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Kanpur: हार्ट अटैक के 50% मामलों में प्रदूषण कारण, रेड लाइट में फंसे रहने पर हो सकता है हार्ट अटैक, पढ़ें डिटेल

Sun, 02 Nov 2025 11:42 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Sun, 02 Nov 2025 11:42 AM IST
सार

Kanpur News: लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज की विशेषज्ञ डॉ. मधुर यादव ने चेतावनी दी है कि वाहनों के धुएं से निकलने वाले ढाई माइक्रॉन के जहरीले कण शरीर में समाने से हृदय गति रुक सकती है, और 50 हार्ट अटैक के मामलों का मुख्य कारण प्रदूषण है।

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Kanpur Pollution is the cause of 50% of heart attacks Stuck at a red light can cause a heart attack
फिजिशियन ऑफ इंडिया उत्तर प्रदेश चैप्टर के 42वें वार्षिक अधिवेशन अप एपीकॉन 2025 में स्मारिका विमोचन - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर में रेड लाइट पर वाहनों के धुएं के प्रदूषण में फंसे व्यक्ति को अचानक हार्ट अटैक आ सकता है। वाहनों के धुएं से निकलने वाले ढाई माइक्रॉन के कण शरीर में समाने से हृदय गति रुक जाती है। यूपी एसोसिएशन फिजीशियन ऑफ इंडिया के 42वें वार्षिक अधिवेशन यूपी एपीकॉन-2025 के सत्र में लेड हार्डिंग मेडिकल कॉलेज दिल्ली के विशेषज्ञ डॉ. मधुर यादव ने यह जानकारी साझा की।

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उन्होंने बताया कि 50 फीसदी हार्ट अटैक के मामलों में प्रमुख कारण प्रदूषण पाया गया। यूपी एपीकॉन-2025 का आयोजन जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के सभागार में किया गया। वैज्ञानिक सत्र में डॉ. यादव ने हृदय रोग एवं वायु प्रदूषण के संबंध में प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि प्रदूषण में तीन तरह के कण होते हैं।

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फिजिशियन ऑफ इंडिया उत्तर प्रदेश चैप्टर के 42वें वार्षिक अधिवेशन अप एपीकॉन 2025 में स्मारिका विमोचन - फोटो : amar ujala

कण फेफड़ों में जाकर रक्त में मिलते हैं
एक 10 माइक्रॉन, दूसरा ढाई माइक्रॉन और तीसरा .1 माइक्रॉन का होता है। ये तीनों शरीर के लिए घातक हैं, लेकिन ढाई माइक्रॉन का अधिक प्रभावित करता है। कण फेफड़ों में जाकर रक्त में मिलते हैं। इसके अलावा हृदय की क्षमता को प्रभावित करते हैं।उन्होंने बताया कि प्रदूषण का सबसे खराब असर बच्चों, बूढ़ों और डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, लिवर तथा अन्य कोमॉर्बिड रोगियों पड़ता है।

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डॉ. कौसर उस्मान - फोटो : amar ujala

बाहर निकलने पर मास्क का इस्तेमाल करें
प्रदूषण के कणों के कारण पुराने रोगियों की जटिलताएं बढ़ जाती हैं। साथ ही शरीर में फ्री रेडिकल कोशिकाएं बनती हैं जो विभिन्न अंगों में जाकर उन्हें क्षति पहुंचाने लगती हैं। ढाई माइक्रॉन वाले कण खासतौर पर हृदय और फेफड़ों के लिए अधिक घातक होते हैं। अधिक प्रदूषण हो तो व्यायाम, साइकलिंग आदि न करें। बाहर निकलने पर मास्क का इस्तेमाल करें।

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