Kanpur: हार्ट अटैक के 50% मामलों में प्रदूषण कारण, रेड लाइट में फंसे रहने पर हो सकता है हार्ट अटैक, पढ़ें डिटेल
Kanpur News: लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज की विशेषज्ञ डॉ. मधुर यादव ने चेतावनी दी है कि वाहनों के धुएं से निकलने वाले ढाई माइक्रॉन के जहरीले कण शरीर में समाने से हृदय गति रुक सकती है, और 50 हार्ट अटैक के मामलों का मुख्य कारण प्रदूषण है।
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कानपुर में रेड लाइट पर वाहनों के धुएं के प्रदूषण में फंसे व्यक्ति को अचानक हार्ट अटैक आ सकता है। वाहनों के धुएं से निकलने वाले ढाई माइक्रॉन के कण शरीर में समाने से हृदय गति रुक जाती है। यूपी एसोसिएशन फिजीशियन ऑफ इंडिया के 42वें वार्षिक अधिवेशन यूपी एपीकॉन-2025 के सत्र में लेड हार्डिंग मेडिकल कॉलेज दिल्ली के विशेषज्ञ डॉ. मधुर यादव ने यह जानकारी साझा की।
उन्होंने बताया कि 50 फीसदी हार्ट अटैक के मामलों में प्रमुख कारण प्रदूषण पाया गया। यूपी एपीकॉन-2025 का आयोजन जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के सभागार में किया गया। वैज्ञानिक सत्र में डॉ. यादव ने हृदय रोग एवं वायु प्रदूषण के संबंध में प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि प्रदूषण में तीन तरह के कण होते हैं।
कण फेफड़ों में जाकर रक्त में मिलते हैं
एक 10 माइक्रॉन, दूसरा ढाई माइक्रॉन और तीसरा .1 माइक्रॉन का होता है। ये तीनों शरीर के लिए घातक हैं, लेकिन ढाई माइक्रॉन का अधिक प्रभावित करता है। कण फेफड़ों में जाकर रक्त में मिलते हैं। इसके अलावा हृदय की क्षमता को प्रभावित करते हैं।उन्होंने बताया कि प्रदूषण का सबसे खराब असर बच्चों, बूढ़ों और डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, लिवर तथा अन्य कोमॉर्बिड रोगियों पड़ता है।
बाहर निकलने पर मास्क का इस्तेमाल करें
प्रदूषण के कणों के कारण पुराने रोगियों की जटिलताएं बढ़ जाती हैं। साथ ही शरीर में फ्री रेडिकल कोशिकाएं बनती हैं जो विभिन्न अंगों में जाकर उन्हें क्षति पहुंचाने लगती हैं। ढाई माइक्रॉन वाले कण खासतौर पर हृदय और फेफड़ों के लिए अधिक घातक होते हैं। अधिक प्रदूषण हो तो व्यायाम, साइकलिंग आदि न करें। बाहर निकलने पर मास्क का इस्तेमाल करें।