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‘हार्मोनल लोचा’: प्रदूषण-पेस्टिसाइड ने बिगाड़ा किशोरियों का हार्मोन, चेहरे पर उग रहे दाढ़ी-मूंछ, ये भी है खतरा

Thu, 07 May 2026 11:10 PM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: Himanshu Awasthi Updated Thu, 07 May 2026 11:10 PM IST
सार

Kanpur News: कानपुर में प्रदूषण और पेस्टिसाइड के प्रभाव से किशोरियों में टेस्टोस्टेरॉन हार्मोन बढ़ रहा है, जिससे चेहरे पर अनचाहे बाल और पीसीओडी की समस्या पिछले पांच वर्षों में दोगुनी हो गई है। हैलट के डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि शुद्ध खान-पान और प्राकृतिक जीवनशैली ही इससे बचने का एकमात्र रास्ता है।

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Kanpur Pollution and Pesticides Disrupt Hormones in Teenage Girls Facial Hair Growing on Faces
टेस्टोस्टेरोन - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर शहर में बढ़ता प्रदूषण और खाने में पेस्टिसाइड किशोरियों में पुरुषों वाला हार्मोन टेस्टोस्टेरॉन की मात्रा को बढ़ा रहा है। इससे उनके चेहरे पर बाल उग रहे हैं। पिछले पांच साल में इनकी संख्या दोगुनी हुई है। दाढ़ी और मूंछ आ जाने के साथ ही प्रदूषण से पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिजीज (पीसीओडी) हो रहा है। मासिक धर्म नियमित नहीं होने के साथ मोटापा बढ़ रहा है।

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हैलट अस्पताल में हर महीने सौ से डेढ़ सौ किशोरियां पीसीओडी की समस्या लेकर आ रही हैं। इनमें दाढ़ी-मूंछ आने के अलावा अनियमित माहवारी, मोटापा जैसी समस्याएं हैं। हैलट जच्चा-बच्चा अस्पताल की डॉ. दिव्या के अनुसार पीसीओडी होने के कई कारण हैं जैसे बदलती लाइफस्टाइल, जंक फूड, देर रात तक जागना और एक्सरसाइज नहीं करना है।

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बढ़ता प्रदूषण और खाने में पेस्टिसाइड है कारण
उनमें ये दिक्कत हर तीसरे बच्चे में देखने को मिलती है।  हैरानी की बात यह है कि अस्पताल आने वाली सौ से डेढ़ सौ किशोरियों में करीब 20 से 40 किशोरियां ऐसी हैं जो हरी सब्जी खा रहीं हैं और समय पर सोने के साथ हल्का-फुल्का व्यायाम या शारीरिक गतिविधि भी करती है। उनमें भी पीसीओडी देखने को मिल रहा है। इसका कारण बढ़ता प्रदूषण और खाने में पेस्टिसाइड है।

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लड़कियों के चेहरे पर अनचाहे बाल आ जा रहे
दूध में भी उत्पादन बढ़ाने के लिए हार्मोनल इंजेक्शन लगाते हैं, जो हमारे शरीर के लिए बहुत नुकसानदायक है। इसी तरह फसलों में अंधाधुंध पेस्टिसाइड का उपयोग शरीर के एंडोक्राइन सिस्टम के लिए नुकसानदायक है। इसके अलावा वातावरण में मौजूद टॉक्सिन्स भी हार्मोन्स को असंतुलित कर रहे हैं। डॉ. दिव्या ने बताया कि लड़कियों के चेहरे पर अनचाहे बाल आ जा रहे हैं।

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भविष्य में बांझपन का कारण बन सकता है
इसका कारण टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का बढ़ना है। हालांकि यह मेल हार्मोन है, लेकिन यह महिलाओं में भी कम मात्रा में होता है।  पीसीओडी की स्थिति में इसका स्तर बढ़ जाता है जिससे शारीरिक बनावट और स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। विभागाध्यक्ष डॉ. रेनू गुप्ता ने बताया कि पीसीओडी पर यदि समय रहते ध्यान न दिया गया, तो यह भविष्य में बांझपन का कारण बन सकता है। शुद्ध खान-पान, नियमित व्यायाम और प्राकृतिक जीवनशैली ही इससे बचने का एकमात्र रास्ता है।

ओपीडी में बढ़े मरीज
पांच साल पहले हैलट जच्चा-बच्चा अस्पताल की ओपीडी में हर महीने 50 से 60 किशोरियां पीसीओडी से ग्रसित आ रही थीं। इनमें 10 से 20 ऐसी थीं जो प्रदूषण और पेस्टिसाइड के चलते पीसीओडी की शिकार हुईं। अब यही संख्या 120 से 150 हो गई है। इसमें 20 से 40 ऐसी हैं जिन्हें प्रदूषण और पेस्टिसाइड के चलते पीसीओडी हो रही है।

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