Kanpur SGST tightens its grip on plastic traders detects tax evasion of Rs 2.72 crore from bogus firms
एसजीएसटी का छापा - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर में एसजीएसटी की टीमों ने प्लास्टिक और स्क्रैप कारोबारी के कलक्टरगंज स्थित तीन प्रतिष्ठानों पर 16 और 17 तारीख को छापा मारा। इसमें बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां मिलीं। बाेगस फार्मों से खरीद-फरोख्त दिखाकर गलत तरीके से 2.72 करोड़ रुपये की इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) क्लेम करने का खुलासा हुआ। घंटों चली कार्रवाई के बाद कारोबारी ने 50 लाख रुपये मौके पर ही जमा किए। यह कार्रवाई गहन डाटा एनालिसिस में सामने आए संदिग्ध लेनदेन के आधार पर की गई।

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सूत्रों के अनुसार, जोन प्रथम के रेंज-बी के निर्देशन में प्लास्टिक कारोबारी फर्म के कलक्टरगंज के साथ ही तीन ठिकानों पर एक साथ एसजीएसटी ने छापा मारा। दस्तावेजों की जांच के बाद सामने आया कि संबंधित फर्म ने लगभग 2.72 करोड़ की इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) ऐसी इनवर्ड सप्लाई के आधार पर क्लेम की जो बोगस फर्मों से प्राप्त दर्शाई गई थीं। इतना ही नहीं इन लेनदेन से जुड़ी पूर्ववर्ती फर्में भी निरस्त पाई गईं, जिससे पूरे नेटवर्क में सर्कुलर ट्रेडिंग की आशंका हुई।

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स्टॉक का समुचित विवरण भी उपलब्ध नहीं कराया
जांच में पता चला कि ई-वे बिल एवं टोल प्लाजा डाटा के मिलान में यह तथ्य भी सामने आया कि कुछ ई-वे बिलों में अंकित वाहनों की टोल प्लाजा से आवाजाही का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला जिससे वास्तविक माल परिवहन पर विभाग को शक हुआ। जांच के फर्म के संचालक जवाब देने के बजाय अफसरों का मुंह ताकते रहे। इसके अलावा गोदाम में उपलब्ध स्टॉक का समुचित विवरण भी उपलब्ध नहीं कराया गया। इसके बाद माल को अधिकारियों ने अपने कब्जे में ले लिया।

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