कानपुर आरटीओ: हैवी लाइसेंस का खेल, कागज कोई भी लगाओ, सिस्टम कर रहा ऑटो-अप्रूव, 50 से अधिक फर्जी मामले उजागर
Kanpur News: परिवहन विभाग के पोर्टल पर अनिवार्य प्रशिक्षण (फॉर्म-5ए) और मेडिकल सर्टिफिकेट की जगह कोई भी सादा कागज अपलोड करने पर भी सिस्टम आवेदन को ऑटो-अप्रूव कर रहा है। अगस्त से अब तक ऐसे 50 से अधिक नियमविरुद्ध मामले सामने आ चुके हैं।
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कानपुर में हैवी ड्राइविंग लाइसेंस के नवीनीकरण की ऑनलाइन व्यवस्था अब फर्जीवाड़े का रास्ता आसान करती नजर आ रही है। पोर्टल पर आवेदन के साथ जरूरी प्रशिक्षण और स्वास्थ्य प्रमाण पत्र अपलोड किए बिना अथवा उनकी जगह सादा या कोई भी कागज लगाने पर भी पोर्टल आवेदन को मंजूरी दे रहा है। ऑटो अप्रूव होते ही आवेदक के घर लाइसेंस भी पहुंच रहे हैं।
विभाग के अफसर यह पता नहीं कर पा रहे कि जरूरी प्रशिक्षण प्रमाण पत्र 5ए लगाया गया कि नहीं। अगस्त से अब तक ऐसे 50 से अधिक नियमविरुद्ध मामले अधिकारियों के सामने आ चुके हैं। परिवहन विभाग ने लोगों को सहूलियत देने के लिए 52 ऑनलाइन सेवाएं शुरू की हैं। इनमें हैवी ड्राइविंग लाइसेंस का नवीनीकरण भी शामिल है। नियमानुसार आवेदन के समय स्वास्थ्य प्रमाण पत्र के साथ प्रशिक्षण संबंधी फॉर्म-5ए अगस्त माह से जरूरी कर दिया गया है।
पोर्टल पर कोई भी कागज अपलोड कर दिया जा रहा
आवेदन के समय सभी कागजों के साथ फॉर्म-5ए पोर्टल पर सीधे अपलोड करना होता है। इस नई व्यवस्था में पोर्टल पर ऐसा कहीं कोई सिस्टम नहीं बनाया गया कि जो भी कागज अपलोड किए गए हैं वो सही या गलत। फॉर्म-5ए के स्थान पर पोर्टल पर कोई भी कागज अपलोड कर दिया जा रहा है और सिस्टम उसे ऑटो अप्रूव कर देता है। गलत प्रपत्रों को अपलोड कर जारी हुए लाइसेंस के मामले तब सामने आ रहे हैं।
लगातार शासन को पत्र भेज रहे हैं अधिकारी
इसका सबसे ज्यादा फायदा दलाल उठा रहे हैं। वह दो से तीन हजार रुपये लेकर हैवी लाइसेंस नवीनीकरण करा दे रहे हैं। अब लोगों को आरटीओ जाने की जरूरत ही नहीं पड़ रही है। यही नहीं अधिकारियों ने नवीनीकरण से पहले आवेदक और दस्तावेजों की प्रभावी भौतिक जांच न होने से मृत व्यक्ति के लाइसेंस तक के नवीनीकरण की आशंका जताई है। इस नई व्यवस्था से अफसर भी काफी परेशान हो गए हैं। इसके लिए अधिकारी लगातार शासन को पत्र भेज रहे हैं।
महाराष्ट्र-गुजरात के डॉक्टरों की आईडी पर भी सवाल
जांच में महाराष्ट्र और गुजरात के डॉक्टरों की आईडी से बने स्वास्थ्य प्रमाण पत्रों के इस्तेमाल के मामले भी सामने आए हैं। आशंका है कि एक ही डॉक्टर की आईडी का इस्तेमाल कर कई प्रमाण पत्र तैयार किए जा रहे हैं। यदि बिना डॉक्टर की वास्तविक जांच के प्रमाण पत्र जारी हो रहे हैं, तो ऑनलाइन व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े होते हैं।
करीब एक माह से हैवी ड्राइविंग लाइसेंस के ऑटो अप्रूवल की व्यवस्था लागू की गई है। इसमें फॉर्म-5ए अनिवार्य है, जिसे पोर्टल पर सीधे अपलोड करना होता है। जिले से इसकी मॉनिटरिंग की कोई व्यवस्था नहीं है। व्यवस्था में सुधार के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। -राकेंद्र सिंह, आरटीओ